Sundar Singh Gurjar Bronze : रियो में की गलती टोक्यो में सुधारी, दोस्त के घर हादसे में खोई थी कलाई
जयपुर, 30 अगस्त। राजस्थान के दो सितारे टोक्यो में चमके हैं। एक देवेंद्र झाझड़िया और दूसरे सुंदर सिंह गुर्जर। दोनों ने टोक्यो पैरालंपिक 2020 की पुरुषों की भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) एफ46 फाइनल स्पर्धा में एफ46 इवेंट में पदक जीते हैं। देवेंद्र झाझड़िया को रजत व सुंदर सिंह गुर्जर को कांस्य पदक हासिल हुआ है।
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बता दें कि सुंदर सिंह गुर्जर ने सुंदर सिंह गुर्जर ने 64.01 मीटर भाला फेंककर अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके ब्राॅन्ज मेडल जीता है। इवेंट में सुंदर की शुरुआत धीमी हुई थे। अपने पांचवें प्रयास में 64 मीटर से अधिक का थ्रो कर पदक जीत लिया।

रियो में इवेंट से हो गए थे डिस्क्वालिफाई
बता दें कि रियो पैरालंपिक 2016 में सुंदर गुर्जर के साथ अजीब घटना हुई और पैरालंपिक के मैदान में मौजूद होने के बावजूद इवेंट में भाग से चूक गए थे। हुआ यह था कि इवेंट से पहले अनाउंसमेंट कॉल किया गया था, जिसे सुनने में सुंदर को 52 सेकंड की देरी हो गई। इस वजह से उनकी कॉल रूम में लेट एंट्री हुई। ऐसे में उन्हें घोषित कर दिया गया था।

सुंदर सिंह गुर्जर की जीवनी व हादसा
बता दें कि सुंदर गुर्जर मूलरूप से राजस्थान के करौली की टोडाभीम तहसील के गांव देवलेन के रहने वाले हैं। 2015 तक सुंदर गुर्जर सामान्य खेलों में हिस्सा लिया करते थे। करीब सात साल पहले एक दोस्त के घर हादसा हुआ था। टीन की चद्दर इनके हाथ पर गिर गई थी, जिसकी वजह हाथ की कलाई को काटना पड़ा था। इस हादसे के बाद सुंदर गुर्जर जबरदस्त निराशा में डूब गया था, मगर फिर अपने बुलंद हौसलों के दम पर खेल में शानदार वापसी की। हादसे के बाद सुंदर पैरा एथलीट बन गए।

सुंदर गुर्जर के अवार्ड व पदक
-पैरा वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीता गोल्ड मेडल।
- लंदन वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जैवलिन थ्रो एफ-46 में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता
-लंदन में सुंदर ने इस दौरान 60.36 मीटर के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
-वर्ष 2019 में दुबई में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड जीता।
वर्ष 2019 में केंद्र सरकार की ओर से अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया।
-एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर एवं ब्रॉज मेडल जीते।
-2018 में महाराणा प्रताप पुरस्कार से भी सम्मानित।
-16 वीं सीनियर नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप के दौरान राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के लिए 68.42 मीटर के निशान को छुआ था।












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