लखनऊ विश्वविद्यालय में "आधुनिक विज्ञान के प्रकाश में ज्योतिर्विज्ञान" विषयक व्याख्यान समाप्त हुआ
लखनऊ। आज दिनांक 28 फरवरी 2022 को ज्योतिर्विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय में "आधुनिक विज्ञान के प्रकाश में ज्योतिर्विज्ञान" विषयक व्याख्यान का आभासीय माध्यम से ऑनलाइन माध्यम से व्याख्यान संपन्न हुआ। इस व्याख्यान में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग ग्रहण किया। इस व्याख्यान कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग के ही छात्र लवकुश त्रिपाठी द्वारा मंगलाचरण से किया गया। इसके बाद ज्योतिर्विज्ञान विभाग के संयोजक डॉ० सत्यकेतु द्वारा विद्वान् वक्ता डॉ० प्रवेश व्यास, सहायक आचार्य श्री लाल बहादुर शास्त्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का परिचय एवं वाचिक स्वागत किया गया।

तत्पश्चात् वास्तु शास्त्र एवं ज्योतिष शास्त्र के अप्रतिम विद्वान् प्रो० प्रवेश व्यास द्वारा आधुनिक विज्ञान की उपलब्धियों सिद्धांतों एवं व्यवहारों का प्राचीन वैदिक साहित्य से लेकर ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न ग्रंथों में किस प्रकार अभिनिवेश है? इन तथ्यों को सरल भाषा में उदाहरण सहित ग्रंथों के संदर्भों को रखते हुए प्रस्तुत किया गया। डॉ ० व्यास ने ऋग्वैदिक मंत्रों के संदर्भों के साथ बताया कि सूर्य एवं पृथ्वी दोनों की गतियों के विषय में ऋषियों को पूर्ण ज्ञान था।
ऐतरेय ब्राह्मण का ऋषि कहता है कि ना कभी सूर्य अस्त होता है और ना कभी सूर्य उदय होता है यह पृथ्वी की गति के कारण ऐसा प्रतीत होता है। ना केवल पृथ्वी की गति अपितु सूर्य की भी गति के विषय में ऋग्वैदिक ऋषियों को ज्ञान था। जिसका संदर्भ विद्वान् वक्ता ने उपस्थित किया। ज्योतिष की महत्ता को बताते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार से खगोलीय पिंड हमारे जीवन पर प्रभाव डालने में समर्थ हैं? मंगल ग्रह पर आधुनिक विज्ञान ने यान भेज कर शोध करते हुए पाया कि मंगल ग्रह पर आयरन अत्यधिक मात्रा में है और उसका स्वरूप रक्त वर्ण का प्रतीत होता है और पृथ्वी एवं मंगल ग्रह में बहुत समानताओं के आधार पर प्रतिपादन किया कि क्यों मंगल ग्रह को शास्त्रों में भूमि का पुत्र कहा गया है।
ज्योतिष में कुंडली विचारने पर मंगल ग्रह के आधार पर किस प्रकार रक्त संबंधी विकारों एवं स्वास्थ्य का अनुमान लगाया जाता है इस विषय को उदाहरण सहित प्रकट किया। इसी प्रकार बृहस्पति एवं शनि ग्रह के स्वरूप को बताते हुए स्पष्ट किया कि वह किस प्रकार गैसीय स्वरूप के होने से जिस व्यक्ति की कुंडली में प्रतिकूल स्थान प्राप्त कर उदर एवं वायु विकारों के कारक सिद्ध होते हैं।
डॉ व्यास ने शताधिक पीपीटी स्लाइड्स के आधार पर अपने व्याख्यान को विभिन्न वैज्ञानिक लेखकों के प्रमाणों सहित उपस्थापित किया। व्याख्यान के उपरांत ज्योतिर्विज्ञान विभाग में विषयविशेषज्ञ डॉ बिपिन कुमार पांडे द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। ज्योतिर्विज्ञान विभाग के ही डॉ. अनिल कुमार पोरवाल द्वारा संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन किया गया। कार्यक्रम में ज्योतिर्विज्ञान विभाग के विभिन्न पूर्व प्राध्यापक गण पूर्व छात्र सहभागी रहे। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।












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