Ground Report: आदिवासियों को मिला बंपर बजट, अभी तक हुआ कितना काम, सामने आई हकीकत
मध्य प्रदेश के बजट के बाद देश का बजट संसद में पेश किया जा चुका है, जहां वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में देश का आम बजट पेश किया। वहीं इसके बाद अब प्रदेश और देश दोनों ही बजट में आदिवासियों के लिए विशेष सौगातें दी गई है, जहां आदिवासियों के लिए दी गई इन सौगातों का लाभ आदिवासियों को मिलेगा, ऐसे दावे किए जा रहे हैं।
आदिवासियों के लिए इससे पहले भी प्रदेश और देश के बजट में अलग-अलग तरह की सौगातें दी जा चुकी हैं, लेकिन इन सौगातों का कितना लाभ आदिवासी समाजजनों को जमीन पर मिला है, यह जानने के लिए वन इंडिया हिंदी की टीम सीधे आदिवासियों के बीच पहुंची, जहां वन इंडिया हिंदी की टीम ने आदिवासियों के साथ-साथ आदिवासी नेताओं और आदिवासी संगठनों से योजनाओं की सच्चाई जानी है।

आदिवासियों के पैसे से हेलीकॉप्टर खरीद रही सरकार
जयस यानि जय आदिवासी युवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा बताते हैं की, हर बार यह बजट मध्य प्रदेश में SC और ST के लिए आता है। इसे हम आदिवासी उप योजना का पैसा कहते हैं। यह बजट का अपना एक परमानेंट हिस्सा होता है। इस बार जो मध्य प्रदेश का बजट है 40,804 करोड़, यह अब तक का ऐतिहासिक बजट है। सबसे बड़ा बजट है। अच्छी बात है इतना बड़ा बजट सेंक्शन किया गया। पिछली बार भी यह बजट 38000 करोड़ के आसपास था, जिसमें से कुछ भी पैसा खर्च नहीं किया गया। इस बजट का उपयोग आदिवासियों के समग्र विकास में होना चाहिए। इस बजट का उपयोग आदिवासी की शिक्षा के लिए होना चाहिए। इस बजट का उपयोग आदिवासियों के स्वास्थ्य के लिए होना चाहिए। इस बजट को व्यक्ति विकास के लिए खर्च होना चाहिए, लेकिन सरकार इसे सड़क बनाने में, पानी की टंकी बनाने में, मध्य प्रदेश की सरकार हेलीकॉप्टर आदिवासियों के पैसे से खरीद रही है।

छात्रों ने बताई अपनी समस्या
इंदौर से MA कर रहे बाबूलाल बघेल ने बताया कि, हम सरकार से मांग करते हैं कि, अब तक बैकलॉग के पदों पर भर्ती नहीं हुई है। हर साल उन्हें कैरी फॉरवर्ड किया जाता है। लाखों रिक्त पद खाली हैं। अगर वह पद भरे जाते हैं तो SC-ST और OBC के हजारों छात्रों का भला होगा। बघेल बताते हैं कि, अभी तक बजट का आदिवासियों पर सही उपयोग नहीं हो पाया है। अभी तक हमारे हॉस्टल की व्यवस्था अच्छी देखने नहीं मिलती।इस योजना का पैसा अनावश्यक खर्च किया गया है। हम चाह रहे हैं कि, इस बार का बजट हमारे SC-ST के लिए आया है, तो उन पर ही खर्च होना चाहिए।

हरदा जिले के रहने वाले छात्र बालकृष्ण मस्कोले बताते हैं कि, आदिवासी समुदाय के लिए जो पैसा आया है, यह सही जगह खर्च नहीं हो पता है। हमें इस प्रकार की समस्या देखने मिलती है कि, आदिवासी बच्चों को कई समय तक स्कॉलरशिप नहीं मिल पाती। आवास नहीं आता। समय से एडमिशन ले लिया जाता है, लेकिन स्कॉलरशिप समय पर नहीं आती, तो बच्चों को परेशान किया जाता है। सरकार से यही अपील करेंगे स्कॉलरशिप की योजना बंद करके SC-ST के छात्रों की फीस को जीरो कर दीजिए।
शाजापुर के रहने वाले छात्र पवन अहिरवार बताते हैं कि, बजट बहुत अच्छा है, इसके लिए हम सरकार की सराहना करते हैं। बजट आपने पास किया। यह अच्छी बात है, लेकिन इस बजट का उचित उपयोग होना चाहिए, जो कि नहीं हो पाता है। स्कॉलरशिप को लेकर हर दिन समस्या आती है। महानगर में हॉस्टल व्यवस्थाएं लिमिटेड रहती है। इंदौर में मध्य प्रदेश के साथ-साथ दूसरे राज्यों के छात्र पढ़ने आते हैं, लेकिन सीट लिमिटेड होने के कारण छात्र पढ़ाई नहीं कर पाते हैं।
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