जानिए कौन थीं देवी अहिल्याबाई होल्कर, जिनकी 300वीं जयंती पर भोपाल में हो रहा भव्य महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन

MP News Devi Ahilyabai Holkar: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आज, 31 मई 2025 को एक ऐतिहासिक और भव्य आयोजन की साक्षी बन रही है। जंबूरी मैदान पर आयोजित राज्य स्तरीय महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर रहे हैं।

यह आयोजन मराठा साम्राज्य की महान शासिका और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में हो रहा है, जिसमें दो लाख से अधिक महिलाएं भाग ले रही हैं। इस महासम्मेलन की खासियत यह है कि इसकी पूरी कमान महिलाओं के हाथों में है-सुरक्षा से लेकर आतिथ्य और प्रबंधन तक।

Devi Ahilyabai Holkar 300th birth anniversary grand women empowerment conference in Bhopal

मध्य प्रदेश कैडर की तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सोनाली मिश्रा इस आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था की अगुवाई कर रही हैं, जिसमें 50% से अधिक महिला पुलिस अधिकारी शामिल हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि कौन थीं देवी अहिल्याबाई होल्कर, जिनकी विरासत को आज भी नारी शक्ति के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है, और यह आयोजन क्यों है खास।

कौन थीं देवी अहिल्याबाई होल्कर?

देवी अहिल्याबाई होल्कर (31 मई 1725 - 13 अगस्त 1795) मराठा साम्राज्य की होल्कर वंश की महारानी थीं, जिन्हें उनके सुशासन, सामाजिक सुधारों, और नारी सशक्तिकरण के लिए किए गए कार्यों के लिए आज भी पूजा जाता है। उनका जन्म महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी गांव में एक साधारण दांडीवाले पाटिल परिवार में हुआ था। उनके पिता मानकोजी शिंदे एक साधारण किसान थे, लेकिन अहिल्याबाई की बुद्धिमत्ता और भक्ति ने मराठा सूबेदार मल्हारराव होल्कर का ध्यान आकर्षित किया। मल्हारराव ने उन्हें अपने पुत्र खंडेराव होल्कर की पत्नी के रूप में चुना। 1754 में खंडेराव की कुम्भेर युद्ध में मृत्यु और 1766 में मल्हारराव के निधन के बाद अहिल्याबाई ने होल्कर राज्य की बागडोर संभाली। उन्होंने माहेश्वर (मध्यप्रदेश) को अपनी राजधानी बनाया और 30 वर्षों तक एक आदर्श शासिका के रूप में शासन किया।

अहिल्याबाई को उनके समकालीन लोग 'लोकमाता' और 'देवी' कहकर पुकारते थे, क्योंकि उन्होंने अपने शासनकाल में जनकल्याण, न्याय, और सामाजिक समरसता के लिए अभूतपूर्व कार्य किए। ब्रिटिश प्रशासक सर जॉन मालकम ने उन्हें होल्कर वंश की श्रेष्ठतम शासिका बताया। उनके शासनकाल में मालवा क्षेत्र में शांति, समृद्धि, और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर देखा गया, जब चारों ओर अराजकता और युद्ध का माहौल था।

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सुशासन और न्याय की मिसाल

  1. अहिल्याबाई का शासन उनकी प्रजा के प्रति समर्पण और न्यायप्रियता का प्रतीक था। उन्होंने अपने निजी धन (खासगी) का उपयोग जनकल्याण के लिए किया, न कि शासकीय कोष का। उनके शासन में कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। एक प्रसिद्ध घटना में, जब उनके पुत्र मालेराव के रथ से एक गाय का बछड़ा कुचल गया, तो अहिल्याबाई ने अपने बेटे को सजा सुनाई और स्वयं रथ चलाकर गाय के सामने खड़ी हो गईं, ताकि प्रजा के सामने न्याय का उदाहरण प्रस्तुत हो। इस घटना के बाद माहेश्वर का वह स्थान 'आड़ा बाजार' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
  2. उन्होंने चोरों और डाकुओं से मालवा को मुक्त करने के लिए कठोर कदम उठाए। एक बार उन्होंने घोषणा की कि जो योद्धा डाकुओं का सफाया करेगा, उससे उनकी पुत्री मुक्ताबाई का विवाह होगा। यशवंत राव फडसे ने यह चुनौती स्वीकारी और मुक्ताबाई से विवाह किया। उनकी इस रणनीति ने न केवल राज्य को सुरक्षित किया, बल्कि उनकी दूरदर्शिता को भी उजागर किया।
  3. नारी सशक्तिकरण और सामाजिक सुधारअहिल्याबाई को नारी सशक्तिकरण की अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने सती प्रथा, दहेज, और महिलाओं पर सामाजिक प्रतिबंधों के खिलाफ कदम उठाए। माहेश्वर में उन्होंने साड़ी उद्योग की शुरुआत की, जिसने हजारों महिलाओं को स्वावलंबी बनाया। यह उद्योग आज भी माहेश्वरी साड़ियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। उन्होंने विधवाओं, अनाथों, और दिव्यांगों के लिए आश्रम बनवाए और महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाया। उनकी नीतियों ने समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने का काम किया।

धार्मिक और सांस्कृतिक योगदान

अहिल्याबाई ने अपने निजी धन से देशभर में लगभग 10,000 मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया, जिनमें काशी विश्वनाथ, सोमनाथ, और उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर शामिल हैं। उन्होंने कन्याकुमारी से हिमालय तक धर्मशालाएं, घाट, कुएं, बावड़ियां, और अन्नसत्र बनवाए। नर्मदा नदी के किनारे घाटों का निर्माण, बद्रीनाथ से रामेश्वरम तक तीर्थस्थलों की व्यवस्था, और विद्वानों की नियुक्ति उनके धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रति समर्पण को दर्शाती है। उन्होंने 920 मस्जिदों और दरगाहों के लिए भी आर्थिक सहायता प्रदान की, जो उनकी धार्मिक समरसता की भावना को दर्शाता है।

भोपाल में महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन

31 मई 2025 को भोपाल के जंबूरी मैदान पर आयोजित महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन अहिल्याबाई की 300वीं जयंती को समर्पित है। इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का पहला 300 रुपये का स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी करेंगे, जो अहिल्याबाई की तस्वीर और 1725-2025 के प्रतीक के साथ होगा। यह आयोजन मध्यप्रदेश सरकार और संस्कृति मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें लाड़ली बहना योजना की लाभार्थी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, और महिला उद्यमी शामिल होंगी।

इस आयोजन की थीम 'सिंदूर' है, जो हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत की सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' को श्रद्धांजलि देती है। लगभग 15,000 महिला स्वयंसेवक सिन्दूरी साड़ियों में पीएम मोदी का स्वागत करेंगी, जबकि 600 स्वयं सहायता समूह भोजन और पानी की व्यवस्था संभालेंगे। आयोजन में 2,000 महिला कार्यकर्ताओं को प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सुरक्षा में नारी शक्ति

इस आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था की कमान मध्यप्रदेश कैडर की 1993 बैच की आईपीएस अधिकारी एडीजी सोनाली मिश्रा संभाल रही हैं। उनके नेतृत्व में 47 महिला आईपीएस और राज्य पुलिस सेवा अधिकारी, 1,500 महिला कमांडो, और 700-800 महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं। यह पहली बार है जब किसी वीवीआईपी दौरे में इतनी बड़ी संख्या में महिला अधिकारी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सोनाली मिश्रा ने कहा, "यह हमारा सौभाग्य है कि हमें पीएम की सुरक्षा का दायित्व मिला। हम इसे पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ निभाएंगे।"

Devi Ahilyabai Holkar : आयोजन की अन्य विशेषताएं

इस महासम्मेलन में पीएम मोदी इंदौर मेट्रो, सतना और दतिया हवाई अड्डों, और उज्जैन में क्षिप्रा नदी पर एक नए घाट का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे। आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक, और रंगोली प्रतियोगिताएं भी होंगी। 20 मई से 31 मई तक मध्यप्रदेश में 11 दिवसीय सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें इंदौर में 'शिवयोगिनी अहिल्या' नाट्य का मंचन और कविता पाठ शामिल थे।

Devi Ahilyabai Holkar: लोकमाता की विरासत

अहिल्याबाई होल्कर का जीवन नारी शक्ति, सुशासन, और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने अपने जीवन में कई व्यक्तिगत त्रासदियां सहीं-पति खंडेराव, ससुर मल्हारराव, पुत्र मालेराव, दामाद यशवंत राव, और पुत्री मुक्ताबाई की मृत्यु-फिर भी वे प्रजा के लिए समर्पित रहीं। उनकी विरासत को आज मध्यप्रदेश सरकार और भाजपा 'लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर त्रिशताब्दी समारोह समिति' के माध्यम से जन-जन तक पहुंचा रही है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "लोकमाता का जीवन समाज, संस्कृति, और राष्ट्र के लिए समर्पित था। उनकी 300वीं जयंती पर यह आयोजन उनकी विरासत को सम्मान देने और नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रयास है।" यह आयोजन न केवल अहिल्याबाई के योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि यह भारत की नारी शक्ति को एक नई दिशा देने का संकल्प भी है।

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