Bageshwar Dham धीरेंद्र शास्त्री की बालाघाट में कथा, हाई कोर्ट में अनुमति संबंधी याचिका पर क्या हुआ? जानिए
सुर्खियों में रहने वाले बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की बालाघाट जिले में होने वाली कथा के खिलाफ दायर याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।

Bageshwar Dham Dhirendra Shastri's katha: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के परसवाड़ा में अब बिना किसी विघ्न-बाधा के बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा हो सकेगी। आयोजन की अनुमति को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दी है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रहलाद चौधरी ने बताया कि मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष दिनेश कुमार धुर्वे के द्वारा जनहित याचिका दायर की गई थी। जिसमें पेसा एक्ट का हवाला देते हुए आदिवासियों का हित प्रभावित होने की संभावना जताई थी।
याचिका में बताया गया कि सरकार के पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं से अनुमति लेने का अधिकार प्रदत्त है। लेकिन 23-24 मई को धीरेंद्र शास्त्री की होने वाली कथा आयोजन के लिए ग्राम सभा से कोई अनुमति नहीं ली गई। जबकि लाखों लोगों की भीड़ जुटने की संभावना हैं।
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि ऐसे आयोजनों में ग्राम सभा की अनुमति आवश्यक नहीं है। शासन-प्रशासन ने कानून व्यवस्था के हर बिंदु पर विचार करने के बाद आयोजन को इजाजत दी गई हैं। लिहाजा शुरूआती तौर पर यह याचिका जनहित कम बल्कि प्रायोजित ज्यादा प्रतीत होती है।

इस मामले में याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की ग्रीष्म अवकाशकालीन एकलपीठ ने तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका में ऐसे कोई ठोस तथ्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि धीरेंद्र शास्त्री की कथा से आदिवासियों का हित प्रभावित होगा। याचिका में शामिल तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका निरस्त कर दी।
आपको बता दें कि बालाघाट में धीरेंद्र शास्त्री के आयोजन को लेकर बीते कुछ दिनों पहले भी अनुमति और प्रशासन की व्यवस्थाओं को लेकर बहस हो चुकी। स्थानीय कुछ लोगों ने यह आपत्ति भी जताई थी कि आयोजन निजी है, लेकिन भक्तों के दातून-शौचालय की व्यवस्था से लेकर कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी शासकीय अधिकारियों को सौंपी गई। कलेक्टर का आदेश भी वायरल हुआ।












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