J&K Polls: बीजेपी के लिए क्यों अलग है इस बार का जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव?

Jammu Kashmir Chunav: जम्मू और कश्मीर में 10 साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी बनी थी। इस बार पार्टी वहां अपने दम पर सरकार बनने के दावे के साथ चुनाव लड़ रही है। जम्मू में पार्टी अकेले दम पर चुनाव मैदान में है और कश्मीर में भी पहली बार पर्याप्त संख्या में प्रत्याशी उतार रही है।

जम्मू कश्मीर में एक दशक बाद हो रहे इन चुनावों के सिलसिले में इंडियन एक्सप्रेस ने केंद्र शासित प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पीएमओ में मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह से विस्तृत बात की है, जिसमें उन्होंने यहां पार्टी की संभावनाओं को लेकर बहुत बड़ी तस्वीर पेश की है। वनइंडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास मंत्री की ओर से कही गई बातों को ही आपसे साझा कर रहा है।

jammu and kashmir election

जम्मू-कश्मीर में अब खूब हो रहा मतदान
उनके मुताबिक 10 साल पहले घाटी में सिर्फ दहशत का माहौल था। नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के लिए डर के माहौल में चुनाव करवाना आसान साबित होता था, क्योंकि 8-10-15% मतदान होने पर उनके विधायक, सांसद बन जाते थे।

अब डीडीसी (डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल) चुनाव में 70-80% वोटिंग हुई है। लोकसभा चुनावों में भी मतदान लगभग राष्ट्रीय औसत की ही तरह रहा है। इस बार भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की वजह से ज्यादा वोटिंग की उम्मीद कर रहे हैं।

कश्मीर में पहले बीजेपी का झंडा उठाना वर्जित था- जितेंद्र सिंह
आज लोगों की लोकतांत्रिक और चुनावी व्यवस्था में भरोसा बढ़ा है और यह मोदी सरकार की उपलब्धि है। पहले कश्मीर में बीजेपी का झंडा उठाना भी वर्जित था। आज हर जगह बीजेपी के झंडे लहराते हैं। जम्मू और कश्मीर के युवा समझ गए हैं कि उनका भविष्य पीएम मोदी के साथ सुरक्षित है।

जम्मू कश्मीर में बीजेपी को अपने दम पर बहुमत मिलने का भरोसा
जम्मू इलाके की सभी सीटों पर बीजेपी अपने उम्मीदवार उतार रही है और कश्मीर में भी पार्टी काफी सारी सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। आज की तारीख में बीजेपी जम्मू-कश्मीर में कोई भी चुनाव के बाद गठबंधन के बारे में नहीं सोच रही है। आज तो बीजेपी को पूरा यकीन है कि हमें अपने दम पर बहुमत मिलने जा रहा है।

आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद क्या बदला?
भाजपा को जम्मू और कश्मीर में बेहतर प्रदर्शन का भरोसा इस वजह से है कि आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद शरणार्थियों और समाज के वंचितों को उनके अधिकार मिलने शुरू हुए। पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थी इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। वे पिछले 70 वर्षों से यहां थे।

देश के दूसरे हिस्सों में इन्हें अधिकार मिल चुका था। इसी समाज के आईके गुजराल और डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री भी बन गए। लेकिन, कांग्रेस औऱ उसके सहयोगियों के निहित स्वार्थ ने यहां उन्हें वंचित रखा, क्योंकि यह उनके वोट बैंक का हिस्सा नहीं थे।

पहले केंद्र की अधिकतर योजनाओं को जम्मू-कश्मीर में तोड़-मरोड़ कर लागू किया जाता था, जिसमें पूरी तरह से जनहित का ध्यान नहीं होता था। बीते पांच वर्षों (आर्टिकल 370 खत्म होने के बाद) में उन कमियों को पाटने का काम किया गया है।

इसके पास जितने भी प्राकृतिक संसाधान हैं, उसमें यहां का भविष्य है। भारत की विकास यात्रा में जम्मू-कश्मीर एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने में सक्षम है।

'कुल मिलाकर जम्मू-कश्मीर में पहले जैसा आतंकवाद अब नहीं रहा'
आज पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का फोकस कश्मीर घाटी से जम्मू इलाके में शिफ्ट हो गया है। लेकिन, सुरक्षा बलों ने अपने रणनीति बदली है, जिसकी चर्चा सार्वजिनक तौर पर नहीं की जा सकती।

अगले कुछ हफ्तों में परिणाम सामने आने की संभावना है। कुल मिलाकर जम्मू-कश्मीर में पहले जैसा आतंकवाद अब नहीं रहा। पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं। सबसे बड़ा सबूत पर्यटकों की संख्या है।

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