उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा को टाटा बाय-बाय कहने वाले 14 विधायकों की पूरी हिस्ट्री
यूपी में विधानसभा के चुनाव बिल्कुल सिर पर हैं, ऐसे में कई बड़े नेताओं का इस्तीफा भाजपा के लिए सिर का दर्द बन गया है। अब तक भाजपा के 14 बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं।
लखनऊ, 13 जनवरी। यूपी में विधानसभा के चुनाव बिल्कुल सिर पर हैं, ऐसे में कई बड़े नेताओं का इस्तीफा भाजपा के लिए सिर का दर्द बन गया है। अब तक भाजपा के 14 बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। बड़ी बात ये है कि नेताओं द्वारा इस्तीफा देने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। विपक्ष इस बात का संकेत दे चुका है कि भाजपा के कई और नेता अभी पार्टी छोड़ेंगे। अब तक किन 14 नेताओं ने छोड़ी पार्टी आइए जानते हैं...

स्वामी प्रसाद मौर्य- भाजपा की टिकट पर उत्तर प्रदेश की पडरौना सीट से विधायक चुने गए और योगी सरकार में श्रम मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य चुनावों से एन पहले भाजपा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सपा में शामिल होने का ऐलान किया है। दरअसल मौर्य योगी सरकार में उनके बेटे उत्कर्ष मौर्य को उचित पद न मिलने से परेशान थे।
भगवती सागर- बिल्हौर विधानसभा सीट से 2017 में चुनाव जीतने वाले भगवती प्रसाद सागर ने भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दिया है। उन्होंने बसपा से राजनीति शुरू की थी और 2007 में चुनाव जीतकर राज्यमंत्री बने थे। वर्ष 2017 में स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ उन्होंने भाजपा ज्वाइन की थी।
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रोशनलाल वर्मा- शाहजहांपुर की तिलहर सीट से विधायक रोशनलाल शर्मा ने भी भाजपा का साथ छोड़ दिया। रोशनलाल शर्मा ने कहा कि 5 सालों में उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया।
ब्रजेश प्रजापति- बांदा जिले की तिंदवारी विधानसभा सीट से विधायक ब्रजेश प्रजापति ने भी भाजपा का साथ छोड़ दिया। माना जा रहा है कि उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में यह निर्णय लिया है।
विनय शाक्य- विधूना से विधायक विनय शाक्य ने भाजपा से इस्तीफे का ऐलान कर पार्टी को तगड़ा झटका दिया है। इस्तीफा देने के तुरंत बाद वे स्वामी प्रसाद मौर्य से मिलने उनके लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचे।
अवतार सिंह भड़ाना- पश्चिम यूपी में गुर्जर समुदाय में मजबूत पकड़ रखने वाले अवतार सिंह भड़ाना बुधवार को भाजपा छोड़ आरएलडी में शामिल हो गए। चार बार के सांसद भड़ाना ने 2017 में भाजपा की टिकट पर मीरापुर सीट से जीत हासिल की थी।
दारा सिंह चौहान- मऊ जिले की मधुबन विधानसभा सीट से विधायक दारा सिंह चौहान ने भी भाजपा को टाटा कह दिया। उन्होंने योगी सरकार पर दलितों और पिछड़ों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्हें योगी सरकार में वन पर्यावरण और जन्तु उद्यान मंत्री बनाया गया था।
मुकेश वर्मा- फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद विधानसभा सीट से विधायक मुकेश वर्मा ने भी भाजपा से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने भी भातपा पर पिछड़ों और दलितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। वर्मा ने कहा कि वे स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ हैं, वे जहां जाएंगे वह भी उनके साथ ही जाएंगे।
राकेश राठौर- राकेश राठौर ने सर्वप्रथम 2007 में बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें जीत नसीब नहीं हुई। इसके बाद पिछले विधानसभा चुनावों में उन्होंने बीजेपी की टिकट पर सीतापुर सदर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
माधुरी वर्मा- बहराइच जिले की नानपारा विधानसभा सीट से बीजेपी की विधायक माधुरी वर्मा सपा में शामिल हो गईं। माधुरी वर्मा की छवि एक दलबदलू नेता की रही है। सर्वप्रथम उन्होंने बसपा की टिकट पर चुनाव लड़ा, इसके बाद उन्होंने साल 2012 में कांग्रेस के टिकट पर नानपारा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2017 के चुनावों में उन्होंने भाजपा से चुनाव लड़ा।
जय चौबे- साल 2012 में उन्होंने भाजपा की टिकट पर खलीलाबाद से चुनाव लड़ा। इसके बाद उन्होंने 2017 में फिर से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा। अब उन्होंने सपा का दामन थाम लिया।
बाला प्रसाद अवस्थी- 2007 में बसपा के टिकट पर लखीमपुर खीरी से चुनाव लड़ने वाले बाला प्रसाद अवस्थी ने भाजपा छोड़ सपा का दामन थाम लिया। 2017 चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हुए थे।
आर के शर्मा- यूपी के बदायूं की बिल्सी विधानसभा से विधायक आर के शर्मा ने चुनाव की घोषणा बाद भाजपा को तगड़ा झटका दिया और सपा का दामन थाम लिया। ऐसा माना जा रहा था कि भाजपा इस बार उन्हें टिकट नहीं देगी, इसी वजह से उन्होंने सपा का दामन थाम लिया।
बाला अवस्थी- लखीमपुर जिले की धौरहरा सीट से विधायक रहे बाला अवस्थी ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। उनके सपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं। उन्होंने योगी सरकार पर ब्राह्मणों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।












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