कांग्रेस में बड़ी भूमिका में आए अशोक गहलोत, पार्टी के कार्यकर्ताओं में जगी यह उम्मीद

जयपुर, 6 सितम्बर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत धीरे-धीरे कांग्रेस में बड़ी भूमिका में नजर आने लगे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष पद का फैसला होने में भले ही अभी कुछ दिन है।लेकिन मुख्यमंत्री गहलोत पार्टी में गांधी परिवार के बाद दूसरे नंबर के नेता जरूर बन गए हैं। उस भूमिका का निर्वहन वह कुछ समय से कर भी रहे हैं। दिल्ली में सफल हल्ला बोल रैली में भी उनकी भूमिका सीधे दूसरे नंबर की ही थी। राहुल गांधी के बाद गहलोत का ही दबदबा साफ देखा गया। हल्ला बोल जैसी सफल रैली में बड़ी भूमिका राजस्थान की ही दिखाई दी। रैली कराने के बाद गहलोत चुप नहीं बैठे। वे आगे की तैयारियों में जुट गए। अशोक गहलोत जब से दिल्ली में सक्रिय हुए हैं। पार्टी में उत्साह और मजबूती देखने को मिल रही है। हाल ही में महंगाई को लेकर हुई रैली का सफल होना इस बात का संकेत है कि पार्टी फिर से खड़े होने का प्रयास कर रही है। रैली के दौरान एक और नजारा देखने को मिला कि जिस क्रम में नेताओं के भाषण करवाए गए। उस हिसाब से गहलोत का कांग्रेस में राहुल गांधी के बाद दूसरे नंबर का नेता हो गए हैं। जाहिर है अशोक गहलोत गांधी परिवार के बाद कांग्रेस में सबसे बड़े नेता माने जाने लगे हैं।

ashok gahlot

अशोक गहलोत ने कार्यकर्ताओं का दिल जीता

अशोक गहलोत ने कार्यकर्ताओं का दिल जीता

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की पार्टी के प्रति वफादारी ने कांग्रेस के सभी कार्यकर्ताओं का मन जीता था। वैसे ही कांग्रेस का कार्यकर्ता राहुल गांधी के बाद अब अशोक गहलोत से उम्मीद कर रहा है कि कांग्रेस फिर से वापसी करेगी। गहलोत के सीएम रहते हुए अध्यक्ष पद संभालने की अधिक संभावना नजर आ रही है। पार्टी ऐसा कर राजस्थान में अपनी सरकार की वापसी सुनिश्चित करना चाहती है। इससे पार्टी को लाभ मिल सकता है। लेकिन यह सत्य है कि अध्यक्ष का फैसला होने के बाद राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में बड़े बदलाव तय है। सरकार और संगठन में कुछ चेहरों की अदला-बदली हो सकती है। अब पार्टी में बड़े फैसले होने की पूरी संभावना है।

 पार्टी के भीतर असंतोष को दबाया

पार्टी के भीतर असंतोष को दबाया

अशोक गहलोत ने गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर उठ रही आवाजों को भी दबाया है। उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम अशोक चव्हाण जैसे नेताओं को पार्टी के मंच से बुलवाया। शशि थरूर जैसे नेता से जोधपुर हाउस में मुलाकात की और उनकी आशंकाएं दूर की। आजाद के इस्तीफे के बाद पार्टी में एकदम अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। गहलोत की सक्रियता ने उसे खत्म किया। गहलोत के सक्रिय होने से कार्यकर्ताओं और नेताओं की उम्मीद जगी है। हालांकि गहलोत समेत पार्टी का हर नेता भी यही चाहता है कि राहुल गांधी ही पार्टी की कमान संभाले।

मुख्यमंत्री रहते हुए पार्टी में सक्रिय

मुख्यमंत्री रहते हुए पार्टी में सक्रिय

पार्टी की तरफ से राहुल को मनाने के प्रयास जारी हैं। नामांकन के दिन तक प्रयास जारी रहेंगे। गहलोत खुद राहुल को फिर से कमान संभालने के लिए मनाने की कोशिश जारी रखेंगे। फैसला राहुल को करना है। अगर राहुल गांधी अध्यक्ष पद संभालने के लिए तैयार नहीं होते हैं तो यह तय माना जा रहा है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर ताजपोशी होगी। कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के पार्टी छोड़ते ही मुख्यमंत्री की भूमिका के साथ ही अशोक गहलोत पार्टी को एकजुट बनाए रखने में सबसे अधिक सक्रिय हो गए हैं।

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