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Ayushman Yojna Fraud: होटल में हॉस्पिटल सील, भर्ती फर्जी मरीजों को भगा दिया या भाग गए ?

जबलपुर, 28 अगस्त: केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के नाम पर फर्जीवाड़े के आरोप में घिरे डॉ. अश्विनी पाठक के वेगा होटल को सील कर दिया गया है। दो दिन पहले पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यहां छापा मारा था। जिसमें आयुष्मान कार्डधारी फर्जी मरीज भर्ती मिले थे। पूरा कारोबार अवैध ढंग से चल रहा था। जिसकी प्रशासन ने भी पुष्टि की हैं। कार्रवाई के दौरान सेन्ट्रल इंडिया हॉस्पिटल संचालक की पत्नी की अधिकारियों से नोक-झौंक भी हुई। वही छापे के दौरान यहां मिले डमी मरीजों के भागने पर, अब सवाल उठ रहे हैं।

छापे के 36 घंटे बाद हो पाया होटल सील

छापे के 36 घंटे बाद हो पाया होटल सील

एमपी में स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी योजनाओं को अवैध कमाई का धंधा बनाने वालों में धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर भी हैं। जरुरतमंदों के लिए बनी केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना जबलपुर के सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल के मालिक ने अवैध कमाई का जरिया बना लिया था। अपने मूल अस्पताल के बगल में डॉ. अश्विनी पाठक का होटल, फर्जी अस्पताल के तौर पर चलता मिला। प्रशासन के छापे के 36 घंटे बाद इस जगह को सील कर दिया गया है।

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    फर्जीवाड़ा: होटल में चल रही हॉस्पिटल सील
    ना तो अस्पताल संचालन की अनुमति, और ना ही सेफ्टी के इंतजाम

    ना तो अस्पताल संचालन की अनुमति, और ना ही सेफ्टी के इंतजाम

    होटल को अस्पताल में तब्दील रखने की कई व्यवस्थाएं थी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा मारे गए यहां छापे में हॉस्पिटल संचालन के कोई भी वैध दस्तावेज नहीं मिले। इसके अतिरिक्त फायर सेफ्टी समेत अन्य सुरक्षा के जो इंतजाम जरुरी है, उनमें से एक का भी पालन नहीं हो रहा था। लिहाजा हॉस्पिटल के नाम पर यह पूरा कारोबार अवैध माना गया। ख़ास बात यह थी कि होटल के कमरों और हॉल में एक पलंग पर दो-दो कथित मरीज भर्ती मिले। जांच टीम बोली कि उन लोगों में किसी को सिर दर्द था, तो किसी को बदन दर्द। लेकिन पेशेंट की फ़ाइल में गंभीर मर्ज का इलाज दर्शाया जा रहा था।

    खुद चले गए या भगा दिए मरीज?

    खुद चले गए या भगा दिए मरीज?

    'होटल में अस्पताल'.. इस कांड की जांच कार्रवाई के बीच चौकाने वाली एक और बात सामने आई है। प्रशासनिक अमले के साथ होटल सील करने पहुंचे एसडीएम ओम नमः शिवाय अरजरिया बोले कि, छापे के दौरान भर्ती मिले फर्जी मरीज होटल छोड़कर चले गए है। वहीं एक दिन पहले आयुष्मान भारत योजना के जिला समन्वयक रामभुवन साहू ने कहा था कि इस फर्जीवाड़े में जितना डॉ. अश्विनी पाठक दोषी है, उतना ही गुनाहगार फर्जी मरीज भी है। दोनों ने मिलकर केंद्र सरकार को आर्थिक क्षति पहुंचाई है। बाबजूद इसके जांच कार्रवाई के बीच डमी मरीजों का गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

    आरोपी हॉस्पिटल संचालक की पत्नी से नोक-झौंक

    आरोपी हॉस्पिटल संचालक की पत्नी से नोक-झौंक

    होटल सील करने पहुंची अधिकारियों की टीम के साथ आरोपी डॉक्टर अश्विनी पाठक की पत्नी की तीखी नोक झौंक भी हुई। वह प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई पर आपत्ति जताती नजर आई। उनका कहना था कि मूल हॉस्पिटल (सेन्ट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल) की आवाजाही का एक रास्ता इस होटल से भी है। साथ ही अस्पताल में भर्ती मरीजों का रिकॉर्ड होटल में रखे कम्प्यूटर में दर्ज है। हालांकि बाद में अधिकारियों ने कम्प्यूटर ले जाने की अनुमति दी। इसके अलावा मूल अस्पताल की बिजली सप्लाई वाली जगह को प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है।

    फर्जीवाड़े में कितने लोग शामिल ?

    फर्जीवाड़े में कितने लोग शामिल ?

    5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज वाली आयुष्मान भारत योजना के जरिए हो रहे इस फर्जीवाड़े में कितने लोग शामिल रहे, यह भी अहम् जांच का विषय है। आरोपी डॉ. पाठक के अलावा वो कौन लोग थे, जो एमपी के कई जिलों से योजना की पात्रता रखने वाले लोगों को लालच देकर यहां भर्ती कराते थे। इसके साथ ही होटल और मूल अस्पताल की पिछले दो साल की ऑडिट रिपोर्ट को क्लीन चिट देने वाले लोग कौन थे?

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