Bageshwar dham के धीरेंद्र शास्त्री के प्रोग्राम में पहुंची 'चंचल' हथनी की मौत, खा लिए थे क्विंटल भर तरबूज
Elephant chanchal: एमपी के जबलपुर में 'चंचल' नाम की हथनी नहीं रही। छतरपुर से करीब ढाई महीने पहले बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री कर कार्यक्रम में उसे ऑर्डर पर बुलाया गया था। उसी दौरान उसकी हालत इतनी बिगड़ी कि कई डाक्टरों की टीम को इलाज करने जुटना पड़ा। लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
इलाज के वक्त जांच में चंचल को यूरिनरी इंफेक्शन बताया गया था। डॉक्टरों ने महावत को यही रखकर चंचल के इलाज की सलाह दी थी। बीच में उसकी हालत कुछ सुधार भी देखा गया, लेकिन दो-चार दिन पहले फिर असामान्य नजर आने लगी थी।
चंचल का इलाज करने वाले चिकित्सकों ने बताया कि हालात में सुधार तो हो रहा था लेकिन कमजोरी बनी हुई थी। रोजाना लगभग 30 से 35 लीटर ग्लूकोज का सेवन कराया जा रहा था। भीषण गर्मी और सेहत के मद्देनजर वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट ने चंचल को तरबूज खिलाने की महावत को सलाह दी।

लेकिन महावत और उसके साथियों ने चंचल को थोक के भाव तरबूज खिलाने शुरू कर दिया। दिन भर में करीब क्विंटल भर तरबूज खिला दिए। जिसके बाद चंचल को लूज मोशन समेत अन्य समस्याएं बढ़ गई। रिकवरी के लिए तमाम प्रयास किए गए, लेकिन बचाया नहीं जा सका।
दरअसल मार्च के आखिरी सप्ताह में जबलपुर के पनागर में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा का आयोजन हुआ था। जिसमें आयोजकों ने छतरपुर के महावत गोविंद को हथनी लाने का ऑर्डर दिया। हथनी का नाम चंचल है। जिसे वह आयोजन स्थल पर लेकर पहुंचा था।
आयोजन के वक्त भी जबलपुर में तपन भरी गर्मी का अहसास हो रहा था। हालांकि हफ्ते भर चली पंडित जी कथा शाम चार बजे शुरू होती थी। लेकिन छतरपुर से जबलपुर तक लंबी दूरी तय करके आना-जाना और भीड़-भाड़ में चंचल नाम की हथनी की तबियत बिगड़ गई थी।
महावत गोविंद ने बताया कि आयोजन के वक्त ही चंचल कुछ असामान्य रही। अपने स्तर पर महावत इलाज करता रहा लेकिन चंचल की हालत में सुधार नहीं हुआ। एक हफ्ते पहले जब उसकी तबियत और बिगड़ी तो उसे स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ के चिकित्सकों ने उचित इलाज की सलाह दी थी।












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