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Rajya Sabha Election 2022 Result : राजस्थान से राज्यसभा में पहुंचे ये चार नए सांसद कौन हैं?

जयपुर, 10 जून। राजस्थान से राज्यसभा में चार नए सांसद भेजे गए हैं। राज्यसभा चुनाव 2022 में इनको चुना गया है। इसके लिए राजस्थान विधानसभा में 10 जून को सुबह नौ से शाम चार बजे तक मतदान हुआ। उसके बाद शाम पांच बजे मतों की गिनती की गई। कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद तिवारी और भाजपा प्रत्याशी घनश्याम तिवारी ने जीत दर्ज की है। भाजपा समर्थित निर्दलीय सुभाष चंद्रा को प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा है।

राज्यसभा चुनाव 2022 परिणाम राजस्थान

राज्यसभा चुनाव 2022 परिणाम राजस्थान

बता दें कि 200 विधायकों वाले राजस्थान में लोकसभा की 25 व राज्यसभा की 10 सीट हैं। राज्यसभा की चार सीट में 4 जुलाई 2022 में खाली हो रही हैं। इससे पहले राज्यसभा चुनाव 2022 की सम्पूर्ण प्रक्रिया 13 जून तक सम्पन्न हो जाएगी। फिर नए सांसद कार्यभार संभालेंगे।


आइए जानते हैं कि राजस्थान से राज्यसभा के चार नए सांसदों रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद तिवारी और घनश्याम तिवारी के बारे में।

राजस्थान से राज्यसभा सांसदों की सूची 2022

राजस्थान से राज्यसभा सांसदों की सूची 2022

1. राजेंद्र गहलोत, भाजपा

2. किरोड़ीलाल मीणा, भाजपा
3. भूपेंद्र यादव, भाजपा
4. ओम प्रकाश माथुर, भाजपा
5. रामकुमार वर्मा, भाजपा
6. हर्षवर्धन सिंह, भाजपा
7. अल्फोंस कन्ननथानम, भाजपा
8. केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस
9. नीरज डांगी, कांगेस
10. मनमोहन सिंह, कांग्रेस
(ओम प्रकाश माथुर, राम कुमार वर्मा, हर्षवर्धन सिंह व अल्फोंस कन्ननथानम की सीट 4 जुलाई 2022 को खाली होगी)

 1. राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला की जीवनी ( Rajya Sabha MP Randeep Singh Surjewala Biography )

1. राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला की जीवनी ( Rajya Sabha MP Randeep Singh Surjewala Biography )

- राजस्थान से पहली बार राज्यसभा सांसद चुने गए कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला मूलरूप से हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ के रहने वाले हैं।

- रणदीप सिंह सुरजेवाला का जन्म 3 जून 1967 को किसान खेत मजदूर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री चौधरी शमशेर सिंह सुरजेवाला व विद्या देवी के घर हुआ।

- सुरजेवाला ने शुरुआती शिक्षा नरवाना के आदर्श बाल मंदिर व आर्य उमावि से पूरी की। में हुई। डीएवी स्कूल से वाणिज्य में स्नातक व पंजाब विश्वविद्यालय से विधि में स्नातक की डिग्री पाई। राजनीति विज्ञान में एमए भी किया।

- रणदीप सिंह सुरजेवाला ने वकालत भी की। 21 साल की उम्र में साल 1988 में दिल्ली में वकालत फर्म श्रॉफ एंड कंपनी से शुरुआत की। उसे पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में जारी रखा।

- राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला की शादी 1991 में गायत्री सुरजेवाला के साथ हुई। इनके दो बेटे अर्जुन आदित्य हैं।

- जाट समुदाय आने वाले रणदीप सिंह सुरजेवाला कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता है। इन्हें राहुल गांधी के विश्वासपात्र व करीबी नेता भी माना जाता है।

- रणदीप सुरजेवाला ने महज 17 साल की उम्र में राजनीति में कदम रख दिया था। तब इन्हें हरियाणा प्रदेश कांग्रेस यूथ विंग का जनरल सेकेट्री नियुक्त बनाया गया था।

- साल 2000 में रणदीप सिंह सुरजेवाला हरियाणा से आने वाले वो पहले शख्स बने जिन्हें इंडियन यूथ कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। इस पद पर पांच साल रहे।

- साल 2004 में रणदीप सुरजेवाला को कांग्रेस पार्टी में सचिव व प्रदेश इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।

- साल 1996 और 2005 के ​हरियाणा विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल के नेता और मुख्यमंत्री रहे ओम प्रकाश चौटाला के ख़िलाफ़ मैदान में उतारा था और दोनों बार सुरजेवाला जीते।

- रणदीप सुरजेवाला कई बार राज्य मंत्री और कैबिनेट के सदस्य रह चुके हैं। साल 2014 में वो चौथी बार विधायक चुने गए थे।

- भूपेंद्र सिंह हुड्डा नीत कांग्रेस सरकार में 2009 से 2014 तक रणदीप सिंह सुरजेवाला मन्त्रीमण्डल के सदस्य रह चुके हैं। वे हरियाणा के सबसे कम आयु के मंत्री बने।

- रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा विधानसभा से 6 बार साल 1993 उप चुनाव, 1996, 2000, 2005, 2009 व 2014 में चुनाव लड़ा।

2. राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की जीवनी ( Rajya Sabha MP Mukul wasnik Biography )

2. राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की जीवनी ( Rajya Sabha MP Mukul wasnik Biography )

- मूलरूप से महाराष्ट्र के रहने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता मुकुल वासनिक का जन्म 27 सितंबर 1959 को पूर्व सांसद बालकृष्ण रामचंद्र वासनिक घर हुआ।

- मुकुल वासनिक ने महज 25 साल की उम्र में ही राजनीति में कदम रख लिया था और पिता की राजनीतिक विरासत को बखूबी संभाला।

-मुकुल वासनिक तीन बार सांसद रहे चुके हैं और ये पहली बार 1984-1989 में लोकसभा के सांसद बने थे। फिर 10वीं और 12वीं लोकसभा चुनाव में जीते।

- मुकुल वासनिक ने साठ साल की उम्र में अपनी दोस्त रवीना खुराना से साल 8 मार्च 2020 को नई दिल्ली में शादी की।

- मुकुल वासनिक ने शिक्षा महाराष्ट्र से प्राप्त की। इनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत एनएसयूआई से हुई थी।

- मुकुल वासनिक के पिता बुलढाना से तीन बार सांसद रहे। पिता के बाद बुलढाना की अपनी पारंपरिक सीट से मुकुल वासनिक ने 1984, 1991 और 1998 में लोकसभा चुनाव जीता।

- लोकसभा चुनाव 2009 में मुकुल वासनिक ने अपनी पारंपरिक सीट बुलढाना को छोड़ रामटेक से चुनाव जीता। फिर यूपीए-2 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री बने।

-मुकुल के पिता बालकृष्ण वासनिक बुलढाना से केवल 28 साल की उम्र में सांसद बने थे। इन्होंने पिता का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 25 साल की उम्र में लोकसभा का चुनाव जीतकर सबसे कम उम्र के सांसद बने।

- मुकुल वासनिक को मध्यप्रदेश में दीपक बावरिया की जगह कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था। इनके पास केरल,तमिलनाडु और पुदुचेरी का भी प्रभार रहा।

3. राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी की जीवनी ( Rajya Sabha MP Ghanshyam Tiwari Biography )

3. राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी की जीवनी ( Rajya Sabha MP Ghanshyam Tiwari Biography )

- भाजपा के दिग्गज नेता घनश्याम तिवाड़ी का जन्म 19 दिसम्बर 1947 के राजस्थान के सीकर जिले के खूड़ में हुआ।

- घनश्याम तिवाड़ी की शादी पुष्पा तिवाड़ी से हुई। इनके दो बेटे व एक बेटी है। परिवार वर्तमान में जयपुर के श्यामनगर में रहता है।

-घनश्याम तिवाड़ी की राजनीतिक पारी की शुरुआत सीकर के श्री कल्याण कॉलेज के छात्र संगठन के चुनाव 1968 से की।

-एलएलबी व बीकॉम करने वाले घनश्याम तिवाड़ी सीकर के एसके कॉलेज के छात्रसंघ में जीतकर महामंत्री बने।

- 33 साल की उम्र में राजस्थान विधानसभा चुनाव 1980 में घनश्याम तिवाड़ी ने सीकर से कांग्रेस के दिग्गज तथा नगरपरिषद में सभापति रहे सोमनाथ त्रिहन को हराया।

- भाजपा के युवा नेता घनश्याम तिवाड़ी ने विधायक बनकर राजनीति में अच्छी पकड़ बनाई और साल राजस्थान विधानसभा चुनाव 1985 में तिवाड़ी फिर से सीकर विधायक बने।

- राजस्थान के पूर्व सीएम भैरोंसिंह शेखावत व वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री रहे घनश्याम तिवाड़ी के वसुंधरा सरकार के साथ वैचारिक मतभेद रहे।

- राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के वक्त तिवाड़ी ने बीजेपी से अलग होकर 'भारत वाहिनी' नाम से अपने एक राजनीतिक दल का गठन किया।

- साल 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में घनश्याम तिवाड़ी के दल भारत वाहिनी के प्रत्याशी हार गए। खुद तिवाड़ी जयपुर की सांगानेर सीट से अपनी जमानत नहीं बचा पाए।

-भाजपा से अलग होकर घनश्याम तिवाड़ी ने लोकसभा चुनाव 2019 से पहले राहुल गांधी का जयपुर में रोड शो में तिवाड़ी कांग्रेस का हाथ थाम लिया था।

- कुछ समय बाद घनश्याम तिवाड़ी का कांग्रेस से भी मोहभंग हो गया और वे अपने जन्मदिन 19 दिसम्बर से पहले भाजपा में लौट आए।

- राजस्थान में घनश्याम तिवाड़ी छह बार विधायक रह चुके हैं। भाजपा में कई अहम पदों पर रह चुके हैं।

- अस्सी के दशक में सीकर से दो बार विधायक बनने के बाद
वर्ष 1993 से 1998 तक विधानसभा क्षेत्र चौमूं से चुने गए।

-तिवाड़ी जुलाई 1998 से नवंबर 1998 तक भैरोंसिंह शेखावत सरकार में ऊर्जा मंत्री व दिसम्बर 2003 से 2007 तक वसुंधरा राजे सरकार में शिक्षा मंत्री रहे।

4. राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की जीवनी ( Rajya Sabha MP Pramod Tiwari Biography )

4. राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की जीवनी ( Rajya Sabha MP Pramod Tiwari Biography )

- कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी का जन्म 16 जुलाई 1951 को

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में हुआ।

-ये मूलरूप से यूपी के गांव शितलमऊ के रहने वाले हैं।
इनके पिता का नाम सरयू प्रसाद तिवारी व इंद्राणी देवी है।

- प्रमोद तिवारी उत्तर प्रदेश विधानसभा की रामपुरखास सीट से लगातार नौ बार विधायक रह चुके हैं।

- प्रमोद तिवारी की शादी 9 जून 1973 को अलका तिवारी से हुई। अलका का 27 अप्रैल 2012 को निधन हो गया।

- इनके दो बेटियां हैं। आराधना मिश्रा (मोना तिवारी) व विजयश्री तिवारी (सोना तिवारी) है।

-यूपी के प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। यहां 41 साल से एक ही पार्टी का कब्जा है।

- रामपुर खास सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी पहली बार 1980 में मैदान में कूदने के बाद लगातार 34 साल तक विधायक रहे।

- साल 2014 में निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद उन्होंने यह सीट अपनी बेटी आराधना मिश्रा मोना को सौंप दी।

-प्रमोद तिवाड़ी साल 1984 से 1989 के बीच दो बार राज्यमंत्री भी रहे।

-लगातार नौ बार एक ही विधानसभा क्षेत्र, एक पार्टी और एक चुनाव निशान से जीत दर्ज करने पर प्रमोद तिवारी का नाम गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

-साल 2014 से 2022 के विधानसभा चुनाव में रामपुर खास सीट से इनकी बेटी आराधना मिश्रा मोना ने तीन बार जीत दर्ज की।

-रामपुर खास सीट पर साल 1980 के बाद से प्रमोद तिवारी ने कांग्रेस के अलावा किसी दूसरे दल को खाता तक नहीं खोलने दिया।

- एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी को प्रमौद भैया के नाम से भी जाना जाता है।

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