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क्या है Operation Akhal? जिसके तहत एक आतंकी ढेर? जानिए मिशन की रणनीति

Operation Akhal Kulgam Encounter: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सुरक्षाबलों की कार्रवाई अब निर्णायक रूप ले रही है। हाल के दिनों में घाटी में आतंकियों की घुसपैठ और हमलों की कई कोशिशों को सेना और एजेंसियों ने समय रहते नाकाम किया। एलओसी से लेकर श्रीनगर के जंगलों तक, सुरक्षाबलों ने अलग-अलग ऑपरेशनों में आतंकियों को खोज-खोज कर मार गिराया। ये अभियान न केवल आतंकी नेटवर्क को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि घाटी में सुरक्षा के माहौल को भी मजबूत कर रहे हैं।

इसी कड़ी में शनिवार को कुलगाम जिले के अखल जंगल क्षेत्र में "ऑपरेशन अखल" शुरू किया गया। खुफिया जानकारी के आधार पर सेना ने इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन किया, जो देर रात तक चला। इस दौरान रुक-रुक कर भीषण गोलीबारी हुई और एक आतंकवादी को मार गिराया गया।

Operation Alakh Kulgam Encounter
(File Pic)

एक और आतंकी ढ़ेर

सेना की चिनार कोर के मुताबिक, 'रातभर चली मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने आतंकियों की घेराबंदी कर जवाबी कार्रवाई की और एक को ढेर कर दिया।' इसी तरह पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा के पास दो घुसपैठियों को ऑपरेशन 'शिवशक्ति' के तहत मार गिराया गया।

ऑपरेशन अखल क्या है?

ऑपरेशन अखल (Operation Akhal) दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के अखल वन क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया एक सुरक्षा अभियान (anti-terror operation) है।

मुख्य उद्देश्य

  • आतंकवादियों की मौजूदगी की पुख्ता खुफिया जानकारी के आधार पर उन्हें ढूंढ निकालना और मार गिराना।
  • घने जंगलों में छिपे आतंकियों को घेरकर मुठभेड़ में निष्क्रिय करना।

ऑपरेशन की खास बातें

  • यह ऑपरेशन रातभर चला, जिसमें रुक-रुक कर तीव्र गोलीबारी हुई।
  • भारतीय सेना की चिनार कोर ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की घेराबंदी की गई और कंट्रोल में रहते हुए फायरिंग की गई।
  • अब तक एक आतंकी मारा गया है, और सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि कोई और आतंकी न बच सके।

स्थान

  • अखल जंगल क्षेत्र, कुलगाम ज़िला, दक्षिण कश्मीर।
  • श्रीनगर के पास तीन पाकिस्तानी आतंकियों को भी मार गिराया गया था

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ऑपरेशन शिवशक्ति और ऑपरेशन महादेव में क्या है अंतर?

ऑपरेशन शिवशक्ति का उद्देश्य पाकिस्तान की सीमा से सटे क्षेत्रों में हो रही आतंकियों की घुसपैठ को समय रहते रोकना और उन्हें नियंत्रण रेखा (LoC) पार करने से पहले ही निष्क्रिय करना था। यह ऑपरेशन विशेष रूप से पुंछ जिले के डिगवार सेक्टर में चलाया गया, जहाँ सेना ने दो आतंकियों को उस समय मार गिराया जब वे घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। इस ऑपरेशन का फोकस सीमा सुरक्षा, तीर्थयात्रियों की सुरक्षा (जैसे बूढ़ा अमरनाथ यात्रा), और आतंकियों की शुरुआती घुसपैठ को रोकना था।

वहीं दूसरी ओर, ऑपरेशन महादेव का फोकस उन आतंकियों पर था जो पहले से ही भारतीय क्षेत्र विशेषकर श्रीनगर के बाहरी इलाकों में छिपे हुए थे। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सुरक्षाबलों ने हरवन के पास लिदवास जंगलों में छिपे तीन पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया। ये आतंकी अप्रैल में हुए पहलगाम हमले में शामिल थे जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। ऑपरेशन महादेव ने उन आतंकियों का सफाया किया जो पहले से ही अंदर दाखिल हो चुके थे और बड़ी साजिश की योजना बना रहे थे।

इस तरह, ऑपरेशन शिवशक्ति घुसपैठ को रोकने वाला एक सीमा-स्तरीय ऑपरेशन था, जबकि ऑपरेशन महादेव देश के भीतर मौजूद आतंकियों के सफाए के लिए चलाया गया भीतरी ऑपरेशन था।

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