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MP News: बीना विधायक निर्मला सप्रे फिर सुर्खियों में: BJP की स्थाई आमंत्रित सदस्य! कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा

Nirmala Sapre MP News: मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। कभी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं निर्मला ने पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव की सभा में BJP का दुपट्टा ओढ़कर सबको चौंका दिया था।

अब ताजा विवाद में BJP ने उन्हें अपनी बीना नगर मंडल कार्यसमिति में स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया है, जिसके बाद कांग्रेस ने हंगामा खड़ा कर दिया। कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष से निर्मला का इस्तीफा लेने की मांग की है, जबकि BJP जिला अध्यक्ष ने इसे "गलती" बताकर सफाई दी है। यह मामला न केवल सागर की सियासत को गरमा रहा है, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में भी नया तूफान खड़ा कर सकता है।

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BJP में शामिल होने का ऐलान और ताजा विवाद

निर्मला सप्रे की कहानी किसी सियासी ड्रामे से कम नहीं। 2023 में कांग्रेस के टिकट पर बीना (सुरक्षित) सीट से विधायक चुनी गईं निर्मला ने 5 मई 2024 को राहतगढ़ में आयोजित एक चुनावी सभा में मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने BJP में शामिल होने का ऐलान किया था। उन्होंने मंच पर BJP का दुपट्टा ओढ़ा और सागर लोकसभा क्षेत्र में BJP के लिए प्रचार भी किया। इस कदम ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया, क्योंकि सागर जिले की एकमात्र कांग्रेस विधायक का पाला बदलना पार्टी के लिए बड़ा झटका था।

हालांकि, निर्मला ने औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता नहीं छोड़ी और न ही विधानसभा से इस्तीफा दिया, जिसके चलते उनकी विधायकी बरकरार रही। अब ताजा घटनाक्रम ने इस मामले को और पेचीदा बना दिया है। हाल ही में सागर BJP के जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी ने मंडल कार्यसमितियों की घोषणा की, जिसमें बीना नगर मंडल की कार्यसमिति में निर्मला सप्रे को स्थाई आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया। इस सूची में BJP जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी और बीना नगर मंडल अध्यक्ष राजेंद्र उपाध्याय के हस्ताक्षर थे, जिसे कांग्रेस ने तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

कांग्रेस का हमला: "विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफा लें"

निर्मला सप्रे को BJP की मंडल कार्यसमिति में शामिल किए जाने का पत्र सामने आते ही कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा, "निर्मला सप्रे ने पहले ही सार्वजनिक रूप से BJP में शामिल होने का ऐलान कर दिया था। अब BJP ने उन्हें अपनी कार्यसमिति में औपचारिक रूप से शामिल कर लिया है। यह संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) का खुला उल्लंघन है। विधानसभा अध्यक्ष को तुरंत उनका इस्तीफा लेना चाहिए।"

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। उन्होंने X पर पत्र शेयर करते हुए लिखा, "BJP के दस्तखत वाला पत्र साफ बता रहा है कि निर्मला सप्रे अब उनकी पार्टी का हिस्सा हैं। विधानसभा अध्यक्ष को और कितने सबूत चाहिए? क्या वह अब भी विधायक बनी रह सकती हैं?" पटेल ने दावा किया कि यह मामला दल-बदल विरोधी कानून के तहत निर्मला की विधायकी रद्द करने के लिए पर्याप्त है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सागर और बीना में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन की धमकी दी है। कुछ स्थानीय नेताओं ने इसे "लोकतंत्र की हत्या" करार देते हुए कहा कि निर्मला सप्रे ने बीना के मतदाताओं के साथ धोखा किया है, जिन्होंने उन्हें कांग्रेस के टिकट पर वोट दिया था।

निर्मला सप्रे का रुख: चुप्पी ने बढ़ाया सस्पेंस

इस पूरे विवाद में सबसे हैरानी की बात यह है कि निर्मला सप्रे ने खुद कोई बयान नहीं दिया है। पिछले साल जब उन्होंने BJP में शामिल होने का ऐलान किया था, तब भी उन्होंने औपचारिक रूप से कांग्रेस से इस्तीफा नहीं दिया था। अब जब BJP ने उन्हें अपनी कार्यसमिति में शामिल किया, तो भी वह चुप हैं। कुछ स्थानीय पत्रकारों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन बंद मिला।

निर्मला की इस चुप्पी ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वह जानबूझकर दोनों नावों पर सवार रहना चाहती हैं? या फिर BJP और कांग्रेस के बीच चल रही इस रस्साकशी में वह कोई बड़ा दांव खेल रही हैं? बीना के कुछ मतदाताओं का कहना है कि निर्मला की चुप्पी उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है। एक स्थानीय दुकानदार, रामू अहिरवार, ने कहा, "हमने उन्हें वोट दिया था क्योंकि वे कांग्रेस में थीं। अब BJP में चली गईं, तो हमें बताना चाहिए। यह धोखा है।"

Nirmala Sapre MP News: दल-बदल विरोधी कानून: क्या कहता है?

यह मामला अब दल-बदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) के तहत विधानसभा अध्यक्ष के पास जा सकता है। इस कानून के मुताबिक, अगर कोई विधायक अपनी मूल पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होता है या उसकी गतिविधियां मूल पार्टी के खिलाफ जाती हैं, तो उसकी विधायकी रद्द की जा सकती है। निर्मला सप्रे के मामले में निम्नलिखित तथ्य उनके खिलाफ जा सकते हैं:

  • BJP के मंच पर ऐलान: निर्मला ने 5 मई 2024 को सार्वजनिक रूप से BJP में शामिल होने की घोषणा की थी।
  • BJP के कार्यक्रमों में हिस्सा: लोकसभा चुनाव के बाद से वह लगातार BJP के कार्यक्रमों में सक्रिय रही हैं।
  • मंडल कार्यसमिति में नाम: BJP की बीना नगर मंडल कार्यसमिति में उनका नाम स्थाई आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कांग्रेस इस मामले को विधानसभा अध्यक्ष के सामने मजबूती से उठाती है, तो निर्मला की विधायकी खतरे में पड़ सकती है। वरिष्ठ वकील अजय गुप्ता ने कहा, "BJP की कार्यसमिति में नाम शामिल होना एक ठोस सबूत है कि विधायक ने दूसरी पार्टी की सदस्यता स्वीकार कर ली है। यह दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है।"

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