Rajasthan में जन आक्रोश यात्रा में पार्टी के बैनर में नजर आएंगी वसुंधरा राजे, पार्टी में बदलने लगे समीकरण
Rajasthan में भाजपा में समीकरण बदलते हुए नजर आ रहे हैं। भाजपा की 200 विधानसभा सीटों को लेकर बनाए गए जन आक्रोश यात्रा के मेगा प्लान में जनता के बीच भाजपा का चेहरा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी होंगी। बीजेपी ने रविवार को अपने इस मेगा प्लान को साझा करने के लिए प्रेस वार्ता बुलाई। प्रेस वार्ता में बैकडॉप में वसुंधरा राजे की फोटो भी लगाई गई। वही रथ में लगे पोस्टर में भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, के साथ पूर्व मुख्यमंत्री एवं पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे को जगह दी गई है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ हल्ला बोल आंदोलन की रणनीति बनाई है। वहीं दूसरी ओर पार्टी एकजुटता का संदेश भी दे रही है।

तीन साल बाद पार्टी के निर्देशों में हुआ बदलाव
वसुंधरा राजे की फोटो का पार्टी के बैनर में आना भाजपा में एकजुटता के साथ बदलते समीकरणों की तरफ इशारा कर रहा है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने पहले पार्टी के अधिकृत रूप से जारी की जाने वाली प्रचार सामग्री में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की फोटो ही लगाने के निर्देश जारी किए थे। करीब 3 साल बाद इन निर्देशों में बदलाव नए सियासी समीकरणों की तरफ इशारा कर रहा है।

भाजपा वसुंधरा को नहीं कर सकती साइड लाइन
पार्टी ने अधिकृत रूप से वसुंधरा राजे के पोस्टर में फोटो लगाए जाने पर पार्टी के सूत्रों ने बताया कि 200 विधानसभा क्षेत्र में जाने वाली जनाक्रोश यात्रा में भाजपा किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है। इससे पहले पार्टी के कार्यक्रमों में राजे को तवज्जो नहीं देने पर उनके समर्थक मुखर हो चुके हैं। इन नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को चुनौती देने और भाजपा सरकार बनाने में वसुंधरा राजे की अहम भूमिका है।

वसुंधरा राजे के दो साल पहले हटाए गए थे फोटो
भाजपा ने 2 साल पहले प्रदेश कार्यालय के बाहर लगे होर्डिंग से वसुंधरा राजे के फोटो हटा दिए थे। तब पदाधिकारियों का तर्क था कि केंद्रीय कार्यालय की गाइडलाइन के हिसाब से प्रचार सामग्री में तस्वीर लगाई और हटाई जा रही है। प्रदेश की राजनीति में वसुंधरा को पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से हाशिए पर रखा जा रहा है। कहने को तो वह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। लेकिन संगठन की गतिविधियों में उनका दखल ना के बराबर है। अब वसुंधरा राजे को तवज्जो देने को पार्टी के भीतर गुटबाजी खत्म करने की तब कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है।












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