'अब मैं गांधीवादी रास्ते पर चल रहा', पाक प्रेमी यासीन मलिक ने दिखाया नया रंग
भारत विरोधी बयानों और पाकिस्तान खास लगाव के लिए चर्चा रहने वाले यासीन मलिक ने दावा किया है कि उन्होंने हथियार के बादल पर विरोध के प्रदर्शन को त्याग दिया है और अब वह गांधीवादी तरीके पर चल रहे हैं। वह गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन पर भरोसा करते हैं। यूपीए कोर्ट में जेकेएलएफ-वाई पर प्रतिबंध लगाने के समीक्षा मामले में दायर हलफनामे में यासीन मलिक ने यह दावा किया है।
जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट-यासीन के अध्यक्ष यासीन मलिक ने कहा संयुक्त स्वतंत्र कश्मीर की मांग के लिए उन्होंने अपना सशस्त्र संघर्ष 1994 में ही छोड़ दिया। अब उन्होंने गांधीवादी तरीके को अपना लिया है।

यासीन मलिक ने अपने हलफनामे में कहा है कि केंद्र में राजनीतिक और सरकारी अधिकारी 1994 से उनके साथ कश्मीर मुद्दे के शांतिपूर्ण हल को लेकर जुड़े हैं।
बता दें कि यासीन मलिक पर 1990 में श्रीनगर के रावलपोरा में चार भारतीय वायुसेना के कर्मियों हत्या का आरोप है। यासीन मलिक की पहचान प्राथमिक शूटर के तौर पर हुई थी। यासीन मलिक को आतंकी गतिविधियों के चलते मई 2022 में आजीवन कारावास की जा सुनाई गई थी।
यूएपीए कोर्ट द्वारा जेकेएलएफ-वाई को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत 'गैरकानूनी संगठन' के रूप में वर्गीकृत करने के निर्णय को अगले पांच वर्षों के लिए बरकरार रखा है।
26 मई, 2023 तक, मलिक से जुड़ी कानूनी कहानी ने एक और मोड़ तब लिया जब एनआईए ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उसके लिए मौत की सजा की मांग की।
रिपोर्ट के अनुसार, मलिक का अपने मामले को व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने पर जोर देना, कानूनी कार्यवाही को सीधे प्रभावित करने और शायद जनता की राय को प्रभावित करने के उनके प्रयास को दर्शाता है।
कानूनी सलाह को अस्वीकार करना, व्यक्तिगत प्रतिनिधित्व का पक्ष लेना, मृत्युदंड की संभावना का सामना करते हुए भी, अपनी कहानी पर नियंत्रण बनाए रखने की उनकी इच्छा को दर्शाता है।












Click it and Unblock the Notifications