लव जिहाद और प्रेम विवाह को लेकर हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

नई दिल्लीः हर प्रेम विवाह को 'लव जिहाद' नहीं कहा जा सकता। ये कहना है केरल हाईकोर्ट का। गुरुवार को एक सुनवाई करते हुए केरल हाईकोर्ट ने ये बात कही। केरल हाईकोर्ट ये टिप्पणी श्रुति और अनीस हमीद की याचिका पर आई है। बता दें, कन्नूर की रहने वाली श्रुति ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर अपने पति अनीस हमीद के साथ रहने की इजाजत मांगी थी।

Kerala high court said All interfaith marriages not ‘love jihad’

आरोप लगाया गया था कि अनीस ने श्रुति के साथ जबरदस्ती निकाह किया, साथ ही जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप भी लगाया गया था। कहा गया था कि अनीस ने श्रुति को अलवाह कर लिया है। इन आरोपों के बाद श्रुति ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई जिसके बाद कोर्ट ने ये बात कही।

सुनाई के बाद केरल हाईकोर्ट का कहना है कि, 'हर प्रेम विवाह को लव जिहाद नहीं कहा जा सकता है। इस तरह की शादियों (श्रुति-अनीस का मामला) को बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि प्यार की कोई सीमा नहीं होती। हम राज्य में हर अंतर-धार्मिक विवाह को लव जिहाद या घर वापसी की नजर से देखे जाने के ट्रेंड को देखकर भयभीत हैं। ऐसा तब किया जा रहा है जब पति-पत्नी के बीच शादी से पहले निःस्वार्थ प्रेम रहा हो।'

केरल हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साल 2004 के सुप्रीम कोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह के अंतर-जातिय और अंतर- धार्मिक विवाह को बढ़ावा देना चाहिए। बता दें हाल ही में केरल हाईकोर्ट ने 25 मई को एक प्रेम विवाह को रद्द कर दिया था।

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