J&K BJP Manifesto: आर्टिकल 370 के अलावा जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के विजन डॉक्यूमेंट में क्या होगा?
Jammu and kashmir BJP Manifesto: जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद पहला विधानसभा चुनाव हो रहा है। यह केंद्र शासित प्रदेश (UT) 2019 से पहले से एक तरह से केंद्र सरकार के कंट्रोल में है। इसलिए बीजेपी को इस विधानसभा चुनाव में आर्टिकल 370 हटने के बाद यूटी में आए बदलावों का भी हिसाब देना होगा, साथ ही साथ उसे अपने मेनिफेस्टो में यहां के लिए भविष्य की योजनाएं भी दिखानी पड़ेंगी।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 6 सितंबर (शुक्रवार) को जम्मू-कश्मीर के लिए बीजेपी का विजन डॉक्यूमेंट या मेनिफेस्टो जारी करने वाले हैं। अगले दिन यानी शनिवार को उनका जम्मू में एक रैली भी प्रस्तावित है। आर्टिकल-370 हटने से पहले से लेकर आजतक जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार ने जो भी कदम उठाया है, उसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच और विचारों को धरातल पर उतारने का जिम्मा शाह ने ही संभाला है।

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी को अपनी अगुवाई वाली सरकार का है लक्ष्य
हाल ही में जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के प्रभारी बनकर पहुंचं आरएसएस बैकग्राउंड वाले पार्टी नेता राम माधव ने बुधवार को कहा है कि जम्मू-कश्मीर में 'बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार' होगी और दावा किया है कि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।
आर्टिकल 370 हटने से होने वाले बदलावों पर रहेगा भाजपा का फोकस
बीजेपी इस चुनाव में वहां आर्टिकल-370 के खात्मे को ही अपना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है। मेनिफेस्टो जारी होने के बाद अगले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां चुनाव रैलियों की शुरुआत कर सकते हैं।
एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने न्यूज18 से कहा है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व आर्टिकल 370 के मुद्दे पर कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन पर निशाना साधने से नहीं चूकेगा।
उन्होंने कहा, 'बुधवार को जम्मू-कश्मीर में राहुल गांधी ने अपनी पहली रैली की, लेकिन आर्टिकल 370 का कोई जिक्र नहीं किया। कांग्रेस ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है। राहुल गांधी के साथ उसी मंच पर फारूक अब्दुल्ला मौजूद थे, जिनकी नेशनल कांफ्रेंस ने अपने मेनिफेस्टो में आर्टिकल 370 की वापसी का वादा किया है।'
भाजपा को पता है कि नेशनल कांफ्रेंस का आर्टिकल 370 की वापसी के वादे का जमीनी सच्चाई से कोई मतलब नहीं है। जम्मू-कश्मीर में उसकी बंपर बहुमत की सरकार बन भी जाए तो आर्टिकल 370 को फिर से लागू करना उसके वश की बात नहीं है।
बीजेपी अपने मेनिफेस्टो में आर्टिकल 370 हटने की वजह से जम्मू-कश्मीर में आए बदलावों पर जोर दे सकती है। इनमें कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के साथ ही, इस वर्ग के लिए विधानसभा में सीटें आरक्षित करना भी शामिल है। इसके अलावा आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद से यहां हुए बदलावों की वजह पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी पर भी बीजेपी ज्यादा फोकस कर सकती है, जिससे यहां के लोगों को लाभ मिल रहा है।
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा फिर से देने का वादा पहले ही कर चुके हैं प्रधानमंत्री
भाजपा नेता का कहना है, 'राहुल गांधी ने वादा किया है कि चुनावों के बाद जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा....लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह इसका वादा पहले ही कर चुके हैं, जिसके मुताबिक जैसे ही कानून और व्यवस्था की स्थिति बेहतर होती है और चुनाव करवा लिए जाते हैं, इसे राज्य का दर्जा वापस मिल जाएगा।'
भाजपा के घोषणापत्र में कश्मीरी पंडितों से जुड़े वादे भी शामिल होने की संभावना है तो युवाओं को रोजगार और महिला सशक्तिकरण के लिए भी वादे किए जाने की संभावना है। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश में पर्यटन के दायरे में विस्तार के लिए योजनाओं के वादे शामिल हो सकते हैं।
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पार्टी 'नया कश्मीर' के विजन के लिए भी अपनी योजनाएं सामने रख सकती है, जिसमें समृद्धि,शांति और स्थायीत्व वाला जम्मू-कश्मीर बनाने का संकल्प होगा। बीजेपी नेता के अनुसार, ' (यह मेनिफेस्टो) नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के एजेंडे से अलग होगा, जो कि जम्मू-कश्मीर को वापस हिंसा वाले काले दिनों और आतंकवाद में वापस ले जाने वाले हैं।'












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