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Shibu Soren Death: पीएम मोदी ने दी शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि, सीएम हेमंत को लगाया गले, जानिए क्या कहा?

Shibu Soren Passes Away: झारखंड की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का निधन हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद पिता के निधन की जानकारी दी।

81 वर्षीय शिबू सोरेन की तबीयत बीते कई दिनों से ठीक नहीं थी। उन्हें जुलाई के आखिरी हफ्ते में किडनी से जुड़ी दिक्कतों के कारण दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से उनकी हालत नाज़ुक बनी हुई थी और डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा था।

Hemant Soren-PM Modi

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने सोमवार सुबह 8 बजकर 56 मिनट पर शिबू सोरेन के निधन की पुष्टि की। अस्पताल की ओर से जारी बयान में बताया गया कि वह लंबे समय से बीमार थे। उन्हें किडनी की समस्या थी और करीब डेढ़ महीने पहले स्ट्रोक भी आया था। पिछले एक महीने से वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे।

झारखंड में 3 दिन का राजकीय शोक

झारखंड सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक शिबू सोरेन के निधन पर राज्य में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। इस दौरान सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और किसी भी तरह के सरकारी समारोह आयोजित नहीं किए जाएंगे। सरकार ने यह फैसला शिबू सोरेन के योगदान और उनके प्रति सम्मान जताने के लिए लिया है।

अस्पताल में थे भर्ती

शिबू सोरेन लंबे समय से नियमित रूप से इलाज करा रहे थे। हाल ही में उनकी तबीयत बिगड़ने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अस्पताल पहुंचे थे। उस समय उन्होंने मीडिया से कहा था कि "पिता जी को हाल ही में भर्ती कराया गया है और उनकी सेहत की जांच जारी है।"
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पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संस्थापक संरक्षक शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने अस्पताल पहुंचकर उनके परिवार से मुलाकात की और संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान पीएम मोदी से गले मिलकर हेमंत सोरेन फफक कर रो पड़े।

उन्होंने कहा, "झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन जी को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। इस दुख की घड़ी में मैंने उनके परिवार से मिलकर शोक संवेदना प्रकट की। उनका पूरा जीवन आदिवासी समाज के हितों के लिए समर्पित रहा, इसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।"

झारखंड की राजनीति में बड़ी क्षति

शिबू सोरेन के निधन से झारखंड की राजनीति को बड़ी क्षति पहुंची है। वे राज्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक रहे और लंबे समय तक आदिवासी समाज की आवाज बने रहे।

चार दशक लंबा राजनीतिक सफर

शिबू सोरेन ने राजनीति में चार दशक से भी ज्यादा लंबा समय बिताया। वह आठ बार लोकसभा सांसद चुने गए और दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे। उनकी दूसरी राज्यसभा सदस्यता फिलहाल चल रही थी।

झारखंड आंदोलन के अगुवा

संथाल समुदाय से ताल्लुक रखने वाले शिबू सोरेन का जन्म रामगढ़ जिले में हुआ था, जो उस समय बिहार का हिस्सा था। साल 1972 में उन्होंने वामपंथी ट्रेड यूनियन नेता ए।के। रॉय और कुर्मी नेता बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की। उन्होंने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने वाले आंदोलन में अहम भूमिका निभाई, जिसके नतीजे में साल 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ।

डुमका से पहली जीत और राजनीतिक उतार-चढ़ाव

शिबू सोरेन पहली बार 1980 में डुमका लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। यह सीट बाद में JMM का गढ़ बन गई। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें यहां बीजेपी के नलिन सोरेन से 45 हजार से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा।

सिर्फ 9 दिन के लिए बने मुख्यमंत्री

शिबू सोरेन पहली बार 2005 में झारखंड के मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्हें महज 9 दिन में इस्तीफा देना पड़ा। इसके बावजूद वह झारखंड की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता बने रहे।
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