'चुनाव में दखल ना दें वर्ना.....' नेशनल कांफ्रेंस का अध्यक्ष बनते ही फारूक ने सरकार और सेना को दी चेतावनी
नेशनल कांफ्रेंस की जिम्मेदारी फिर से फारूक अब्दुल्ला ने संभाल ली है। उन्होंने सरकार और सेना को वोटिंग में दखल नहीं देने की चेतावनी दी। साथ ही बीजेपी पर विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया।

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फारूक अब्दुल्ला एक बार फिर नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख चुन लिए गए हैं। इस दौरान उन्होंने सुरक्षाबलों और सरकार को चुनाव में दखल नहीं देने की चेतावनी दी। साथ ही चुनाव आयोग और भारतीय सेना पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर के लोग अपने मन से मतदान नहीं कर पाते थे, उसमें सुरक्षाबलों का दखल रहता था। इसके अलावा उन्होंने बीजेपी पर विधायकों और सांसदों को खरीदने का आरोप लगाया।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जब मैं 1996 में जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री था, तो डोडा के एक गांव में गया, उस वक्त वहां पर मतदान हो रहा था। मुझे वहां पर कोई नजर नहीं आया, क्योंकि मतदान की मशीनें सेना के शिविर में रखी हुई थीं। जब मैंने जवानों से पूछा कि मतदान केंद्र खाली क्यों हैं, तो उन्होंने बताया कि कोई वोट डालने नहीं आया। फारूक के मुताबिक इसके बाद वो गांव में गए और एक दुकानदार से बात की। उसने बताया कि सैनिकों ने उनसे कहा था कि मतदान मशीनों के पास मत आना वर्ना हम तुम्हारे पैर तोड़ देंगे। मैं सेना और सरकार से कहना चाहता हूं कि चुनाव में दखल ना दें, नहीं तो ऐसा तूफान आएगा जिसे आप काबू नहीं कर पाएंगे।
नई जिम्मेदारी पर कही ये बात
फारूक अब्दुल्ला ने फिर से NC की जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने कहा कि मैं पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ना चाहता था, लेकिन उमर अब्दुल्ला ने उनको मना लिया। उनके साथ पार्टी के कई नेता भी चाहते थे कि वो फिर से जिम्मेदारी संभाले। एनसी अध्यक्ष ने कहा कि ये लड़ाई उनके वजूद की रक्षा के लिए है। ये सिर्फ कश्मीर के मुसलमानों के लिए नहीं बल्कि जम्मू के हिंदुओं के लिए भी है। हम सभी को मौजूदा सरकार गुलाम बना रही है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि उनके पार्टी के कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल होने के लिए दबाव डाला जा रहा। इसके अलावा उनको छोटे-छोटे कामों के लिए परेशान किया जा रहा।












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