MP News: सबसे ज्यादा प्रदूषित हुआ जबलपुर, पटाखों के धमाके और धुएं से एयर क्वालिटी इंडेक्स ने तोड़ा रिकॉर्ड
(MP News) दिवाली की रात मध्यप्रदेश जहां रंग-बिरंगी रोशनी से रोशन हुआ और खूब खुशियां बिखरी, तो वही आतिशबाजी के धूम-धड़ाम धमाकों और पटाखों का धुंआ हवा को रिकॉर्ड तोड़ प्रदूषित करता रहा। दो दिन में एयर क्वालिटी इंडेक्स जबलपुर में सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। सेहत के लिहाज से बेहद नुकसानदायक प्रदूषित इस वायु से जबलपुरवासी अभी तक जूझ रहे है। 35 डेसिबल तक सहन करने वाली ध्वनि के मुकाबले इसका स्तर 57 डेसिबल तक पहुंच गया। इस बार पटाखों की वजह से बढ़े वायु प्रदूषण को लेकर श्वास रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी चिंता जताई है।

दिवाली पर जबलपुर में टूटा रिकॉर्ड
सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण के लिए बदनाम देश की राजधानी दिल्ली के लोगों को लिए इस बार दीपावली की आतिशबाजी सुकून लेकर हुई तो वही मध्यप्रदेश में प्रदूषित वायु का इंडेक्स रिकॉर्ड तोड़ता नजर आया। दिवाली रात और अगले दिन पटाखों की वजह से सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर की श्रेणी में जबलपुर रहा। क्यूआई यानि क्वालिटी इंडेक्स दिवाली की रात 238 से बढ़कर मंगलवार को 241 पर पहुंच गया।

दिवाली की रात से ज्यादा अगले दिन प्रदूषण
प्रदूषण नियंत्रण विशेषज्ञ के मुताबिक प्रदेश के सभी बड़े शहरों में प्रमुख जगहों पर ध्वनि और वायु की गुणवत्ता का आंकलन करने इंडेक्स की व्यवस्था की गई थी। जिसमें पहले के मुकाबले इस बार दिवाली में सभी शहरों में प्रदूषण बढ़ा। खासकर जबलपुर में हैरानी की बात यह रही कि दिवाली की रात से ज्यादा अगले दिन वायु प्रदूषण दर्ज हुआ। जो कि चिंता का विषय बन गया है।

पटाखों के शोर ने भी लोगों को किया बेचैन
सिर्फ वायु प्रदूषण ही नहीं, बल्कि पटाखों के ध्वनि प्रदूषण ने भी जबलपुर के लोगों को परेशान किया। देर रात तक कान फोडू पटाखों चलते रहे है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक रात के वक्त पटाखों की आवाज 35 डेसिबल तक सहन करने लायक होती है। लेकिन बीते वर्षों के मुकाबले इस बार यह स्तर 57 डेसिबल तक पहुंच गया। जबकि दिवाली के काफी पहले निर्धारित क्षमता की आवाज वाले पटाखे चलाने के निर्देश जारी किए गए थे।

दो घंटे की जगह आधी रात तक जले पटाखे
सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार इस बार रात 8 बजे से 10 बजे तक पटाखे जलाने की अनुमति थी। लेकिन जबलपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में आधी रात तक अंधाधुंध आतिशबाजी होती रही। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन की टीमें कही भी कार्रवाई करती नजर नहीं आई। दुकानों पर भी धड़ल्ले से तेज आवाज के पटाखे बिके। प्रतिबंधित लोकल बनने वाले पटाखे ज्यादा मुनाफा के चक्कर में दुकानदार बेंचते नजर आए।

ठण्ड में इस वजह से ज्यादा प्रदूषित रहती है वायु
सर्दी के सीजन में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा होता है। एक्सपर्ट बताते है कि इस सर्दी के मौसम में नमी ज्यादा रहती है, लिहाजा धूल, धुंआ और गैस वातावरण में जल्दी नहीं घुल पाते। इस वजह से वायु के साथ प्रदूषित तत्व लोगों को नुकसान पहुंचाते है। विशेषज्ञों ने इसके लिए आम लोगों की जागरूकता की कमी और दोषियों पर कार्रवाई ना होने का नतीजा बताया है।












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