Earthquake in Kupwara: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में भूकंप के झटकों से दहशत! 2 दिनों में दूसरी बार कांपी धरती
Earthquake in Kupwara: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में गुरुवार, 21 अगस्त 2025 को दोपहर 1:41 बजे (IST) रिक्टर पैमाने पर 3.5 तीव्रता का भूकंप आया, जिसने स्थानीय लोगों में दहशत फैला दी।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र कुपवाड़ा में सतह से 5 किलोमीटर की गहराई पर था। यह दो दिनों में क्षेत्र का दूसरा भूकंप है, जिसने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर की भूकंपीय संवेदनशीलता को उजागर किया है।

2 दिन में दूसरा झटका
बुधवार को जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भी 3.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसका केंद्र सतह से 5 किमी नीचे था। कुपवाड़ा में आए इस ताजा भूकंप ने उत्तरी कश्मीर के कई हिस्सों में हल्के झटके महसूस किए गए, हालांकि अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि झटके कुछ सेकंड तक महसूस हुए, जिसके बाद लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।
कुपवाड़ा: भूकंप का हॉटस्पॉट
कुपवाड़ा, जो लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के करीब है, भूकंपीय जोन IV और V में आता है, जो इसे भूकंप के लिए अत्यधिक संवेदनशील बनाता है। वोल्कैनोडिस्कवरी के आंकड़ों के मुताबिक, कुपवाड़ा में हर साल औसतन 11.2 भूकंप आते हैं, जिनमें से 2.1 भूकंप 5.0 या उससे अधिक तीव्रता के होते हैं। 2024 में कुपवाड़ा में 28 भूकंप दर्ज किए गए, जिनमें सबसे शक्तिशाली 20 अगस्त 2024 को 5.1 तीव्रता का था, जिसका केंद्र बारामूला से 4 किमी पश्चिम में था।
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता खतरा
जम्मू-कश्मीर, हिमालयी क्षेत्र का हिस्सा होने के नाते, भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में आता है। भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच टकराव के कारण यह क्षेत्र नियमित रूप से भूकंपों का सामना करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कश्मीर घाटी सिस्मिक जोन V में आती है, जो देश में सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र है। 1900 के बाद से कुपवाड़ा में 3 बार 6.0 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप आए हैं, जो हर 40-45 साल में बड़े भूकंप की आशंका को दर्शाता है।
म्यांमार में भी भूकंप
कुपवाड़ा में भूकंप से कुछ घंटे पहले, गुरुवार सुबह 8:28 बजे (IST) म्यांमार में 4.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। यह भूकंप भी हिमालयी क्षेत्र की भूकंपीय सक्रियता का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, म्यांमार में भी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
कश्मीर विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर (डॉ.) गुलाम जिलानी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में भूकंप की आशंका हमेशा बनी रहती है। 'हमें भूकंप रोधी निर्माण कोड का सख्ती से पालन करना चाहिए। यह क्षेत्र भूकंपीय रूप से संवेदनशील है, और छोटे-मोटे झटके बड़े भूकंप की चेतावनी हो सकते हैं।' 2005 के विनाशकारी भूकंप, जिसमें बारामूला में 3,600 लोग मारे गए थे, ने इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर किया था।
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