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Jagdalpur: आपकी बिगड़ी बाइक बना देगी हेमवती, मिलिए Chhattisgarh की पहली महिला motor mechanic से

जगदलपुर, 04 अक्टूबर। महिला सशक्तिकरण के आपने कई उदाहरण देखे होंगे। देश में बेटियां आईएएस ,आईपीएस ,डॉक्टर , इंजीनियर और वकील बन रही हैं। लेकिन आपने कभी यह सुना है कि कोई बेटी बिना कोई कॉलेज ,यूनिवर्सिटी में शिक्षा लिए मोटर मैकेनिक बन गई हो। हम आज आपको छत्तीसगढ़ के बस्तर की एक बेहद ही साधारण से परिवार की महिला हेमवती नाग के बारे में बता रहे हैं, जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए और परिवार को चलाने के लये मोटर मैकेनिक बन गई है।

छत्तीसगढ़ की पहली महिला मोटर मैकेनिक है हेमवती

छत्तीसगढ़ की पहली महिला मोटर मैकेनिक है हेमवती

हेमवती नाग बेहद ही साधारण सी आदिवासी साधारण महिला है। वह पारिवारिक माहौल पर आर्थिक स्थिति के कारण दूसरी लड़कियों की तरह पढाई नहीं कर सकी। पढ़ाई की भी, तो महज 8वीं कक्षा तक फिर शायद आगे शादी हो गई। हेमवती अपने घर का कामकाज निपटाने के बाद गाड़ियों का पंचर ठीक करने और मोटरसाइकिलों की रिपेयरिंग का काम करती है। छत्तीसगढ़ में उसे पहली महिला 'मोटर मैकेनिक' कहा जा रहा है। इन दिनों आदिवासी महिलाओं और बच्चियों के बीच हर तरफ हेमवती दीदी के नाम के चर्चे हो रहे हैं।

आदिवासी महिलाओं की बनी आदर्श

आदिवासी महिलाओं की बनी आदर्श

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले के दूरस्थ गांव रेतावंद में रहने वाली हेमवती नाग पिछड़े इलाकों में व्याप्त रूढ़ियों को तोड़ा और अपने बच्चों की परवरिश के लिए आगे बढ़ी और मोटर मैकेनिक का काम सीखकर उसे अपना पेशा बना लिया। हेमवती आज बस्तर के आदिवासी इलाकों में एक आदर्श के तौर पर देखी जा रही हैं। उसने आदिवासी बेटियों को बता दिया कि महिला केवल घर के कामों में उलझी नहीं रहती ,हिम्मत हो,तो वह आत्मनिर्भर बन सकती है।

पति की करनी थी मदद,सीख लिया मैकेनिक का काम

पति की करनी थी मदद,सीख लिया मैकेनिक का काम

केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद हेमवती की शादी तुलेश्वर नाग नाम के युवक से हुई। तुलेश्वर खुद एक मैकेनिक है,उसने खुद ही छोटी सी मोटर रिपेयरिंग वर्कशॉप खोली,जिसके लिए उसको दुकान बंद करके ही जरुरी सामान लेने के लिए शहर जाना पड़ता था। दुकान बंद रहने के कारण उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। हेमवती ने अपने पति की समस्या का हल ढूंढा और उसका सहयोग करने की ठानी।

इसके बाद आहिस्ता-आहिस्ता हेमवती टू व्हीलर बनाना और पंचर बनाना सीख गई। हेमवती का कहना है कि कोई भी पेशा हो महिलाएं भी पुरुषों की बराबरी से अच्छा काम कर सकती हैं। हेमवती कहती हैं कि मैंने अपना काम पूरी लगन और मेहना से किया है। अगर बस्तर की महिलाएं और बेटियां मुझसे प्रेरित हो रही हैं। तो अच्छी बात है।

बेटी को पढ़ा रहे हैं स्वामी आत्मानंद स्कूल में

बेटी को पढ़ा रहे हैं स्वामी आत्मानंद स्कूल में

हेमवती ने भले ही अपना बचपन और शादी के बाद भी समस्याओं का अम्बर झेला हो, वह पढाई जारी ना रख सकी हो,लेकिन वह अपनी बेटी पूजा को भरपूर शिक्षा देना चाहती है। आज हेमवती और उसके पति तुलेश्वर एक साथ अपनी दुकान में काम करते हैं और उनकी बेटी पूजा स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ने जाती है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के कई शहरों में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोल रखे हैं,जिसमें निर्धन बच्चे अंग्रेजी माध्यम में भी अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

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