MP में कमाई का कर्मचारी चयन मंडल! 14 साल में 1150 करोड़ की कमाई, बेरोजगारों ने भरे थे फॉर्म
सरकारी नौकरी के लिए होने वाली चयन परीक्षाओं के सहारे मध्य प्रदेश में 14 सालों में 1150 करोड़ रुपए जमा हुए। जिसमें से खर्चे को घटा दें तो 677 करोड़ का मुनाफा हुआ।

MP Employee Selection Board: उपभोक्ता आधारित महकमे ही सरकार का खजाना नहीं भरते है, बल्कि कुछ विभाग ऐसे है जिनकी तरफ आम तौर पर हमारी निगाह नहीं जाती। चयन परीक्षा आयोजित करने वाला डिपार्टमेंट भी उन्ही में से हैं, जो करोड़ों की रुपए कमाकर देता हैं।
आज हम आपको जो बात बता रहे है, यह देश के किसी एक राज्य का जुड़ा मामला नहीं हैं, बल्कि हर राज्य में सरकारी खजाने में आमदनी का बड़ा हिस्सा बेरोजगारों या अन्य शैक्षणिक संस्थानों की परीक्षाओं का भी योगदान होता हैं। अकेले मध्य प्रदेश की बात करें तो कर्मचारी चयन मंडल ने बीते 14 सालों में सरकार को 677 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दिया। हालांकि आने वाले भविष्य में यह आंकड़ा इतना नहीं रहेगा। क्योकि शिवराज सरकार ने बड़ी सौगात देते हुए साल में परीक्षाओं के लिए सिर्फ एक बार फीस लेने का फैसला लिया हैं।

मध्य प्रदेश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूल-उच्च शिक्षा विभाग की अन्य परीक्षाओं में शामिल होने एग्जाम के हिसाब से परीक्षा शुल्क लिया जाता रहा। उनमें शामिल होने वाले अभ्यर्थियों ने भी सरकारी खजाना भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जानकारी में आए आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कर्मचारी चयन मंडल ने बीते 14 साल में 677 करोड़ रुपये की आमदनी की। सरकारी खजाने में आई इस बड़ी राशि में उन बेरोजगारों का भी हिस्सा रहा। जो अपनी योग्यता के हिसाब से एंट्रेंस एग्जाम या दूसरी परीक्षाएं देते आए। इतना ही नहीं स्कूल शिक्षा विभाग को दो बार की परीक्षाओं से अकेले 10 करोड़ से ज्यादा की कमाई की।

साल 2008-2009 से बीते वित्तीय वर्ष 2021-2022 के बीच लगभग 263 परीक्षाएं हुई हैं। जिससे हुई 1150 करोड़ की कमाई में से खर्च हुआ भी हुआ। आयोजित की गई विभिन्न श्रेणियों की परीक्षाओं में 473 करोड़ रुपए व्यय भी हुआ। फिर भी 677 करोड़ रुपए की बचत हुई। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित परीक्षाओं में सबसे ज्यादा आवेदन शिक्षक पात्रता भर्ती में ही हुए। शायद इन्ही आंकड़ों के मद्देनजर सरकार ने बीते दिनों ऐसी परीक्षाओं में शामिल होने वाले बेरोजगारों को बड़ी राहत दी हैं। अब सालाना एक मुश्त परीक्षा शुल्क लिया जाएगा। जिससे परीक्षार्थियों पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा।
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