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इंद्रसिंह राव IAS : राजस्थान के वो पहले जिला कलेक्टर जो घूसकांड में हुए APO, जानिए इनकी पूरी कुंडली

जयपुर। राजस्थान कैडर के आईएएस इंद्रसिंह राव सुर्खियों में हैं। किसी अच्छे काम के लिए नहीं बल्कि 1 लाख 40 हजार की रिश्वत के मामले में। राजस्थान में इंद्रसिंह राव वो पहले जिला कलेक्टर बन गए हैं, जो कलेक्टर पद पर रहते हुए घूसकांड में एपीओ हुए हैं। अब कभी भी इनकी गिरफ़्तारी हो सकती है।

बारां कलेक्टर इंद्रसिंह राव कैसे फंसे घूसकांड में?

बारां कलेक्टर इंद्रसिंह राव कैसे फंसे घूसकांड में?

सबसे पहले ये जानिए कि आखिर एक जिला कलेक्टर जैसे जिम्मेदार अधिकारी के पद पर बैठा अधिकारी रिश्वत कांड में कैसे फंसा। बुधवार शाम को कोटा एसीबी की टीम ने बारां जिला कलेक्टर इंद्रसिंह राव के पीए महावीर नागर को पेट्रोल पम्प की एनओसी के बदले एक लाख 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। एसीबी की पूछताछ में पीए ने कबूल किया कि रिश्वत के पैसे में एक लाख रुपए जिला कलेक्टर इंद्रसिंह राव को भी देने थे। हालांकि एसीबी की शुरुआती जांच में इंद्रसिंह राव की संलिप्तता सामने आई है, मगर उनके द्वारा सीधे तौर पर रिश्वत की मांग नहीं की गई थी।

 कौन हैं आईएएस इंद्रसिंह राव?

कौन हैं आईएएस इंद्रसिंह राव?

बता दें कि बारां जिला कलेक्टर रहे इंद्रसिंह राव प्रमोटी आईएएस हैं। चार साल पहले इनको राजस्थान प्रशासिनक सेवा (RAS) से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)में प्रमोट किया था। ये मूलरूप से राजस्थान की राजधानी जयपुर के रहने वाले हैं। 1 जून 1962 को जन्मे इंद्रसिंह राव ने बीई सिविल, एमई जीओ टेक, एलएलबी व एलएलएम की डिग्री ले रखी है। वर्ष 1989 बैच के राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी इंद्रसिंह राव ने 31 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया।

 बारां कलेक्टर इंद्रसिंह राव का सर्विस रिकॉर्ड

बारां कलेक्टर इंद्रसिंह राव का सर्विस रिकॉर्ड

पीए रिश्वत कांड में नाम सामने आने के बाद बारां जिला कलेक्टर इंद्रसिंह राव को राज्य सरकार ने बुधवार शाम को ही एपीओ कर दिया है, मगर यह पहला मौका नहीं है जब इंद्रसिंह राव एपीओ हुए हैं। अपने 31 साल के प्रशासनिक सेवा के कार्यकाल में राव 6 बार एपीओ और एक बार सस्पेंड हो चुके हैं। इन्हें अपनी सर्विस की शुरुआत ट्रेनिंग के बाद 11 मई 1990 को हनुमानगढ़ में विकास अधिकारी पद से की थी। आरएएस से आईएएस में प्रमोट करने के बाद इंद्रसिंह राव को भाजपा सरकार ने राजस्व मंडल में लगाया था। फिर वर्ष 2018 में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस सरकार ने इन्हें बारां में जिला कलेक्टर पद पर लगाया था।

क्या है बारां कलेक्टर पीए रिश्वत कांड?

क्या है बारां कलेक्टर पीए रिश्वत कांड?

कोटा एसीबी एएसपी ठाकुर चंद्रशील के अनुसार परिवादी गोविंद सिंह ने ब्यूरो कार्यालय में शिकायत दी थी कि उनके पेट्रोल पंप के लीज कैंसिल कर गई थी। जिसकी एनओसी जारी करने के लिए बारां जिला कलेक्टर इंद्रसिंह राव के पीए महावीर नागर ने दो लाख चालीस हजार की रिश्वत मांग रहा है। बुधवार शाम एसीबी कोटा ने जाल बिछाया और महावीर को एक लाख 40 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। शिकायत के सत्यापन में सामने आया था कि एसीबी के सत्यापन के दौरान बारां जिला कलेक्टर इंद्रसिंह राव की मौन स्वीकृति थी।

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