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झारखंड चुनाव: JMM+कांग्रेस की सरकार ने चुनावी वादों को कितना पूरा किया? हेमंत की 'रिपोर्ट कार्ड' पर BJP हमलावर

Jharkhand Election 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), कांग्रेस और राजद गठबंधन की सरकार को अब पांच साल होने को हैं। ऐसे में अब राज्य की जनता हेमंत सोरेन सरकार के कामों की 'रिपोर्ट कार्ड' का आकलन कर रही है। 2019 विधानसभा चुनावों के दौरान जेएमएम और कांग्रेस ने कई बड़े वादे किए थे। अब जनता हेमंत सरकार से उन वादों पर जवाब मांग रही है।

वहीं विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) हेमंत सोरेन सरकार के 'रिपोर्ट कार्ड' पर हमलावर है। भाजपा का कहना है कि हेमंत के चुनावी नारे और घोषणाएं अब तक सिर्फ शब्दों तक सीमित रह गई हैं और जनता को अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सके हैं।

Jharkhand Election 2024

भाजपा ने हेमंत सरकार को रोजगार सृजन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा सुधार, कृषि समर्थन, महिला सुरक्षा, घुसपैठियों जैसे कई मुद्दों पर घेरा है। ऐसे में आइए समझने की कोशिश करते हैं कि हेमंत सरकार ने अब तक अपने कितने चुनावी वादे पूरे किए हैं?

हेमंत सरकार ने कितने वादे किए थे और अब तक कितने निभाए?

🔴 रोजगार को लेकर किए गए वादे: JMM और कांग्रेस ने वादा किया था कि पांच लाख झारखंडी युवाओ को नौकरी दी जाएगी। हालांकि, सरकार के गठन के बाद इस दिशा में ठोस कदम उठाने का कोई संकेत नहीं मिला है। झारखंड में बेरोजगारी की दर में कोई कमी नहीं आई है और युवा वर्ग अभी भी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है। आज भी झारखंड में सरकारी विभागों में हजारों पद खाली हैं, उदाहरण के लिए अभी शिक्षा विभाग में 1,52,000 पद रिक्त हैं। 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत 8 फीसदी की तुलना में 14.03 प्रतिशत थी।

🔴 बेरोजगारी भत्ता देने का वादा: JMM और कांग्रेस ने 2019 में वादा किया था कि नौकरी नहीं दे पाने की स्थिति में उनकी सरकार बेरोजगार स्नातक युवाओं को 5 हजार से लेकर 7 हजार तक बेरोजगारी भत्ता देगी। लेकिन यह वादा अभी भी सुचारू रूप से पूरा नहीं हुआ है। कई युवा इस योजना के तहत पंजीकरण कराने में कठिनाइयों का भी सामना कर रहे हैं।

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महिलाओं के लिए किए कई वादे अब भी अधूरे

2019 के विधानसभा चुनावों में, JMM ने महिला अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई पहल करने का वादा किया था, जिसमें प्राथमिक स्तर से लेकर पीएचडी तक लड़कियों के लिए मुफ्त शिक्षा, प्रत्येक उपखंड में महिला कॉलेज की स्थापना और पूरे राज्य में महिला बैंक बनाना,महिलाओं के शैक्षिक और वित्तीय सशक्तीकरण को बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए ये वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं।

इसके अलावा जेएमएम ने तीन साल से कम उम्र के बच्चों वाली महिला श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी में 15% की वृद्धि, आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं को खाना पकाने की लागत के लिए 2000 रुपये मासिक प्रदान करने और 300,000 से अधिक आबादी वाले क्षेत्रों में महिला पुलिस थानों की स्थापना करने की बात कही थी। लेकिन ऐसा लगता है ये वादे अब सिर्फ कागजों पर ही रह गए हैं। ये बात अलग है कि चुनाव के पहले हेमंत सोरेन की सरकार मैया सम्मान योजना के तहत महिलाओं के खाते में पैसा भेजना शुरू किया है। लेकिन इस योजना पर जिस तरह जल्दबाजी में काम किया जा रहा है, वो सूबे की जनता समझ रही है।

हेमंत सोरेन ने झारखंड में महिला सुरक्षा पर भी खूब जोर दिया था। लेकिन आज स्थिति ये है राज्य में महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों की संख्या बढ़ रही है। दिसंबर 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध दर 40.2 फीसदी था। भाजपा भी इस मामले में हेमंत सोरेन सरकार पर हमलावर है। भाजपा ने एक रिपोर्ट के जरिए दावा किया है कि राज्य हर साल डायन समझकर 30 से ज्यादा महिलाएं मारी जा रही हैं।

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गरीबों, किसानों और मजदूरों के लिए किया गया वादा भी हुआ धुंधला!

2019 में विधानसभा चुनावों के दौरानJMM ने गरीब परिवार को सालाना 72,000 रुपये की राशि देने का वादा किया था। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों पर चाय की पत्ती, सरसों का तेल, साबुन, सब्जियाँ और दाल जैसी आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराने का भी वादा किया गया था लेकिन ये वादे अब धुंधले पड़ गए हैं।

पार्टी ने राज्य के किसानों और खेतिहर मजदूरों से भी कई वादे किए थे। इनमें राज्य में "किसान बैंक" की स्थापना, सब्जियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करना, किसानों को उत्पादन लागत का कम से कम 150% MSP के रूप में गारंटी देना और हर ब्लॉक में मॉडल किसान स्कूल खोलना शामिल है। हालांकि हेमंत सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने में कुछ काम किया है लेकिन इनमें से कई वादे अभी भी पूरे नहीं हुए हैं।

आदिवासी और अल्पसंख्यक से किया वादा 'पेसा एक्ट' लागू करने का वादा भी अधूरा

झामुमो ने अपने घोषणा पत्र में आदिवासी और अल्पसंख्यक स वादा किया था कि वो 'पेसा एक्ट' लागू करेंगे। लेकिन ये वादा भी अधूरा रहा है। जलाई 2024 में ही हाई कोर्ट ने हेमंत सरकार को इसके लिए फटकारा था। कोर्ट ने सरकार को दो महीने के भीतर इसे लागू करने का भी निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पेसा एक्ट बने 28 साल हो गए और इसे लागू अब तक नहीं किया गया। हेमंत सरकार इसे लागू करने के लिए और समय मांग रही थी लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया था। बता दें कि पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल एरिया एक्ट (पेसा) का मकसद जनजातीय आबादी को स्वशासन प्रदान करना है।

इतना ही नहीं जेएमएम और कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों के लिए सच्चर कमेटी की रिपोर्ट लागू करना, उर्दू अकादमी का गठन और अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड बनाने की बात कही थी लेकिन वो भी वादा अब फाइलों दब गया है।

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स्मार्ट सिटी बनाने का वादा रहा पीछे!

जेएमएम ने शहरी विकास और राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वादों किया था कि पलामू, गढ़वा, गिरिडीह, चाईबासा, दुमका और देवघर को विश्व स्तरीय शहरों के रूप में विकसित किया जाएगा। जिसमें 25 हजार करोड़ का पर्याप्त निवेश करके उन्हें स्मार्ट शहरों में बदलने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अब सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल के करीब पहुंच गई है और ये शहर अब भी स्मार्ट सिटी बनने का सपना देख रही है।

इसके अलावा, पार्टी ने एक पर्यटक सर्किट बनाकर राज्य भर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने की योजना की रूपरेखा तैयार की थी जिसमें पलामू, संथाल परगना क्षेत्र और चाईबासा शामिल होंगे। लेकिन ये भी खोखले निकले हैं। जेएमएम के घोषणापत्र में प्रशासनिक सुधारों से जुड़े वादे भी शामिल थे, जिन्हें पूरा नहीं किया गया। इनमें पलामू, चाईबासा और हजारीबाग को उप-राजधानी बनाने के प्रस्ताव शामिल थे।

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JMM+कांग्रेस के अधूरे वादे भाजपा को पहुंचा सकते हैं फायदा!

JMM और कांग्रेस ने चुनाव के दौरान जिस प्रकार के वादे किए थे, उनके पूरा ना हो पाने की विफलता ने जनता के बीच निराशा बढ़ाई है। सरकारी योजनाओं की कमी और प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार ने जनता की आशाओं को ध्वस्त कर दिया है। झारखंड की विकास दर में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है और अधिकांश योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं। अब झारखंड की जनता उन वादों की याद दिलाते हुए हेमंत सोरेन से सवाल पूछ रही है "क्या ये सिर्फ चुनावी जुमले थे?"

JMM और कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है। जिसका फायदा राज्य के चुनावों में भाजपा को मिल सकता है। भाजपा का चुनावी वादों को पूरा करने का स्ट्राइक रेट कांग्रेस और जेएमएम से बेहतर है। भाजपा सरकारों ने उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा में अपने वादों में से कई को प्रभावी रूप से लागू किया है। भाजपा के किए गए चुनावी वादों का लगभग 60-70 फीसदी कार्यान्वयन देखने को मिला है।

भाजपा का दावा है कि झारखंड की जनता को विकास और सुधार की उम्मीद वो फिर से देंगे। भाजपा का पंचप्रण वादा भी इस दिशा में पहला कदम है, दिसके तहत उन्होंने "गोगो दीदी योजना" शुरू कर झारखंड की हर महिला के बैंक खाते में 2,100 रुपये भेजने की बात कही है। वहीं 500 रुपये में एलपीजी गैस सिलेंडर, युवाओं के लिए 5 साल में 5 लाख स्वरोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया है।

अब देखने वाली बात ये होगी कि आने वाले चुनावों में हेमंत सरकार अपने वादों को निभाने में गंभीरता ना दिखाने का खामियाजा भुगतेगी या फिर भाजपा वोटरों को साधने में सफल हो पाएगी।

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