CAA Protest: हाईकोर्ट ने योगी सरकार से पूछा, किस कानून के तहत जारी किया गया रिकवरी नोटिस

लखनऊ। साल 2019 में 19 दिसंबर को हुए लखनऊ हिंसा मामले में तहसीलदार सदर लखनऊ द्वारा जारी की गई वसूली नोटिस पर हुई सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार से जवाब तलब किया है। लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्ति रंजन रे ने सरकार से सवाल पूछा है कि जब घटना हुई थी तो वसूली का कोई कानून मौजूद था। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि किस कानून के तहत यह नोटिस जारी की गई है।

lucknow caa protest high court asked question from yogi government on hearing of petetion

साथ ही उन्होंने सरकार से यह भी कहा कि इस बारे में न्यायालय को सरकार संतुष्ट करे। नोटिस में कहा गया है कि वसूली नोटिस पर याचिकाकर्ता को सुनवाई का मौका दिया जाए और कानून के अनुरूप ही कार्य किया जाए। न्यायमूर्ति ने अगली सुनवाई की तिथि 14 जुलाई निर्धारित की है। याचिकाकर्ता ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आईजी एसआर दारापुरी ने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि न्यायालय का यह आदेश स्वागत योग्य है।

उन्होंने बताया की हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि जिस नियम 143(3) के तहत यह वसूली नोटिस दी गई है वह उत्तर प्रदेश राजस्व नियमावली 2016 के तहत कोई नियम ही नहीं है। याचिका के साथ एडीएम पूर्वी लखनऊ के वसूली आदेश पर दाखिल याचिका में हाईकोर्ट के आदेश को भी संलग्न कर कहा गया था कि वसूली नोटिस जिस आदेश के तहत दी गई है वह आदेश अपने आप में विधि विरूद्ध है।

बता दें कि सीएए के खिलाफ पिछले दिसम्बर में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में काफी सरकारी सम्पत्ति नष्ट हो गई थी। जिस पर सख्त रूख अपनाते हुए नुकसान का आंकलन करने के बाद हिंसा में लिप्त अभियुक्तों के खिलाफ वसूली नोटिस जारी किया गया था। एसआर दारापुरी को भी हिंसा के मामले में पुलिस ने गिरफतार किया था। बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई थी।

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