जो मारियुपोल हारेगा, वो युद्ध हारेगा, जानिए क्यों यूक्रेन जंग हारेगा, लेकिन आजोव रेजिमेंट अमर हो जाएगा?
मारियुपोल शहर को बचाने के लिए अपना सर्वस्व झोंक देने के बाद भी यूक्रेनी सैनिक अब इस शहर में फंस गये हैं और उनके लिए जीत अब मुमकिन नहीं है, क्योंकि स्थिति ऐसी बन चुकी है, कि उनतक मदद नहीं पहुंचाई जा सकती है।
कीव, अप्रैल 20: यूक्रेन के दक्षिण में स्थिति मारियुपोल शहर अब चंद घंटों की लड़ाई के बाद रूस के नियंत्रण में जा सकता है, लेकिन अभी भी आखिरी लड़ाई बाकी है। यूक्रेनी सैनिकों को अल्टीमेटम दिया जा चुका है, कि अगर वो सरेंडर करते हैं, तो उनकी जान बख्श दी जाएगी। लेकिन, यूक्रेन ने साफ कहा है, मरते दम तक लड़ेंगे। तो आखिरी ऐसी क्या बात है, कि मारियुपोल को लेकर ना ही रूस एक कदम पीछे हटना चाहता है और ना ही यूक्रेन टस से मस होना चाहता है? मारियुपोल को लेकर अमेरिका भी परेशान क्यों है? और अगर मारियुपोल शहर रूस के पूर्ण नियंत्रण में चला जाएगा तो क्या होगा? आइये जानते हैं, कि मारियुपोल में रूस अगर जीत भी जाता है, तो फिर वो क्यों हारा हुआ ही माना जाएगा?

मारियुपोल में तबाही की लड़ाई
मारियुपोल पर अंतिम विजय पताखा फहराना अभी रूस के लिए बाकी है और खंडहर में तब्दील हो चुके मारियुपोल शहर में जब तक रूसी सैनिक एक बर्बाद हो चुके औद्योगिक इलाके को पार नहीं कर लेते हैं, वो मारियुपोल की जंग में विजेता नहीं माने जाएंगे। यानि, अभी अंतिम लड़ाई बाकी है। अजोव सागर के किनारे बसे मारियुपोल शहर के यूक्रेनी रक्षकों ने रूस के सामने हथियार डालने से इनकार कर दिया है और साफ कहा है, जान जाने के बाद भी हाथों से हथियार गिरेंगे। मारियुपोल शहर की स्थिति ये है, कि रूस को भीषण मुंहतोड़ जवाब देने के बाद भी यूक्रेनी सैनिकों के लिए जीत मुश्किल नजर आ रहा है और कई चश्मदीद जर्मनिस्टों ने लिखा है, कि मारियुपोल में युद्ध नारकीय है और ऐसा युद्ध जर्मनी की हिटलर सेना की वजह से ही शायद आखिरी बार लड़ी गई होगी।

क्यों हार के कगार पर है यूक्रेन?
मारियुपोल शहर को बचाने के लिए अपना सर्वस्व झोंक देने के बाद भी यूक्रेनी सैनिक अब इस शहर में फंस गये हैं और उनके लिए जीत अब मुमकिन नहीं है, क्योंकि स्थिति ऐसी बन चुकी है, कि उनतक मदद नहीं पहुंचाई जा सकती है। मारियुपोल के बाहर मौजूद यूक्रेनी सेना कोई भी मोबाइल ऑपरेशन चलाने में सक्षम नहीं है, जो यूक्रेनी सेना की कमजोर स्थिति और कमियों की तरफ इशारा करता है, लेकिन मारियुपोल में मौजूद कुछ सौ यूक्रेनी सैनिक जब तक जिंदा है, इस शहर पर रूस का कब्जा नहीं माना जाएगा। इसीलिए रूस बार बार आखिरी अल्टीमेटम दे रहा है।

कमजोड़ पड़ गई है यूक्रेनी सेना
कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि, डोनबास क्षेत्र में निर्णायक लड़ाई के लिए कीव अपनी प्रमुख मोबाइल इकाइयों को बचाकर रखे हुआ है, क्योंकि पूर्वी यूक्रेन में रूस के 40 हजार से ज्यादा सैनिक भारी तोपखाने के साथ मौजूद है और अभी तक पूर्वी यूक्रेन में तबाही मचाने वाली लड़ाई शुरू नहीं हुई है। वहीं, यूक्रेन अब अच्छी तरह से जान गया है, कि रूसी वायुसेना और रूसी थल सेना के आगे मारियुपोल शहर में ज्यादा देर तक टिक नहीं सकता है और लंबे वक्त कर लड़ाई नहीं कर सकता है।
Recommended Video

रूस की क्षमता पर भी सवाल
यूक्रेन के लिए मारियुपोल शहर को बचाने की ये लड़ाई काफी कठिन तो थी है, लेकिन असली सवाल रूसी सैनिकों पर उठ रहे हैं, जिनके पास लाखों की फौज और एक पर एक एडवांस हथियार होते हुए भी... युद्ध के सात हफ्ते बीत जाने के बाद भी वो मारियुपोल शहर पर नियंत्रण स्थापित नहीं कर पाए। मारियुपोल के रक्षकों के लिए ये एक नाउम्मीद लड़ाई शुरू से ही रही है और उनकी जिंदगी का सूरज अब डूब रहा है, ये यूक्रेन के लिए एक दुखभरी सच्चाई है, लेकिन कुछ सौ सैनिकों के प्रतिरोध के आगे रूसी सैनिक बेबस हुए हैं औऱ आखिरी चेकपोस्ट को पार करने के लिए उन्हें नाको चने चबाने पड़ रहे हैं, ये भी एक तल्ख हकीकत है, जो रूस की सैन्य क्षमताओं पर गंभीर सवाल उठाते हैं।

मारियुपोल के असल हालात क्या हैं?
मारियुपोल शहर पर रूस किसी भी हाल में कब्जा करना चाहता है, क्योंकि मारियुपोल ही एकमात्र ऐसा शहर है, जिससे यूक्रेन समुद्र से जुड़ा है, लिहाजा रूस यूक्रेन को समुद्री रास्ते से काटकर अलग कर देना चाहता है, लिहाजा रूसी सैनिकों ने चारों तरफ से मारियुपोल शहर की खतरनाक घेराबंदी कर रखी है और शहर में मौजूद करीब एक लाख लोगों के पास ना खाने को कुछ बचा है और ना ही पीने को पानी। मारियुपोल शहर को 70 प्रतिशत से ज्यादा बर्बाद किया जा चुका है और उसके बंदरगाहों को रूसी सेना नष्ट कर चुकी है और यही कारण है कि युद्ध का अब तक का सबसे भीषण मुकाबला मारियुपोल में ही हुआ है। मारियुपोल में यूक्रेनी सेना इतना तगड़ा प्रतिरोध देगी, इसका अहसास रूस को नहीं था और इसी वजह से रूस ने राजधानी कीव की लड़ाई शुरू नहीं की।

क्यों विकलांग हो जाएगा यूक्रेन?
अगर यूक्रेन के हाथों से मारियुपोल शहर का नियंत्रण चला जाता है, तो वो हमेशा के लिए विकलांग हो जाएगा। क्योंकि, मारियुपोल शहर रणनीतिक और राजनीतिक दोनों कारणों से यकीनन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। रणनीतिक रूप से, यह पूर्व-पश्चिम भूमि गलियारे पर एक केंद्रीय नोड है जो क्रीमिया को रूस से जोड़ता है, जिसपर रूस ने 2014 में कब्जा किया था। वहीं, मारियुपोल में पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र तक पहुंचने और वहां तक मिलिट्री सामान पहुंचाने के लिए भी रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है और अगर रूस मारियुपोल पर कब्जा कर लेता है, तो पूर्वी यूक्रेन की लड़ाई उसके लिए काफी ज्यादा आसान हो जाएगा, क्योंकि फिर वो काफी आसानी से पूर्वी यूक्रेन में लड़ाई लड़ रहे अपने सैनिकों तक खाद्य और मिलिट्री सामान पहुंच पाएगा। राजनीतिक रूप से, यह अति-राष्ट्रवादी आजोव रेजिमेंट का घरेलू आधार है, जो भीषण लड़ाई लड़ने में माहिर है और इसी आजोव रेजिमेंट ने साल 2014 में रूसी अलगाववादियों को शहर पर नियंत्रण नहीं करने दिया था।

आजोव रेजिमेंट हो जाएगा अमर!
मारियुपोल शहर में आजोव रेजिमेंट का आधार है, तो इस शहर की रक्षा के लिए यूक्रेनी नेशनल गार्ड के जवान भी हमेशा मुस्तैद रहते हैं और 2014 के जंग में आजोव ने लुगांस्क और डोनेट्स्क में अलगाववादियों के खिलाफ प्रभावी ढंग से लड़ाई लड़ी थी, जबकि इस शहर के नागरिक और युवा लगातार यूक्रेन में साइंस और टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाते हैं। आजोव विवादास्पद रूप से वैश्विक श्वेत वर्चस्व आंदोलन का प्रतीक बनते हैं और इनके रैंकों में धूर-दक्षिणपंथी और नाजी-शैली के प्रतीक चिन्ह शामिल हैं। मारियुपोल में तैनात आजोव रेजिमेंट ने इतनी ज्यादा बहादुरी से लड़ाई लड़ी है, कि पूरा यूक्रेन उनपर गर्व कर रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया काफी हद तक इसकी संदिग्ध पृष्ठभूमि की अनदेखी कर रहा है और इसकी प्रभावशाली युद्ध क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

हिटलर की विचारधारा से प्रभावित
आजोव रेजिमेंट की पहचान नाजी है और रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन युद्ध शुरू करने से पहले ऐलान किया था, कि वो यूक्रेन में नाजियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू कर रहे हैं, लिहाजा मारियुपोल की जंग अब एक तरह से नाजी बनाम रूसी सैनिकों के बीच हो गया है और आजोव रेजिमेंट जब हारेगा, तो पुतिन उसे अपनी सबसे बड़ी जीत कहकर प्रचारित करेंगे। आजोव सैनिकों जर्मनी के हिटलर सैनिकों के विचारधारा से प्रभावित हैं और उनके शरीर पर नाजी टैटू बने होते हैं। इन सैनिकों में कई सैनिक विदेशों से भी भाड़े पर लड़ने आए हुए हैं। 24 फरवरी को लड़ाई शुरू होने के बाद आजोव रेजिमेंट के लड़ाकों ने पिछले दो महीने से शहर को बचा रखा है, लेकिन अब वो 11 किलोमीटर के दायरे में स्थिति अज़ोवस्टल स्टील प्लांट क्षेत्र में सिमट गये हैं, लेकिन यहां से ही उन्होंने रूसी सैनिकों के खिलाफ मोर्चा संभाल रखा है। अब ये तय है... कि ये लड़ाई कुछ घंटों की है और रूस किसी भी तरह से आजोव रेजिमेंट को खत्म कर देगा... लेकिन, जब भी मारियुपोल की लड़ाई का जिक्र होगा, आजोव रेजिमेंट के बगैर नहीं होगा।












Click it and Unblock the Notifications