Vijay Diwas : 16 दिसम्बर की कहानी उन्हीं की जुबानी जिन्होंने पलट दी थी Indo-Pak War 1971 की बाजी
जयपुर, 16 दिसम्बर। बांग्लादेश को बने आज 50 साल हो गए। भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 की जंग का नतीजा था बांग्लादेश। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी फौज पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान को धूल चटाने में राजस्थान के फौजियों वाले जिले झुंझुनूं के वीर सपूतों ने भी अदम्य साहस दिखाया था।

झुंझुनूं जिले के 166 जवान शहीद हुए थे
भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 की बरसी के मौके पर हम आपको ऐसे ही वीर सपूतों की कहानी उन्हीं की जुबानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने पूरी पूरी रात चलकर पाकिस्तान की चौकियों को नष्ट किया था और पाकिस्तान घुटनों पर ला दिया था। झुंझुनूं के बहादुरों जवानों के अदम्य साहस का ही नतीजा था कि पाकिस्तान की फौज के 93 हजार सैनिकों ने भारतीय सेना के सामने सरेंडर कर दिया था और फिर बांग्लादेश अस्तित्व में आया। भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 में हुई जंग में झुंझुनूं जिले के 166 जवान शहीद हुए थे।

1971 war hero of India : अली हसन, गांव धनूरी
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में गांव धनूरी के अली हसन कहते हैं कि 1971 में 13 दिन की लड़ाई के सिर्फ भारत माता के जयकारे ही गूंजे। 1971 में हमारी यूनिट जम्मू कश्मीर के महेंद्र सेक्टर में तैनात थी। हमे दरकिया पहाड़ी पर चैक पोस्ट पर कब्जा करना था। यह बहुत हाइट पर थी। हमारे चार अफसरों समेत 54 जवान शहीद हो चुके थे। हमने हिम्मत नहीं हारी और 13 दिन में यहां पर तिरंगा फहराकर ही दम लिया।

1971 war hero of India : सूबेदार मकसूद अली, नूआं
दैनिक भास्कर से बातचीत में झुंझुनूं के गांव नूआं निवासी सूबेदार मकसूद अली कहते हैं कि हमारी यूनिट 17 ग्रेनेडियर बीकानेर में तैनात थी। एक दिसम्बर को हमारी पलटन को बाड़मेर, मुनाबाव व सुंदरा में भेजा गया। तीन दिसम्बर को यहां दुश्मन से भिड़ंत हुई और भारतीय फौज पाकिस्ताान की पोस्ट 91आर पर कब्जा करने में सफल रही। हम 16 दिसम्बर तक इसी पोस्ट पर डटे रहे। यहां माइंस बिछी हुई थी, जिसमें जैसलमेर निवासी हमारा साथी बहादुर सिंह शहीद हुआ।

1971 war hero of India : सूबेदार रामकुमार, गांव बाकरा
मैं 6 जाट रेजीमेंट में था। हमारी यूनिट को ढाका में लालमाई पहाड़ी पर कब्जा करने का आदेश मिला था। यहां पर पाकिस्तानी फौज ने बंकरों में लोहे की तीन फीट चादर चढ़ा रखी थी। 11 दिसम्बर को हमने लालमाई पहाड़ी पर कब्जा जमाया। 1200 फीट खड़ी चोटी वाली इस पहाड़ी पर कब्जा करने के बाद पाकिस्तान फौज के हौसले पस्त हो गए। उनकी पूरी लोकेशन व पॉजिशन भारतीय सैनिक आसानी से देख पा रहे थे।

1971 war hero of India : पोकर सिंह, बामिल, सेना मेडल सोटवारा
यूनिट 8 ग्रेनेडियर और जगह सांबा सेक्टर जम्मू कश्मीर। तीन दिसंबर की शाम को संदेश मिला कि पाकिस्तान की सेना ने हवाई हमला कर दिया। हमने दिन की बजाय रात में मूव करने का फैसला किया। पूरी पूरी रात चलकर पांच दिसम्बर को पाकिस्तान की डढवाल चैक पोस्ट पर पहुंचे और कब्जा जमाया। हम पाकिस्तान के चार किलोमीटर अंदर तक घुस गए थे।

1971 war hero of India : रामप्रताप सिंह निहालोठ
हमें पाकिस्तान को भारत की ओर बढ़ने से रोकना था। मैं 6 राज राइफल्स के साथी जवानों के साथ कृष्णा नदी के पुल पर पहुंचा। हमने पुल तोड़ दिया। इस वजह से पाकिस्तान की फौज कानबाई यूनिट से आगे नहीं बढ़ पाई। इसी मौके पर हमने पर आसीएल व एमएजी से फायर किए, जिसमें पाकिस्तान के 30 सैनिक मार गिराए।












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