Property Tax: जबलपुर में नगर निगम टैक्स वसूली पर तकरार, औद्योगिक संगठनों ने वूसली अभियान को बताया गैर-क़ानूनी
जबलपुर नगर निगम द्वारा संपत्ति कर वसूली को लेकर इंडस्ट्रियल एरिया के भू-स्वामी खफा हैं। औद्योगिक संगठनों ने टैक्स वसूली का विरोध शुरू कर दिया हैं। प्रशासन ने 1 हफ़्ते में बकायादारों की संपत्ति कुर्क करने के नोटिस थमाए है।

Municipal corporation Property tax collection Controversy: वित्तीय वर्ष खत्म होने में अब सिर्फ एक हफ्ता बाकी हैं। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन जबलपुर की शहर में ताबड़तोड़ टैक्स वसूली की कार्रवाई चल रही हैं। लंबे अरसे बाद नगर निगम की सत्ता पर कांग्रेस को राज करने का मौका मिला हैं, लिहाजा वसूली का आंकड़ा पूरा करने कड़े कदम भी उठाये जा रहे हैं। निगम सीमा में संचालित कई उद्योगों की बकाया करोड़ों की राशि वसूलने जब नोटिस जारी हुए तो औद्योगिक संगठन निगम प्रशासन के खिलाफ लामबंद हैं। बकायादारों को कहना है कि क़ानूनी रूप से नगर निगम उनसे संपत्ति कर नहीं वसूल सकता।

मध्य प्रदेश के जबलपुर नगर निगम प्रशासन द्वारा की जा रही प्रॉपर्टी टैक्स वसूली के खिलाफ औद्योगिक क्षेत्र के भू-स्वामियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा हैं। इस मुद्दे पर महाकौशल चेम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स ने भी मोर्चा खोल दिया हैं। रिछाई स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में स्थापित उद्योग वाली जगहों के बकाया टैक्स को वसूलने नोटिस जारी किए गए। जिससे भू-स्वामी तमतमाएं हुए हैं। महाकौशल चेंबर के पदाधिकारी अखिल मिश्रा का कहना है नगर निगम एक्ट के मुताबिक औद्योगिक क्षेत्रों वाली जगहों से निगम प्रशासन संपत्ति कर की वसूली नहीं कर सकता। क्योकि संबंधित भूमि उद्योग विभाग द्वारा लीज पर आवंटित की गई हैं।

अखिल मिश्रा ने बताया कि बीते कई सालों से रिछाई में उद्योग संचालित करने वाले लोग टैक्स अदा करते आए। करोड़ों रुपए टैक्स अभी तक भुगतान किया जा चुका हैं। बीच में भी यह मांग की गई थी कि निगम प्रशासन उन पर वसूली का अभियान न चलाए। लेकिन इस बार फिर संपत्ति कुर्क करने के धमकी भरे नोटिस जारी कर दिए हैं। इधर नगर निगम कमिश्नर स्वप्निल वानखेड़े का कहना है कि किसी भी शहर का विकास जनता के इस टैक्स की बदौलत ही होता हैं। जो भी कार्रवाई चल रही हैं, वह नियम मुताबिक हो रही हैं।

जबलपुर के मेयर जगत बहादुर सिंह 'अन्नू' से भी बकायादार उद्योगपतियों ने मुलाकात की। मेयर का कहना है कि ऐसा नहीं है कि वर्तमान में नगर निगम में कांग्रेस की सत्ता आई तो बकायादारों से वसूली हो रही हैं। कई दशकों से यह संपत्तिकर वसूला जाता रहा हैं। रहा सवाल, औद्योगिक क्षेत्र की भूमि का, तो वहां सड़क, स्ट्रीट लाइट, पानी की व्यवस्था नगर निगम ही करता हैं। इसके एवज में निगम प्रशासन का टैक्स वसूलने का अधिकार बनता हैं।
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