पढ़िए BJP प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया का 22 साल पुराना वो पूरा लेटर जो राजस्थान में अब बम की तरह फूटा है

जयपुर, 29 जून। राजस्थान में कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा में भी अंदरखाने कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया और प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया गुट आमने-सामने हैं। इस बीच सतीश पूनिया का एक लेटर वायरल हो रहा है। यह लेटर 5 जुलाई 1999 को सतीश पूनिया ने राजस्थान भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष गुलाबचंद कटारिया को लिखा था।

राजस्थान में फूटा लेटर बम

राजस्थान में फूटा लेटर बम

राजस्थान की सियासत में 22 बाद घमासान मचा देने वाले इस लेटर का विषय था-'संसदीय चुनावों में हर बार हो रही उपेक्षा के कारण भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिए जाने के संबंध में'

उस समय 34 वर्षीय सतीश पूनिया ने आखिर तीन पन्नों में ऐसा क्या लिख डाला था, जो 22 साल बाद 2021 में लेटर बम बनकर फूटा है।

पढ़िए हूबहू....

पढ़िए हूबहू....

श्रीमान गुलाबचंद कटारिया सा.

प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा, राजस्थान

मान्यवर,

मैं छात्र जीवन के दौरान 1982 में राजस्थान विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा विद्यार्थी परिषद के सम्पर्क आया और 1983 में महाराजा कॉलेज इकाई के संयोजक से लेकर जयपुर महानगर सहमंत्री, प्रदेश सहमंत्री, प्रदेश मंत्री जैसे दायित्वों का निर्वहन करते हुए दस वर्ष अनवरत काम किया। यह वह समय था जब आम विज्ञान छात्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या विद्यार्थी परिषद की गतिविधियों से दूर रहता था।

सतीश पूनिया 1998 में बने भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष

सतीश पूनिया 1998 में बने भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष

मैंने सब कुछ सहते हुए भी निरंतर काम किया और प्रदेशभर के कार्यकर्ता मेरे काम आचरण एवं व्यवहार के प्रत्यक्ष गवाह हें। मैं विस्तार में नहीं जाना चाहता। भाजपा की गतिविधियों से जुड़ने के बाद राजनीति में भी सक्रिय तौर पर काम किया। 1992 में मोर्चा के प्रदेश महामंत्री और पांच सितम्बर 1998 में प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद लोकसभा व विधानसभा की करारी पराजय के बावजूद मोर्चा की गतिविधियों के माध्यम से प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं के मनोबल निर्माण के लिए मन वचन एवं कर्म से संगठन का काम किया है।

सतीश पूनिया बोले बुरे दिनों में भी रहा साथ

सतीश पूनिया बोले बुरे दिनों में भी रहा साथ

इन वर्षों में संगठन के नाते मुझमें जो कुछ बन पाया मैंने किया और मैंने राजनीतिक रूप से इस दौरान कुछ पाया भी नहीं, लेकिन फिर भी संगठन के नाते निर्वाह की गई भूमिका से मैं पूर्णतया संतुष्ट हूं और इस बात को महसूस करता हूं कि जब मैं जिम्मेदारी से मुक्त रहा हूं तो यह पार्टी के अच्छे दिनों में हो रहा है। मैं पार्टी के बुरे दिनों में साथ रहा और अच्छे दिनों में जिम्मेदारी छोड़ रहा हूं।

 कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने वालों को तवज्जो-पूनिया

कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने वालों को तवज्जो-पूनिया

मैंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार मन वचन और कर्म से कार्य करने भरपूर प्रयास किया है, लेकिन मैं महसूस कर रहा हूं कि संसदीय राजनीति नाम पर पार्टी ने मेरी घोर उपेक्षा की है और मेरे मुकाबले बार-बार उन्हीं व्यक्तियों को तवज्जो मिलती रही है, जो परम्परागत रूप से विचारधारा के घोर विरोधी रहे और जिन्होंने भाजपा से बाहर और भाजपा के भीतर रहकर कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया है।

सादुलपुर से टिकट चाहते थे सतीश पूनिया

सादुलपुर से टिकट चाहते थे सतीश पूनिया

1993 तके मुझे सादुलपुर चूरू विधानसभा चुनाव से वंचित रखा गया, क्योंकि तत्कालीन सांसद रामसिंह कस्वां ने धमकी देकर अपनी पत्नी के लिए टिकट हासिल कर लिया। बाद में वो पराजित हुईं। 1996 में चूरू संसदीय क्षेत्र का लोकसभा, 1996 का सरदारशहर विधानसभा उपचुनाव, 1998 का लोकसभा चुनाव रामसिंह कस्वां ने लड़ा और लगातार इन तीनों चुनावों में बुरी तरह पराजित हुआ। पार्टी मुझे 1993 के विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार आश्वस्त करती आ रही है, लेकिन चुनाव रामसिंह कस्वां लड़ रहे।

रामसिंह कस्वां को बार-बार टिकट देने का विरोध जताया

रामसिंह कस्वां को बार-बार टिकट देने का विरोध जताया

1998 विधानसभा चुनाव के दौरान भी मेरी उपेक्षा की गई और कस्वां को उम्मीदवार बनाया गया। 8 महीने पहले चुनाव लड़ने और विधायक बनने के बाद लगातार 7वीं बार इस लोकसभा चुनाव में रामसिंह कस्वां ही पार्टी की ​पसंद किस दबाव में बन रहे मैं आज तक नहीं जान पाया। पार्टी मुझे बराबर आश्वस्त करती रही और यह सिलसिला विधानसभा और लोकसभा के विगत 6 चुनाव तक चलता रहा है।

चूरू सांसद रहे रामसिंह कस्वां को बताया भस्मासूर

चूरू सांसद रहे रामसिंह कस्वां को बताया भस्मासूर

एक बात तो निश्चित रूप से अजूबा बनी रहेगी कि मुझ जैसे कार्यकर्ता को तैयार करने में बरसों आप लगा देते हैं और संसदीय राजनीति के नाम पर उसकी अवहेलना करके आपकी विचारधारा को पलीता लगाने वाले भस्मासूर ही आपकी पसंद होते हैं। यह वास्तव में शोध का विषय है। ऐसी बात नहीं है कि आपको अवगत नहीं। करवाया गया।

युवा सम्मेलन में रखी थी अपनी बात

युवा सम्मेलन में रखी थी अपनी बात

विगत दिनों 18, 19 जुलाई को युवा मोर्चा की कार्य समिति 19 जुलाई को प्रदेश युवा सम्मेलन एवं एक अगस्त को प्रदेशभर में युवा मोर्चा जिलाध्यक्षों के जरिए मेरे प्रति पूरे प्रदेशभर के लोगों ने अपनी बात रखी थी। मुझे तो घोर आश्चर्य है ​कि इस बार के चुनावों के उम्मीदवारों को लेकर प्रदेश में मंडल स्तर के कार्यकर्ता से लेकर आप तक पूर्णतया आश्वस्त थे।

 भैरोसिंह शेखावत व राजेंद्र राठौड़ का भी जिक्र

भैरोसिंह शेखावत व राजेंद्र राठौड़ का भी जिक्र

पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत, श्री राजेंद्र राठौड़ एवं श्री रामसिंह कस्वां के प्रबल समर्थक रहे हैं। दिल्ली जाते वक्त मुझे चुनाव लड़ने का स्पष्ट संकेत कर चुके थे। पूर्व उप मुख्यमंत्री हरिशंकर भाभड़ा, पूर्व मंत्री ललित किशोर चतुर्वेदी भी मुझे लड़ाने के लिए आश्वस्त थे। मुझे जो विश्वस्त जानकारी मिली है उसके अनुसार इन ​लोगों ने दिल्ली में पासा पलटा है।

 शेखावत, चतुर्वेदी व भाभड़ा पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप

शेखावत, चतुर्वेदी व भाभड़ा पर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप

श्री भैरोंसिंह शेखावत, श्री ललित किशोर चतुर्वेदी, श्री हरिशंकर भाभड़ा ने मेरी पीठ में छुरा घोंपकर प्रदेशभर के कार्यकर्ताओं की छाती पर पैर रखकर करवाया है। प्रदेशभर के कार्यकर्ता इस अपमान को सहने की स्थिति में नहीं हैं। इतने वर्षों तक लगातार उपेक्षा से मैं क्षुब्ध हूं और मैं इस मानसिकता मैं नहीं हूं कि मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष पद पर बना रहूं।

मैं भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं। इस कार्यकाल के दौरान तथा मेरी राजनीतिक यात्रा के दौरान जो लोग भी मेरे साथ रहे उन सभी का आभार।

सतीश पूनिया
प्रदेशाध्यक्ष युवा मोर्चा राजस्थान

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