Operation Akhal: जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन अखल के तीसरे दिन 3 आतंकी ढेर, एक जवान घायल, जानें कौन थे आतंकवादी?
Jammu Kashmir Operation Akhal: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में ऑपरेशन अखल ने आतंकवाद के खिलाफ एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। 1 अगस्त 2025 से शुरू हुए इस साल के सबसे बड़े आतंकवाद-रोधी अभियान के तीसरे दिन, रविवार को सुरक्षा बलों ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया, जबकि एक जवान घायल हो गया।
इस ऑपरेशन में अब तक छह आतंकी ढेर किए जा चुके हैं। लेकिन सवाल ये है-ये आतंकवादी कौन थे, और क्यों है ये ऑपरेशन इतना खास? आइए, तह तक जाते हैं...

What is Operation Akhal:क्या है ऑपरेशन अखल?
- शुरुआत: 1 अगस्त 2025 को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के अखल वन क्षेत्र में शुरू हुआ।
- टीम: जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना, और CRPF की संयुक्त टुकड़ियां।
- मिशन: खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकियों के ठिकानों को खत्म करना।
- स्थिति: तीसरे दिन (3 अगस्त 2025) तक छह आतंकी ढेर, एक जवान घायल।
हादसे की पूरी कहानी
1 अगस्त को अखल के घने जंगलों में आतंकियों की मौजूदगी की खबर मिली। सुरक्षा बलों ने तुरंत घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। आतंकियों ने जवानों पर गोलीबारी शुरू की, जिसके बाद तलाशी अभियान भीषण मुठभेड़ में बदल गया।
- पहला दिन: शुक्रवार (1 अगस्त ) रात को रुक-रुक कर गोलीबारी हुई, फिर ऑपरेशन रोक दिया गया।
- दूसरा दिन: शनिवार (2 अगस्त )को तीन आतंकी ढेर किए गए, जिनका ताल्लुक लश्कर-ए-तैयबा की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से था।
- तीसरा दिन: रविवार (3 अगस्त )सुबह तलाशी अभियान फिर शुरू हुआ, जिसमें तीन और आतंकी मार गिराए गए। एक जवान को मामूली चोटें आईं, जिनका इलाज चल रहा है।
कौन थे मारे गए आतंकवादी?
शनिवार को ढेर आतंकी:
- हारिस नजीर: लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी, जिसकी पहचान शनिवार को हुई। TRF का हिस्सा, जो पहलगाम हमले (22 अप्रैल 2025) की जिम्मेदारी ले चुका है।
- दो अन्य आतंकी: इनके नाम की आधिकारिक पुष्टि बाकी है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक ये TRF के स्थानीय आतंकी थे।
रविवार को ढेर आतंकी:
- पहचान की प्रक्रिया: तीसरे दिन मारे गए तीन आतंकियों की पहचान अभी जारी है। सुरक्षा बलों ने बताया कि ये TRF और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हो सकते हैं।
- पहलगाम कनेक्शन: TRF ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी। जांच चल रही है कि क्या इन आतंकियों का उस हमले से सीधा संबंध था।
ऑपरेशन की खासियत क्या?
- हाई-टेक निगरानी: ड्रोन, थर्मल इमेजिंग, और पैरा स्पेशल फोर्स की मदद से ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है।
- नेतृत्व: DGP नलिन प्रभात और 15वीं कोर कमांडर (GOC विक्टर फोर्स) ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं।
- घना जंगल: अखल का जंगल इतना घना है कि तलाशी में चुनौतियां आ रही हैं, लेकिन सुरक्षा बल पूरी सतर्कता से काम कर रहे हैं।
पहलगाम हमले से कनेक्शन
- 22 अप्रैल 2025: पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटक मारे गए थे। TRF ने इसकी जिम्मेदारी ली थी।
- ऑपरेशन महादेव: 28 जुलाई 2025 को लिडवास में तीन आतंकी-सुलेमान (फैसल जट्ट/हाशिम मूसा), अफगान, और जिबरान-ढेर किए गए, जो इस हमले के मास्टरमाइंड थे।
- ऑपरेशन अकाल: शनिवार को मारे गए आतंकियों का TRF से कनेक्शन पुष्ट हुआ, और रविवार को ढेर आतंकियों की जांच से पहलगाम हमले से और लिंक मिल सकते हैं।
सुरक्षा बलों की हालिया कामयाबियां
- ऑपरेशन महादेव (28 जुलाई): पहलगाम हमले के तीन आतंकी ढेर।
- ऑपरेशन शिव शक्ति (29 जुलाई): पुंछ में दो पाकिस्तानी आतंकी मारे गए।
- ऑपरेशन सिंदूर (6-7 मई): पाकिस्तान में 100+ आतंकी ठिकाने नष्ट किए गए।
- कुल आतंकी ढेर: 22 अप्रैल के बाद 20 हाई-प्रोफाइल आतंकी मार गिराए गए।
क्या होगा आगे?
मारे गए आतंकियों की पहचान और उनके पहलगाम हमले से कनेक्शन की जांच जारी। अखल जंगल में और आतंकियों के छिपे होने की आशंका, सर्च ऑपरेशन तेज है। जम्मू-कश्मीर में त्योहारों को देखते हुए सुरक्षा और सख्त की गई।
ऑपरेशन अखल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारे सुरक्षा बल आतंकवाद के खिलाफ कितने सख्त और सतर्क हैं। लेकिन सवाल ये है-क्या ये ऑपरेशन घाटी में आतंकवाद की कमर तोड़ देगा?आपके विचार और सुझाव कमेंट्स में शेयर करें।
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