दिलचस्प मोड़ पर झारखंड चुनाव: NDA हो या INDIA गठबंधन, दोनों की बढ़ी परेशानियां, सीटों पर छिड़ी बहस!

Jharkhand election 2024: झारखंड चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक दलों द्वारा अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करने के साथ ही एक दिलचस्प कहानी सामने आ रही है। इंडिया गठबंधन हो या फिर एनडीए, दोनों गठबंधन के बीच असंतोष बढ़ रहा है। भाजपा जहां बागी नेताओं से परेशान है। वहीं इंडिया गठबंधन के लिए अंतर्कलह मुश्किलें खड़ी कर रहा है।

भाजपा के अंदर असंतोष बढ़ रहा है। कई भाजपा नेताओं ने इस्तीफा देकर या स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा करके कठोर कदम उठाए हैं, जिनमें से कुछ तो झामुमो में भी शामिल हो गए हैं। असंतोष की लहर इतनी बढ़ गई है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बागियों को मनाने में जुटे हैं। वो खुद बागी नेताओं के घर जाकर-जाकर उनसे मिल रहे हैं।

Jharkhand election 2024

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इंडिया गठबंधन के एक दल ने दिया अल्टीमेटम

दूसरी ओर इंडिया अलायंस पार्टी के एक दल ने एक सख्त अल्टीमेटम जारी किया है। भाकपा-माले ने आरोप लगाते हुए कहा है कि झामुमो और कांग्रेस की वजह से आज इंडिया गठबंधन का ये हाल है। कांग्रेस और जेएमएम ने आपस में 70 सीटें बांट ली हैं, दो बिल्कुल एकतरफा फैसला था। आरजेडी भी इंडिया गठबंधन के कांग्रेस और जेएमएम से नाराज ही दिख रही है। उनको भी उनके मन मुताबिक सीटें गठबंधन में नहीं दी गई है।

माले के राज्य सचिव मनोज भक्त ने यह भी कहा है कि इंडिया गठबंधन अपने लक्ष्य से पूरी तरह भटक गया है। असल में माले चाहता है कि धनवार सीट से जेएमएम अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले। लेकिन जेएमएम ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया है। जेएमएम ने यहां भाजपा से बागवत करके आए केदार हाजरा को टिकट दिया है।

भाकपा-माले ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर इंडिया गठबंधन ने इन विवादों को जल्दी नहीं सुलझाया तो हम दूसरी लिस्ट जारी कर देंगे। यह कदम गठबंधनों के भीतर बढ़ते दबाव और चुनाव के करीब आने के साथ राजनीतिक गठबंधनों में बदलाव की संभावना को दिखा रहा है।

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बागी नेताओं को मनाने में जुटी भाजपा

दूसरी ओर एनडीए गठबंधन में 68 सीटों पर लड़ रही भाजपा बागियों को मनाने में जुट गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता 'ऑपरेशन बागी क्लीन' में लगे हैं। भाजपा की कोशिश है कि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख से पहले नाराज नेताओं को मना लिया जाए। झारखंड बीजेपी के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान, सह प्रभारी हिमंता बिस्वा सरमा और केंद्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष खुद बागियों को मनाने में लगे हुए हैं।

भाजपा ने शनिवार 26 अक्टूबर को इसी कड़ी में अपने नाराज नेता डॉ. रवींद्र कुमार राय को प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बना कर मना लिया है। रवींद्र कुमार राय गिरिडीह जिले के राजधनवार या फिर बगोदर या गांडेय से टिकट चाहते थे। लेकिन भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। जिसके बाद उनके निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा तेज हो गई थी। जिसके बाद भाजपा ने उन्हें प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बनाया।

वहीं भाजपा ने हाल ही में अपने बागी नेता पूर्व विधायक मेनका सरदार को भी मना लिया है। मेनका सरदार ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। लेकिन इसके बावजूद भाजपा के कई वरिष्ठ नेता पार्टी से दूर हो गए हैं, अब भाजपा की कोशिश इनको मनाने की है।

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