'आपका सपना अब मेरा वादा है', नम आखों से हेमंत ने दी शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि, पिता के लिए लिखा भावुक संदेश
Shibu Soren Last Rites: झारखंड की राजनीति के सबसे बड़े जननायक और 'दिशोम गुरु' के नाम से मशहूर शिबू सोरेन अब इस दुनिया में नहीं रहे। सोमवार को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरे झारखंड को गहरे शोक में डाल दिया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिता को याद करते हुए सोशल मीडिया पर भावुक संदेश लिखा और उन्हें झारखंड की आत्मा का स्तंभ बताया। आज पूरे राज्य की निगाहें निमरा गांव पर टिकी हैं, जहां शिबू सोरेन को अंतिम विदाई दी जाएगी।

निमरा में होगा अंतिम संस्कार
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक संरक्षक शिबू सोरेन 81 साल के थे। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन के बाद पूरा झारखंड शोक में डूब गया है। आज उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव निमरा में किया जाएगा।
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#WATCH | Jharkhand: People pay last respects to former Jharkhand CM and founding patron of JMM, Shibu Soren, at his residence in Ranchi.
He passed away at Sir Ganga Ram Hospital in Delhi on 4th August, after a prolonged illness. His last rites will be performed later today at… pic.twitter.com/SreKeasZqN
— ANI (@ANI) August 5, 2025
हेमंत सोरेन का भावुक संदेश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर पिता को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा,"मेरे जीवन के सबसे कठिन दिन हैं। मैंने सिर्फ अपने पिता को नहीं खोया, बल्कि झारखंड की आत्मा का एक स्तंभ चला गया। वे केवल मेरे बाबा नहीं थे, बल्कि मेरे मार्गदर्शक थे। उनकी छांव ने लाखों झारखंडियों को अन्याय और दर्द से बचाया।"
गरीबी से संघर्ष तक की कहानी
हेमंत सोरेन ने बताया कि उनके पिता का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था। बचपन में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया था। जमींदारों के शोषण ने उनमें लड़ने की ताकत पैदा की और यही आग उन्हें जीवनभर संघर्षशील बनाए रखी। उन्होंने आगे कहा, "मैंने बाबा को खेतों में हल चलाते देखा है। वे लोगों के बीच बैठते, उनका दुख बांटते। जब मैंने उनसे पूछा कि लोग उन्हें 'दिशोम गुरु' क्यों कहते हैं, तो उन्होंने कहा-'बेटा, मैंने केवल उनकी पीड़ा को अपना समझा और उनकी लड़ाई को अपनी लड़ाई बना लिया।'"
'दिशोम गुरु' का असली मतलब
हेमंत सोरेन ने बताया कि 'दिशोम' का मतलब समाज और 'गुरु' का मतलब रास्ता दिखाने वाला होता है। उन्होंने कहा कि बाबा निडर थे और किसी भी अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े हो जाते थे। हेमंत ने अपने पिता को याद करते हुए आगे लिखा, "वे कहते थे, अगर अन्याय के खिलाफ खड़ा होना अपराध है तो मैं बार-बार अपराध करूंगा।"
हेमंत सोरेन ने बताया कि झारखंड राज्य का गठन उनके पिता का सपना था। लेकिन उन्होंने कभी सत्ता को उपलब्धि नहीं माना। वे कहते थे, "यह राज्य मेरे लिए कोई सिंहासन नहीं, बल्कि मेरे लोगों की पहचान है।"
जनता के दिल में जिंदा रहेंगे 'बाबा'
मुख्यमंत्री ने पिता को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "आपका सपना अब मेरा वादा है। मैं झारखंड को कभी झुकने नहीं दूंगा। आपका संघर्ष अधूरा नहीं रहेगा। बाबा, अब आप आराम करें, हम आपकी राह पर चलेंगे।"
अंतिम विदाई की तैयारी
शिबू सोरेन को अंतिम विदाई देने के लिए झारखंड के कई हिस्सों से लोग उनके निवास स्थान पर पहुंचे। रांची के मेट्रोपॉलिटन आर्कबिशप विंसेंट एइंद ने कहा, "वे बिरसा मुंडा के बाद झारखंड के लोगों के मसीहा माने जाते हैं। उन्होंने समाज को शराब की बुराई से निकालकर शिक्षा और जागरूकता की राह दिखाई।"
#WATCH | Ranchi, Jharkhand: As he arrives to pay tribute to #ShibuSoren, Metropolitan Archbishop of Ranchi, Vincent Aind says, "He is considered the messiah after Birsa Munda, especially for Chota Nagpur. The example he set for the culture and respectable life of the people here… pic.twitter.com/mcFVKkc1iD
— ANI (@ANI) August 5, 2025
आज निमरा गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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