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Success Story: नासा में रिसर्च करेगी रितिका, पिता हैं साइकिल मैकेनिक, 43 किलोमीटर पैडल मारकर जाती है स्कूल

हौसला हो,तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। छत्तीसगढ़ की 16 साल की रितिका ने दिखाया है,जिसपर सारे देश को नाज है। महासमुन्द जिले के नयापारा में स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली रितिक
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महासमुंद, 03 अक्टूबर । हौसला हो,तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। छत्तीसगढ़ की 16 साल की रितिका ने दिखाया है,जिसपर सारे देश को नाज है। महासमुन्द जिले के नयापारा में स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली रितिका ध्रुव ने नासा के सिटीजन साईंस प्रोजेक्ट के तहत क्षुद्रग्रह खोज अभियान के लिए हुआ है। बेहद ही साधारण परिवार से ताल्लुकात रखने वाली इस बच्ची की उपलब्धि कर छत्तीसगढ़ के हर कोने से उसे बधाईयां मिल रही है।

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    NASA में रिसर्च करेगी Chhatishgarh की Ritika Dhruv, पिता हैं साइकिल मैकेनिक | वनइंडिया हिंदी |*News
    देश के 6 बच्चों का चयन

    देश के 6 बच्चों का चयन

    सिटीजन साईंस प्रोजेक्ट नासा का कार्यक्रम है।इस प्रोजेक्ट में भारत अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय खोज सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत साझेदारी का कर रहा है। सोसाइटी फॉर स्पेस एजुकेशन रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानि एसएसईआरडी ने क्षुद्र ग्रह खोज अभियान की प्रक्रिया के जरिये से छात्रों को प्रोत्साहित करने कहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए देशभर से 6 स्कूली विद्यार्थियों को चुना गया है।

    इसमें छत्तीसगढ़ के सिरपुर की रहने वाली और महासमुन्द स्थित स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल की छात्रा रितिका ध्रुव भी शामिल है। जिन बच्चों का चयन हुआ है ,उनमे वोरा विघ्नेश (आंध्रप्रदेश), वेम्पति श्रीयेर (आंध्रप्रदेश), ओलविया जॉन (केरल), के. प्रणीता (महाराष्ट्र) और श्रेयस सिंह (महाराष्ट्र) शामिल हैं। इन विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष के वैक्यूम में ब्लैक होल से ध्वनि की खोज विषय पर एक प्रस्तुति दी थी।

    पिता करते हैं साइकिल रिपेयरिंग का काम, बेटी बनेगी वैज्ञानिक

    पिता करते हैं साइकिल रिपेयरिंग का काम, बेटी बनेगी वैज्ञानिक

    इस छोटी सी लड़की का हौसला बड़ा है। इसलिए बेहद ही साधारण से परिवार से आने के बावजूद उसने वैज्ञानिक बनने की ठानी है। रितिका किसी महंगे बड़े निजी कान्वेंट स्कूल में नहीं ,बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार के शासकीय स्कूल स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी विद्यालय में पढ़ती है। उसके पिता साइकिल रिपेयरिंग का काम करते हैं। घर की बच्ची अब नासा में भारत के लिए रिसर्च करेगी,इससे पूरा महासमुंद खुशियों से फूला नहीं समा रहा है।

    सीएम भूपेश बघेल और स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम रितिका ध्रुव की इस उपलब्धि से गदगद हैं। उन्होंने रितिका को बधाई भेजी है,वहीं महासमुंद के कलेक्टर निलेशकुमार क्षीरसागर का कहना है कि महासमुंद से कई प्रतिभावान छात्र-छात्राएं निकल रहे है। यह ज़िले के लिए गौरव की बात है।

    रोज 43 किलोमीटर का सफर करके जाती है स्कूल

    रोज 43 किलोमीटर का सफर करके जाती है स्कूल

    रितिका ध्रुव बचपन से ही प्रतिभाशाली रही है। पढाई के अलावा वह अन्य गतिविधियों में भी हमेशा अव्वल आती है,लेकिन को निखारना इतना आसान नहीं था। रितिका महासमुंद शहर में नहीं लगभग 43 किलोमीटर दूर सिरपुर में रहती हैं। उसे अपने स्कूल जाने के लिए हर दिन महासमुंद तक साइकिल से लगभग 43 किलोमीटर तक दूरी तय करनी होती है। गांव के स्कूल पढ़कर बढ़ना मुश्किल होता है, इसलिए शहर में संचालित स्वामी आत्मानंद स्कूल में पढ़ाई करने से उसका हौसला बढ़ा है। गौरतलब कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के कई शहरों में सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करके उनमे बेहतर शिक्षा देने के लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी स्कूल संचालित कर रही है।

    गुरुजनों और माता पिता के आशीर्वाद से बढ़ी आगे, कहा सपने के करीब हूं

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    रितिका का कहना है कि अब मै अपने सपने के बेहद करीब हूं। रितिका अपनी सफलता के लिए अपने शिक्षक और परिवारवालों को श्रेय देते हुए कहा कि मेरे शिक्षक और मेरा परिवार मेरे साथ हमेशा खड़े रहे, इसके लिए उनको शुक्रिया कहना चाहती हूं। रितिका का कहना है कि वह आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं।

    रितिका ने जब नासा के कार्य्रकम के लिए आवेदन किया था,तब जज पैनल में डॉ. बेलवर्ड (नासा), डॉ. जोनाथ (इसरो) और डॉ. ए. राजराजन (सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र) शामिल थे। वैज्ञानिक जजों की पूरी टीम ने रितिका ध्रुव को बधाई दी और उन्हें उन्हें एसडीएससी में अधिक जानने के लिए आमंत्रित किया। इसी क्रम में रितिका ध्रुव प्रशिक्षण के लिए 1 अक्टूबर से 6 अक्टूबर तक सतीश धवन स्पेस सेंटर श्री हरिकोटा आंध्रप्रदेश में प्रशिक्षण लेने पहुंची है। अगले चरण का प्रशिक्षण नवम्बर में बैंगलूरू इसरो में क्षुद्रग्रह प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेंगी।

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    English summary
    Success Story: Ritika will do research in NASA, father is cycle mechanic, goes to school after pedaling 43 kms
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