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Bandhavgarh Tiger Reserve: विंटर सीजन में टूरिस्ट की जेब पर डाका! बुकिंग के नाम पर ऐसे हो रही टिकट कालाबाजारी

Bandhavgarh Tiger Reserve: रेलवे रिजर्वेशन में आपने पहले कभी सुना होगा कि चाहे कितनी लंबी वेटिंग हो लेकिन दलालों के पास कन्फर्म टिकट मिल जाता था। हालांकि अब नियम सख्त हो गए और ऐसे इक्का दुक्का केस सामने आते हैं। उसी पैटर्न को मशहूर नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व जैसे स्पॉट पर गिरोह ने अपना लिया हैं।

सीधे तौर पर कहे तो टूरिस्ट आंखों में धूल झोंककर टिकट की धड़ल्ले से कालाबाजारी हो रही हैं। यह खेल मध्य प्रदेश बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी चल रहा हैं। टूरिस्ट इस गतिविधि से बेहद परेशान हैं। क्योकि उनके बदले के टिकट, कालाबाजारी करने वाली गैंग दूसरे नामों ने पहले ही बुक कर लेती हैं।

विंटर सीजन में वाइल्ड लाइफ सेंचुरी या पार्क टूरिस्ट्स के आबाद रहते हैं। लिहाजा इसका भरपूर फायदा उठाते हुए बांधवगढ़ में देखने में आया कि कुछ रिसोर्ट और होटलों के संचालक डिमांड पर टिकट फ़ौरन मुहैया करा रहे हैं। इसके बदले में वह टिकट का दो से तीन गुना दाम वसूल रहे हैं।

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ऐसे हो रहा ये खेल
दरअसल ऑनलाइन बुकिंग में टाइगर रिजर्व का नियम ही टिकट कालाबाजारी करने वाली गैंग का बड़ा हथियार बन गया हैं। क्योकि पहले से की गई ऑनलाइन बुकिंग में यह व्यवस्था है कि पुराने नाम को निरस्त कर नया नाम जोड़ा जा सकता हैं। एक्टिव गिरोह इसका भरपूर फायदा उठा हैं।

बांधवगढ़-कान्हा नेशनल पार्क जैसी जगहों पर दूर से पहुंचने वाले पर्यटकों को जब यह पता लगता है कि बुकिंग फुल हैं। तो टिकट कालाबाजारी गिरोह के मेंबर खुद-ब-खुद परेशान टूरिस्ट से संपर्क साधते हैं। होटल में रुकने और पहुंचने का खर्च सोचकर टूरिस्ट इन लोगों से डबल-ट्रिपल कीमत पर जंगल सफारी का टिकट ले लेते हैं।

रोजाना ऑनलाइन-ऑफलाइन बुकिंग का ये है टार्गेट
ताज्जुब इस बात का भी है कि देश में सबसे ज्यादा बाघों वाले स्टेट में यह हो रहा हैं। जहां दुनिया के कई देशों के सैलानी तक पहुंचते हैं। जानकारी के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में प्रतिदिन आनलाइन बुकिंग के माध्यम से 149 और आफलाइन बुकिंग से 10 पर्यटक ही सफारी के लिए टिकट ले सकते हैं। ऐसे में, रिसोर्ट और होटल संचालक प्रतिदिन अपने कर्मचारियों के नाम पर सारे टिकट बुक करा लेते हैं। ब्लैक में टिकट बेचते हैं।

प्रबंधन को भी है इस कालाबाजारी की जानकारी
चौकाने वाली बात यह है कि पार्क प्रबंधन को भी टिकट कालाबाजारी के खेल की पूरी जानकारी हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व विजिट पर पहुंचे नए डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने खुद इन गतिविधियों को स्वीकार किया। वर्मा ने ऐसे तत्वों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। लेकिन टूरिस्ट प्लेस पर एक्टिव गिरोह की सेहत पर अभी तक कोई फर्क नहीं पड़ा।

नियमानुसार जगंल सफारी का इतना है रेट
मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व की वेबसाइट पर सफारी के लिए आनलाइन बुकिंग की जाती है, जिसमें पर्यटकों से पार्क के भीतर जाने तथा जंगल की सैर कराने वाले वाहन (जिप्सी) के 2450 रुपये लिए जाते हैं। रविवार अथवा किसी त्योहार में पड़ने वाले प्रीमियम डे पर यह शुल्क बढ़कर 3050 रुपये हो जाता है। एक टिकट से छह पर्यटक सफारी कर सकते हैं, लेकिन समूह में पहुंचने वाले पर्यटकों में से सिर्फ एक नाम अतिरिक्त जोड़ा जा सकता है। समूह के अलग-अलग लोगों को जोड़कर प्रति व्यक्ति अतिरिक्त पैसा लिया जा रहा है। जिप्सी सवारी के लिए सभी पर्यटकों की बुकिंग होती है, लेकिन इसमें भी संख्यावार अतिरिक्त पैसे लिए जा रहे हैं।

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