Waqf Amendment Bill: महबूबा मुफ्ती ने चंद्रबाबू नायडू और नीतीश को लिखी चिट्ठी, 'वक्फ बिल' को रोकने की मांग
Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल को लेकर पूरे देश में राजनीति गरमाई हुई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बिल को बजट सत्र में पास कराना चाहती है। तो वहीं, विपक्षी दल किसी भी हालत में इस बिल को पास नहीं होने देना चाहते।
वक्फ संशोधन बिल को लेकर विपक्ष ने अपनी आपत्तियां भी जताई। लेकिन, विपक्षी सांसदों की बात न तो JPC में सुनी गई और न ही संसद में। वहीं, अब पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की चीफ महबूबा मुफ्ती ने एक नया पैंतरा चला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुफ़्ती ने केंद्र में मोदी सरकार का समर्थन करने वाले नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू से संपर्क किया है और उनसे इस विधेयक को रोकने का आग्रह किया है। उन्होंने इन धर्मनिरपेक्ष नेताओं को एक पत्र लिखा है।
महबूबा मुफ्ती द्वारा लिखे गए पत्र में इस विधेयक को मुसलमानों के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को जब्त करना है। मुफ्ती ने अपना पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शेयर किया है, जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू दोनों को टैग किया है।
अपनी पोस्ट में मुफ्ती ने लिखा, 'प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक न केवल मुसलमानों के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि वक्फ अधिनियम की स्वायत्तता को कमजोर करके इन संपत्तियों को छीनने का भी प्रयास करता है। मैंने नीतीश कुमार जी और चंद्रबाबू नायडू जी को पत्र लिखकर इस विधेयक को रोकने का आग्रह किया है।'
नायडू और नीतीश को ही क्यों लिखा पत्र?
दरअसल, नीतीश कुमार की जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी केंद्र सरकार के अभिन्न अंग हैं। केंद्र में एनडीए सरकार के भीतर इन दोनों पार्टियों का महत्वपूर्ण प्रभाव है, जो 28 सीटों के साथ भाजपा के बाद दूसरे स्थान पर हैं। भाजपा को इस लोकसभा चुनाव चक्र में बहुमत नहीं मिला, इसलिए वह शासन के लिए इन पार्टियों पर निर्भर है।
दोनों नेताओं की धर्मनिरपेक्ष छवि यानी सेक्युलर छवि वाले हैं क्योंकि उनकी पार्टियों को मुस्लिम मतदाताओं का पर्याप्त समर्थन प्राप्त है। ऐसे में यह दोनों नेता चाहे तो इस बिल को रोक सकते हैं। उनकी सहमति (जेडीयू और टीडीपी ) के बिना, लगातार तीन बार सत्ता में रहने के बावजूद भाजपा के लिए विधेयक पारित नहीं करा सकती।
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