10 वजहें जिनके चलते मायावती 2017 में कर सकती हैं वापसी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को तकरबीन एक वर्ष का समय शेष है। ऐसे में यूपी की सियासत में चुनावों को सरगर्मी तेज हो गयी है। बहुजन समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर से सत्ता में वापसी के लिए अपना जोर लगाना शुरु कर दिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा पर जमकर निशाना साधते हुए जनता के पैसों की बर्बादी का आरोप लगाते हुए लोहिया के सिद्धांतो का मजाक उड़ाने का आरोप लगया है।

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ऐसे में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बसपा एक प्रबल दावेदार के रूप में देखी जा रही है। ऐसे में आईये उन 10 वजहों पर नजर डालते हैं जिसके चलते बसपा एक बार फिर से सत्ता में वापसी कर सकती है।

दलित वोटों पर अभी भी जबरदस्त पकड़

दलित वोटों पर अभी भी जबरदस्त पकड़

दलितों के लिए आज भी मायावती एकमात्र विकल्प के तौर पर मौजूद हैं, उनके समर्थकों में उनका लगाव आज भी बदस्तूर मौजूद है।

बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए मायावती लोगों की पसंद

बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए मायावती लोगों की पसंद

मायावती का प्रशासन बेहतर कानून-व्यवस्था के लिए जाना जता है,ऐसे में सपा के प्रशासन से त्रस्त लोग बसपा को बेहतर विकल्प के रूप में देखते हैं।

सपा की घटती लोकप्रियता

सपा की घटती लोकप्रियता

हाल फिलहाल की कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक माहौल और बेरोजगारी को देखते हुए सपा की लोकप्रियता में कमी आयी है जो बसपा के पक्ष में जाती दिख रही है।

भाजपा में राज्य स्तर पर नेतृत्व का अभाव

भाजपा में राज्य स्तर पर नेतृत्व का अभाव

चुनाव में एक साल का ही वक्त शेष है लेकिन भाजपा के पास यूपी में अभी भी नेतृत्व का अभाव है।

मुस्लिम वोटों में सेंधमारी

मुस्लिम वोटों में सेंधमारी

मुस्लिम वोटों में ओवैसी की पार्टी के प्रवेश के चलते वोटों के बिखराव का मायावती को इसका लाभ मिल सकता है।

गठबंधन की राजनीति का उदय

गठबंधन की राजनीति का उदय

बिहार के बाद कयास लगाये जा रहे हैं कि यूपी में भी गठबंधन की राजनीति आ सकती है लेकिन गठबंधन से दूरी बनाना माया के पक्ष में जा सकता है जिसका वह पहले ही ऐलान कर चुकी हैं।

कांग्रेस कमजोर

कांग्रेस कमजोर

काफी समय से सत्ता से दूर रहने वाली कांग्रेस का प्रदेश में और कमजोर होना भी बसपा के लिए फायदे में जाता दिख रहा है। इसकी मुख्य वजह है कांग्रेस विपक्षी पार्टियों के वोटो में सेंधमारी कर सकती है।

बढ़ती बेरोजगारी

बढ़ती बेरोजगारी

जिस तरह से सपा कार्यकाल में युवाओं में बेराजगारी बढ़ी है वह बसपा के लिए फायदेमंद दिखायी दे रही है।

अन्य विकल्प का अभाव

अन्य विकल्प का अभाव

प्रदेश में सपा के बाद बाद बतौर बसपा को ही दूसरे बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। तीसरे विकल्प के अभाव के चलते पार्टी की सत्ता में आना आसान दिखता है।

पार्टी के भीतर अनुशासन

पार्टी के भीतर अनुशासन

मायावती पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिए जानी जाती है। शायद ही ऐसा कभी हो कि बसपा नेता मायावती के फैसले के विरोध में जाये और पार्टी विरोधी गतिविधि में लिप्त हो जिसका फायदा उन्हें आगामी चुनावों में मिल सकता है।

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