वनों की रक्षा के लिए राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने बनाई नई वन नीति
जयपुर। राजस्थान सरकार नई वन नीति तैयार कर रही है। संभवत:अगले माह तक वन नीति को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल जाएगी और फिर इसे प्रदेश में लागू किया जाएगा। अगले 10 साल तक इसी वन नीति के अनुसार कामकाज होागा। वन नीति में इको टूरिज्म बढ़ाने व प्रदेश के 20 फीसदी भू-भाग पर हरियाली का लक्ष्य तय किया जा रहा है। वर्तमान में केवल 9 फीसदी भू-भाग पर ही वन है।

अब वन विभाग वन क्षेत्र के बाहर भी पौधारोपण करेगा, आम लोगों को पेड़ों को बचाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके साथ ही सरिस्का,रणथंभौर,मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और घना पक्षी विहार सहित अन्य सेंचूरी के आसपास से आबादी को हटाने,वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, वन्यजीवों की समय-समय पर ट्रेकिंग करने, इनमें मानव का प्रवेश कम से कम करने को लेकर भी प्रावधान किए जा रहे हैं। बाड़मेर के चौहटन सहित आधा दर्जन इलाकों में गाेंद, तेंदू पत्ते, पलास पेड़ को बढ़ावा देने के साथ ही जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में पाई जाने वाली सेवण घास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह घास मरूस्थल विस्तारण को नियंत्रित करती है।
प्रदेश के सवाई माधोपुर, भरतपुर व टोंक जिलों में मिलने वाली खस घास की जड़ों के रख-रखाव को लेकर जिम्मेदारी तय करने की योजना है। इस घास से सुगंधित तेज निकाला जाता है, जिसका उपयोग इत्र व शरबत में किया जाता है। महिलाओं में दुग्धवर्धक और पौरूषवर्धक के रूप में काम आने वाली शतावरी नई वन नीति में वन विभाग अपनी कार्यशैली और कार्यक्षेत्र दोनों में ही बदलाव करेगा। उल्लेखनीय है कि वन विभाग हर 10 साल में वन नीति में बदलाव करता है। नई वन नीति बनाई जाती है। पिछली बार साल, 2010 केे अंत में बनाई गई वन नीति में कई कमियां रह गई थी, इन्हे दूर करने के साथ ही अब नई वन नीति बनाई जा रही है।












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