सिर्फ ₹30,000 के ड्रोन ने किया Israel की नाक में दम, Iron Dome फेल! क्या करेंगे Nentayahu? Video भी किया पोस्ट
Drone Attack On Israel: ईरान ने हाल ही में अपने छोटे ड्रोन्स से अमेरिकी फौज को पानी पिला दिया था। अब ऐसा लगता है कि ईरान इन्हीं ड्रोन्स को अपने प्रॉक्सी गुट हिज्बुल्लाह को न सिर्फ सप्लाई कर रहा है बल्कि उन्हें लेबनान की भीतर ही बनाने की पूरी टेक्नोलॉजी दे दी है। अब ये ड्रोन्स हिज्बुल्लाह के लिए गेम चेंजर साबित हो रही है। क्या हैं ये ड्रोन्स और कैसे पहुुंचा रहे इजरायल को नुकसान?
कैसे करते हैं काम?
कभी रॉकेट और मोर्टार हमलों के लिए जाना जाने वाला हिजबुल्लाह अब कम लागत वाले लेकिन बेहद प्रभावी एफपीवी (FPV) फाइबर ऑप्टिक ड्रोन के जरिए इजराइल के लिए नई सुरक्षा चुनौती खड़ी कर रहा है। इन ड्रोनों की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इन्हें ट्रेडीशनल इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम से रोकना बेहद मुश्किल है। क्योंकि ये रेडियो सिग्नल के बजाय फाइबर ऑप्टिक केबल के जरिए ऑपरेटर से जुड़े रहते हैं, इसलिए ऑपरेटर आखिरी क्षण तक लक्ष्य पर नजर बनाए रख सकता है और जरूरत पड़ने पर ड्रोन को दिशा बदलकर सीधे निशाने पर पहुंचा सकता है।

बॉर्डर एरिया में बढ़ा डर
यही वजह है कि युद्धविराम लागू होने के बावजूद बॉर्डर के पास वाले इजराइल इलाकों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। शोमेरा जैसे शहरों में रहने वाले लोग अब रॉकेट हमलों से ज्यादा ड्रोन हमलों को लेकर टेंशन में हैं। रॉकेट हमलों में कम से कम कुछ सेकंड की चेतावनी मिल जाती है, लेकिन इन ड्रोन के मामले में अक्सर लोगों को हमला होने तक इसका पता ही नहीं चलता। यही कारण है कि इजराइली सेना और सुरक्षा एजेंसियां इन्हें मौजूदा समय का सबसे गंभीर सामरिक खतरा मान रही हैं।
यूक्रेन युद्ध से सीखी प्लानिंग
विशेषज्ञों का मानना है कि हिजबुल्लाह ने यह रणनीति सीधे तौर पर यूक्रेन युद्ध से सीखी है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने दिखाया है कि सस्ते ड्रोन भी आधुनिक युद्ध में महंगे हथियारों और हाईटेक डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे सकते हैं। हिजबुल्लाह ने इसी मॉडल को अपनाते हुए कम लागत वाले सैकड़ों-हजारों ड्रोन का नेटवर्क तैयार किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, 29 से 38 हजार रुपए की लागत वाले ये ड्रोन इजराइल के लिए करोड़ों डॉलर के डिफेंस सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। और यही बात उसके लिए मुसीबत बनती जा रही है।
फौज और जनता दोनों निशाने पर
हिजबुल्लाह की रणनीति केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है। इजराइली अधिकारियों का आरोप है कि संगठन अब नागरिक क्षेत्रों और सीमावर्ती समुदायों को भी निशाना बना रहा है। इससे न केवल सुरक्षा जोखिम बढ़ रहा है बल्कि साइकोलॉजिकल प्रेशर भी पैदा हो रहा है। लगातार बजते सायरन, आसमान में मंडराते ड्रोन और किसी भी समय होने वाले हमलों की आशंका बॉर्जर एरिया में रहने वाले लोगों को परेशानी में डाल रहा है। इसमें इजरायल की फौज की TikTok पर फेमस हुई महिला फौजी भी मारी गई।
सिर्फ हमला नहीं, वीडियो भी जारी करता हिज्बुल्लाह
दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह इस रणनीति का प्रचार युद्ध में भी इस्तेमाल कर रहा है। हिज्बुल्लाह के लोग नियमित रूप से ड्रोन हमलों के वीडियो जारी करता है, ताकि अपने लड़ाकों का मनोबल बढ़ा सके और विरोधियों पर दबाव बना सक। इससे इजरायल पर दोहरी मार पड़ती है।
इजराइल ने बनाया एंटी-ड्रोन प्लान, कितना असरदार?
इजराइल ने इस खतरे का मुकाबला करने के लिए कई नए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सैन्य ठिकानों को जालियों से ढका जा रहा है, नई एंटी-ड्रोन तकनीकों पर काम हो रहा है और इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद इजराइली विशेषज्ञ स्वीकार कर रहे हैं कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था अभी पूरी तरह पर्याप्त नहीं है।
क्या सिर्फ सैन्य कार्रवाई से निकलेगा समाधान?
हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल सैन्य कार्रवाई इस समस्या का समाधान कर पाएगी। हिजबुल्लाह के ड्रोन हमलों के पीछे क्षेत्रीय राजनीति, ईरान का प्रभाव, लेबनान की स्थिति और इजराइल की सुरक्षा चिंताएं जैसे कई जटिल कारक जुड़े हुए हैं। ऐसे में जब तक व्यापक राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक यह ड्रोन युद्ध जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।
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