‘कामचोर’ कर्मचारियों की हो जाएगी परमानेंट छुट्टी, यदि बनाया बीमारी का बहाना और दिया फर्जी सर्टिफिकेट

चुनाव का मौसम शुरू हो गया है। जिसमें निर्वाचन कार्य में हर किसी को ड्यूटी पर तैनात रहना जरुरी है। चुनाव घोषणा होते ही लागू होते ही प्रदेश के सभी विभागों में जहाँ कर्मचारियों-अधिकारियों की छुट्टियाँ केंसिल हो गई है

जबलपुर, 08 जून: चुनावों में ड्यूटी का नाम सुनकर ही कई अलाल अधिकारियों कर्मचारियों का पसीना छूटने लगता है। दरअसल चुनाव संचालन का काम ही इतना संवेदनशील होता है कि जरा सी गलती हुई और सीधे निलंबन का आदेश हाथ में थमा दिया जाता है। इसलिए चुनाव ड्यूटी से बचने कर्मचारी तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। लेकिन अब बीमारी का बहाना बनाकर चुनाव ड्यूटी से बचने का आवेदन करने वाले अधिकारी कर्मचारियों पर निर्वाचन कार्यालय सख्त रुख अपनाएगा। जबलपुर जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. इलैयाराजा के मुताबिक आमतौर पर देखा गया है कि अधिकारी कर्मचारी चुनाव ड्यूटी से बचने फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट लगा देते हैं। उन्होंने साफ किया कि अब ऐसा नहीं चलेगा। फिटनेस सर्टिफिकेट की पूरी तफ्तीश कराई जाएगी साथ ही उक्त कर्मचारी के सभी अभिलेखों की जांच कराई जाएगी। कही भी गड़बड़झाला हुआ, तो उस कर्मचारी को सीधे अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी।

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चुनाव का मौसम शुरू हो गया है। जिसमें निर्वाचन कार्य में हर किसी को ड्यूटी पर तैनात रहना जरुरी है। चुनाव घोषणा होते ही लागू हुई आचार सहिंता के परिपालन में प्रदेश के सभी विभागों में जहाँ कर्मचारियों-अधिकारियों की छुट्टियाँ निरस्त कर दी गई है, तो वही अतिआवश्यक परिस्थितियों में ही छुट्टी नसीब हो रही है। यह भी तब, जब संबंधित विभाग अनुमोदन कर छुट्टी कलेक्टर कार्यालय से स्वीकृत कराए। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के आधार पर जिला निर्वाचन कार्यालय स्वीकृति दे सकता है। लेकिन इसका गलत ढंग से लाभ लेने वालों पर प्रशासनिक कोड़ा चलाने की इस बार पूरी तैयारी है। समय के पाबंद और अपने सख्त नियम के लिए पहचान कायम करने वाले जबलपुर कलेक्टर डॉ इलैयाराजा की अलाल कामचोर किस्म के कर्मचारियों पर सख्त नजर है।

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20-50 के फॉर्मूले के तहत दे दिया जाएगा पूरा आराम
कलेक्टर इलैयाराजा ने बताया कि ऐसे अधिकारी कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड को देखा जाएगा और 20 वर्ष की सेवा या 50 वर्ष की उम्र के साथ-साथ उसी फिटनेस सर्टिफिकेट को आधार बनाकर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। प्रशासनिक हल्कों में यह तथ्य उजागर है कि चुनाव ड्यूटी के वक्त बीमारी के कारण काम न कर पाने के आवेदनों में महज 10 फीसदी ही जेन्यून होते हैं, बाकी सभी सर्टिफिकेट ले देकर बनवा लिए जाते हैं।

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नाम नीचे दबाने के लिए भी होता है लेनदेन
सूत्रों की मानें तो केवल बीमारी का बहाना ही नहीं कर्मचारियों अधिकारियों के पास चुनाव ड्यूटी से बचने का एक और रामबाण इलाज है। ड्यूटी लगाने वाले अधिकारी के मातहत इस रामबाण का चूरन कामचोर कर्मियों को बांटते हैं। हथेली गरम होने पर अधिकारी के मातहत उक्त कर्मचारी-अधिकारी के नाम वाली लिस्ट सबसे नीचे लगा देते हैं। ऐसे में उक्त कर्मचारी अधिकारी चुनाव ड्यूटी से बच जाते हैं वहीं यदि ड्यूटी लगी भी तो रिजर्व की आरामदायक ड्यूटी लगती है। हालांकि इस रामबाण का प्रयोग छोटे कर्मचारी और अधिकारियों पर ही असरकारी होता है। बड़े अधिकारी इस चमत्कारी चूरन का प्रयोग नहीं कर पाते। हालाँकि खबर ये भी है कि ऐसे लोगों पर नजर रखने कई बड़े अधिकारियों ने अपने जासूस सक्रिय कर दिए है। उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। कही भी गफलतबाजी पाई जाने पर दोषी कर्मचारी-अधिकारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी।

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