Zojila Pass Tunnel: 3.30 घंटे का रास्ता 20 मिनट में, भारत के लिए क्यों जरूरी थी जोजिला सुरंग, चीन-पाक को टेंशन
Zojila Pass Tunnel: अगर आप थोड़ा-बहुत भी समाचार देखते हैं तो आपको पता चल चुका होगा कि भारत ने 9 जून को इंफ्रास्ट्रक्चर के सेक्टर में बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। हम बात कर रहे हैं जम्मू-कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाली जोजिला टनल (Zojila Tunnel) की। लेकिन ये सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में बेजोड़ काम नहीं बल्कि अगर सुरक्षा और रणनीति के हिसाब से देखें तो आपको इसकी असली कीमत पता चलेगी।
जोजिला टनल को भारत की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट में गिना जाता है। यह सिर्फ एक सुरंग नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने वाला गेम चेंजर प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब टू-वे रोड टनल
जोजिला टनल की कुल लंबाई 13.15 किलोमीटर है। इसे Megha Engineering & Infrastructure Limited द्वारा National Highways & Infrastructure Development Corporation Limited के लिए बनाया जा रहा है। यह दुनिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब बाय-डायरेक्शनल रोड टनल होगी। खास बात यह है कि यह समुद्र तल से 11,578 फीट की ऊंचाई पर बनाई जा रही है, जो इसे दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित रोड टनल प्रोजेक्ट में शामिल करती है। यह सुरंग सोनमर्ग के बालटाल और द्रास-कारगिल सेक्टर के मीनामर्ग के बीच जोजिला क्षेत्र में बनाई जा रही है।
सिर्फ टनल नहीं, 31 किलोमीटर लंबा मेगा प्रोजेक्ट
हालांकि मुख्य सुरंग 13.15 किलोमीटर लंबी है, लेकिन पूरे प्रोजेक्ट की लंबाई लगभग 31 किलोमीटर है। इसमें एप्रोच रोड, पुल, सहायक इंफ्रास्ट्रक्चर और निलग्रार टनल सिस्टम भी शामिल है। निलग्रार सिस्टम में दो ट्यूब टनल बनाई गई हैं जिनकी लंबाई क्रमशः 457.35 मीटर और 1,953.63 मीटर है। इसके अलावा प्रोजेक्ट में लगभग 2.35 किलोमीटर लंबे सात कट-एंड-कवर स्ट्रक्चर, 450 मीटर लंबी स्नो गैलरी और कुल 460 मीटर लंबाई वाले तीन बड़े पुल भी शामिल हैं।
क्या है इस सुरंग में खास?
जोजिला टनल की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में इसका आधुनिक वेंटिलेशन और सुरक्षा सिस्टम शामिल है। क्योंकि इस सुरंग में अलग इमरजेंसी एस्केप बोर नहीं बनाया गया है, इसलिए इंजीनियरों ने वेंटिलेशन और आपातकालीन पहुंच के लिए तीन बड़े वर्टिकल शाफ्ट तैयार किए हैं। इनमें सबसे बड़ा शाफ्ट पश्चिमी हिस्से में बनाया गया है, जिसकी गहराई 474.3 मीटर है। इसे भारत का सबसे लंबा वर्टिकल शाफ्ट माना जा रहा है।
साढ़े तीन घंटे का सफर अब सिर्फ 20 मिनट में
इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यात्रा समय में आने वाली भारी कमी है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच जोजिला दर्रे को पार करने में लगभग साढ़े तीन घंटे तक का समय लग सकता है। लेकिन टनल शुरू होने के बाद यही दूरी केवल 20 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे स्थानीय लोगों, पर्यटकों, व्यापारियों और आपूर्ति व्यवस्था को जबरदस्त फायदा मिलेगा।
दुनिया की सबसे कठिन सुरंगों में से एक
जोजिला प्रोजेक्ट के निदेशक पेडा सुब्बैया के मुताबिक यह उनके करियर की सबसे कठिन प्रोजेक्ट में से एक रही है। उन्होंने बताया कि टनल निर्माण में ऑस्ट्रियन ड्रिल-एंड-ब्लास्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक में सुरंग को परिस्थितियों के मुताबिक लगातार आकार दिया जाता है। सुब्बैया के मुताबिक ऊंचाई, खराब मौसम, बर्फबारी और कठिन भूभाग जैसी चुनौतियों के बावजूद प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने इसे दुनिया की सबसे लंबी हाई-एल्टीट्यूड टनल बताया।
2027 तक पूरा होगा पूरा प्रोजेक्ट
टनल में फाइनल ब्रेकथ्रू (दोनों तरफ मुंह खुलना) के बाद अब अंदर का कंस्ट्रक्शन शुरू होगा। सुरंग के अंदर का काम अगले 24 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो यह पूरी प्रोजेक्ट 2027 के अंत तक तैयार हो सकती है।
लद्दाख को सालभर देश से जोड़ेगी यह सुरंग
जोजिला दर्रा लंबे समय से भारी बर्फबारी, हिमस्खलन और खराब मौसम की वजह से कई महीनों तक बंद रहता है। सर्दियों के दौरान कई बार लद्दाख लगभग छह महीने तक देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। ऐसे में यह सुरंग सालभर निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करेगी। इससे लद्दाख के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बड़ी राहत मिलेगी।
चीन और पाकिस्तान सीमा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण
इस प्रोजेक्ट का महत्व केवल नागरिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से भी है। लद्दाख एक ऐसा क्षेत्र है जो पूर्व में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान की सीमाओं के बेहद करीब स्थित है। इसलिए यहां मजबूत कनेक्टिविटी भारतीय सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कारगिल युद्ध और गलवान के बाद बढ़ा महत्व
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन बद्र' के तहत घुसपैठ कर भारतीय चौकियों पर कब्जा करने की कोशिश की थी। उसका मकसद कश्मीर और लद्दाख के बीच संपर्क काटना था ताकि सियाचिन में तैनात भारतीय सैनिकों को अलग-थलग किया जा सके। इसके अलावा 2020 में पूर्वी लद्दाख की Galwan Valley में भारत और चीन की सेनाओं के बीच गंभीर टकराव हुआ था। इन घटनाओं ने दिखाया कि लद्दाख तक तेज और हर मौसम में उपलब्ध सड़क संपर्क कितना जरूरी है।
सेना की ताकत और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बड़ा फायदा
जोजिला टनल बनने के बाद भारतीय सेना के लिए सैनिकों, हथियारों, वाहनों और जरूरी सैन्य उपकरणों को सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। MEIL के मुताबिक यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय स्तर पर ऑपरेशनल मोबिलिटी और लॉजिस्टिक तैयारी को मजबूत करेगी। इसलिए इसे सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं बल्कि नेशनल सिक्योरिटी के नजरिए से भी एक महत्वपूर्ण संपत्ति माना जा रहा है।
कितने रुपए में बनी सुरंग?
प्रोजेक्ट की शुरुआती अनुमानित लागत लगभग ₹12,000 करोड़ थी। लेकिन इसे करीब ₹7,000 करोड़ में पूरा किया जा रहा है। यानी सरकार ने लगभग ₹5,000 करोड़ की बचत की है। जोजिला टनल केवल एक सड़क प्रोजेक्ट नहीं है। यह भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, तकनीकी कौशल और रणनीतिक सोच का प्रतीक बनकर उभर रही है। जब यह पूरी तरह तैयार हो जाएगी, तब यह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच यात्रा को आसान बनाने के साथ-साथ भारत की सीमा सुरक्षा, सैन्य तैयारियों और आर्थिक विकास को भी नई मजबूती देगी। यही वजह है कि इसे देश की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में से एक माना जा रहा है।
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