Jammu Kashmir Chunav: ST के लिए सीट सुरक्षित करने का आदिवासी नेता ही क्यों कर रहे विरोध?
Jammu Kashmir Chunav 2024: देश में आरक्षण के मुद्दे का नेताओं ने अंतरराष्ट्रीयकरण भी कर दिया है। विदेश में भी इसपर सवाल पूछे जाते हैं और दूसरे देश में दिए गए जवाब पर भारत के अंदर भी राजनीतिक तूफान खड़ा होता है। लेकिन, जम्मू और कश्मीर विधानसभा में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सुरक्षित रखी गई एक सीट का आदिवासी समुदाय के नेता ही न सिर्फ विरोध कर रहे हैं, बल्कि सामान्य वर्ग के साथ अन्याय होने का भी आरोप लगा रहे हैं।
परिसीमन के बाद इस बार जम्मू कश्मीर की कंगन विधानसभा सीट को सुरक्षित घोषित किया गया है। यहां से पिछले सात दशकों से एक ही आदिवासी परिवार के लोग चुने जाते रहे हैं। लेकिन, इस साल इसे जब अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए रिजर्व कर दिया गया तो वही आदिवासी परिवार इसे सामान्य वर्ग के मतदाताओं के साथ अन्याय बता रहा है।

कंगन सीट ST के लिए आरक्षित होने पर भी खुश नहीं आदिवासी नेता!
इस सीट से नेशनल कांफ्रेंस ने अपने पूर्व विधायक और अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट के मौजूदा सांसद मियां अल्ताफ अहमद के बेटे मियां मेहर अली को टिकट दिया है। टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक मेहर अली ने कहा है, 'आरक्षण से हमें नुकसान होगा। कंगन में अनुसूचित जनजाति से सामान्य वर्ग की आबादी ज्यादा है। लोगों के साथ धोखा हुआ है।'
'हर शख्स बुरा महसूस कर रहा है'
उनके मुताबिक परिसीमन आयोग के सामने भी उनकी ओर से कंगन को एसटी सीट घोषित करने का विरोध किया गया था। दिलचस्प बात ये है कि मियां अल्ताफ को 2014 के चुनाव में इस सीट पर कड़ी चुनौती देने वाले पीडीपी के बशीर मीर को आरक्षण की वजह से ही इस बार पड़ोस की गांदरबल सीट से चुनाव लड़ना पड़ रहा है। लेकिन, फिर भी एनसी प्रत्याशी कहते हैं, 'हर शख्स बुरा महसूस कर रहा है।'
सात दशकों से कंगन सीट पर मियां परिवार का कब्जा
दरअसल, मियां अल्ताफ अनुसूचित जनजाति (एसटी) के गुज्जर-बकरवाल समुदाय से आते हैं। आजादी के बाद से उनके परिवार को इस आदिवासी समुदाय का आध्यात्मिक प्रमुख माना जाता है। इस वजह से कंगन विधानसभा में आदिवासी वोटर दशकों से मियां के परिवार के सदस्यों के लिए वोट करते रहे हैं। वहीं उन्हें उनकी पार्टी और अपने निजी प्रभाव से सामान्य वर्ग के मतदाताओं का समर्थन भी मिलता रहा है।
हमनें कभी भी राजनीतिक आरक्षण नहीं मांगा- मियां अल्ताफ
अब मियां अल्ताफ कंगन को सुरक्षित सीट घोषित किए जाने का खुलकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है, 'इसे अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीट में बदलने की कोई जरूरत नहीं थी। हमनें कभी भी राजनीतिक आरक्षण नहीं मांगा। मैं 5 बार का एमएलए और अब सांसद हूं, मैंने कभी इसकी मांग नहीं की।'
मुझे एसटी रिजर्व सीट क्यों चाहिए?- नेशनल कांफ्रेंस सांसद
जब उनसे यह सवाल किया गया कि एक आदिवासी नेता ही किसी सीट को उसके समुदाय के लिए आरक्षित किए जाने का विरोध क्यों कर रहा है, इसपर उन्होंने कहा, 'मेरे दादा 1951 में एमएलए बने और 1967 तक रहे। फिर मेरे पिता 1987 तक एमएलए रहे। मैं 2018 में विधानसभा भंग होने तक वहां था। मुझे लोगों पर भरोसा है। मुझे एसटी रिजर्व सीट क्यों चाहिए? सामान्य वर्ग के लोगों ने मेरे और मेरे परिवार का समर्थन किया।'
कंगन में मियां परिवार के लिए बदला समीकरण!
उनका दावा है कि कंगन में सामान्य वर्ग की जनसंख्या अनुसूचित जनजाति के मुकाबले 4% अधिक है। उनका आरोप है कि ऐसा परिसीमन बीजेपी की वजह से हुआ है। अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट पर मियां अल्ताफ ने पीडीपी सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती को 2,81,794 वोटों से हराया है।
लेकिन, राजनीतिक जानकारों के मुताबिक उनके परिवार की चौथी पीढ़ी इस परिसीमन के बाद बड़ी मुश्किल में फंस गई है। दरसअल, पिछले चुनाव में पीडीपी प्रत्याशी से वे मात्र 432 वोटों से ही जीते थे। सुरक्षित सीट होने की वजह से इस बार पीडीपी ने भी आदिवासी समुदाय के ही नेता सैयद जमात अली शाह शाहीन को उतारा है।
इस क्षेत्र में पीडीपी का अपना भी एक खास वोट बैंक है, इस वजह से शाहीन को अबकी बार मियां परिवार के खिलाफ एक तगड़ा उम्मीदवार माना जा रहा है। इस वजह से भले ही मियां का परिवार यहां लगातार 10 चुनाव जीत चुका हो, 25 सितंबर को दूसरे चरण के लिए हो रहे चुनाव में उन्हें तगड़ी चुनौती मिलने की संभावना है।












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