पुतिन को सत्ता से हटाना नहीं, खुद की जान बचाना... तो वैगनर चीफ ने जानबूझकर लिया राष्ट्रपति से पंगा?
23 जून को वैगनर चीफ येवगेनी प्रिगोजिन ने अपने ही देश के खिलाफ एक सशस्त्र अभियान शुरू करने की घोषणा की। प्रिगोजिन ने ऐलान किया वह रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु को गिरफ्तार करेगा और उन पर कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के लिए मुकदमा चलाएगा।
चीफ के इस ऐलान के कुछ ही घंटों की भीतर दुनिया की सबसे बड़ी निजी आर्मी वैगनर के लड़ाके पूर्वी यूक्रेन छोड़ मास्को फतह करने के लिए निकल पड़े।

कुछ ही समय बाद हमें सोशल मीडिया पर रूसी सेना के जवान 1,100 मील लंबे M-4 हाइवे जो ब्लैक सी को मॉस्को से जोड़ता है, पर बने पुल को तोड़ते या उन्हें रोकने की अन्य कोशिश करते देखे गए।
पुतिन भयंकर उग्र हो गए। उन्होंने चेतावनी दी कि देश के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व करने वालों और उनका अनुसरण करने वालों को गद्दार माना जाएगा। इस बीच, मॉस्को से कई वीज़ा-मुक्त अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानों के टिकट कुछ ही घंटों में बिक गए, क्योंकि मस्कोवियों को गृहयुद्ध का डर सताने लगा था।
पूरी दुनिया में मची सनसनी के बीच अचानक ही सब थम गया। वैगनर चीफ ने विद्रोह रोकने का ऐलान किया। रूस में तख्तापलट की साजिश को नाकाम होने में मात्र 24 घंटे लगे। वैगनर चीफ जिसने मॉस्को तक पहुंचने की कसम खाई थी वह उल्टे बेलारूस निकल पड़ा।
वैगनर चीफ येवगेनी प्रिगोजिन के अचानक बदले फैसले से पूरी दुनिया हैरान रह गई। जिन लोगों को रविवार दोपहर तक मॉस्को में रूसी सेना और वैगनर लड़ाकों के बीच गोलीबारी देखने की उम्मीद की थी, उनका सपना अधूरा रह गया। यहां तक कि वैगनर चीफ के अपने कुछ सैनिकों ने सोशल मीडिया पर खुले तौर पर अपने पूर्व नेता पर विश्वासघात का आरोप लगाया और बदला लेने की कसम खाई।
पहली नजर में भले ही वैगनर चीफ के (तख्तापलट की कोशिश करना और 24 घंटे में ही अपने कदम पीछे खींच लेना) फैसले से लगता है कि उसका फैसला हड़बड़ी और बिना सोचे समझे लिया गया था। लेकिन कई विश्लेषक मान रहे हैं कि येवगेनी प्रिगोजिन ने यह फैसला लंबे समय की मंत्रणा के बाद बेहद सोच समझ कर लिया था।
वैगनर चीफ की रूसी रक्षा मंत्रालय से अदावत काफी समय से चल रही थी। प्रिगोजिन पहले से इन बात से निराश था कि मंत्रालय की कमान एक बाहरी व्यक्ति की हाथ में है जिसके पास सैन्य अनुभव तक नहीं है। वैगनर चीफ युद्ध शुरू होने के 2 सप्ताह बाद से ही रूसी नेतृत्व की आलोचना करने लगा था।
इस बीच रूसी सेना को खारकीव, लीमन, खेरसोन में बहुत कुछ सफलता हासिल नहीं कर पाई। उधर वैगनर ग्रुप ने सोलेदार और बाखमुत को जीत लिया था। वैगनर आर्मी के कुछ अभियान में मिली कामयाबी से बॉस प्रिगोजिन और दुस्साहसी हो गया। वह खुलकर रूसी रक्षा मंत्री की आलोचना करने लगा।
इधर प्रिगोजिन आर्मी के बढ़ते विजयरथ से प्रिगोजिन रूसी राष्ट्वादी जनता के बीच और लोकप्रिय हो रहा था। अब...अपने रसोइये को इतनी तेजी से आगे बढ़ते देख पुतिन चौकन्ना हो गए। उसका भरोसेमंद और विश्वासपात्र पिग्रोजिन रूसी जनता के बीच काफी प्रभावशाली हो रहा था।
एक तानाशाह को सबसे अधिक डर अपने साथी की बढ़ती लोकप्रियता से होता है। पुतिन ने वैगनर को रोकने के उद्देश्य से ठोस कदम उठाना शुरू कर दिया।
बाखमुत शहर पर कब्जे के बाद वैगनर आर्मी को कोई खास जिम्मेदारी नहीं दी गई। इसके बाद वैगनर ग्रुप के लड़ाकों को रूसी सेना में शामिल कराने के कॉन्टैक्ट पर साइन कराने का नियम बना दिया गया। और तो और वैगनर ग्रुप को बुनियादी चीजों जैसे गोला-बारूद, कपड़े, स्वास्थ्य उपकरण, हेलमेट, भोजन तक की पहुंच सीमित कर दिया गया।
प्रिगोजिन को अहसास हो गया कि रक्षा मंत्रालय ने उसे एक संगठन के रूप में समाप्त करने का फैसला ले लिया है। इसके बाद वह रूसी रक्षा मंत्री की खुलकर आलोचना करने लगा। उसने बकायदा वीडियो बनाकर मंत्री पर अपनी भड़ास निकाली।
इसके बाद पुतिन ने बेलगोरोद पर यूक्रेन के हमले से लड़ने के लिए वैगनर ग्रुप के बजाय चेचन आर्मी को काम पर लगा दिया तो प्रिगोजिन समझ गया कि उसके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है। उसे यह पता चल गया था कि उन्हें किसी भी वक्त मरवाया जा सकता है।
प्रिगोजिन की मुखर आलोचना से रूस के शीर्ष नेतृत्व के कान पर जूं नहीं रेंग रहे थे। ऐसे में खुद का अस्तित्व बनाए रखने के लिए एक हताश प्रयास में प्रिगोजिन ने ये खतरनाक जुआ खेलने का निर्णय लिया। सच कहा जाए तो वैगनर और उसके कमांडर इतने मासूम नहीं हैं।
मॉस्को जाते समय, वे हवाई हमलों के खतरों से पूरी तरह परिचित थे। वे जानते थे कि रूसी सेना के हवाई अभियान के सामने वे घंटे भर भी नहीं ठहर सकते।
इसी बीच 24 जून को रूसी राष्ट्रपति के टेलीविजन संबोधन ने यह साफ कर दिया कि वे काफिले को मॉस्को पहुंचने से रोकने के लिए जो कुछ भी करना होगा वह करेंगे, जिसमें विद्रोहियों पर खतरनाक हथियारों से हमला करना भी शामिल है।
ऐसे में वैगनर चीफ के पास एक ही विकल्प बचा- भाग जाना। इसी बीच बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको एक समझौते के तहत उनके पास पहुंचे और उन्हें उनके विद्रोह को समाप्त करने के बदले में उन्हें माफी और शरण देने का वादा किया। वैगनर चीफ ने इसे हाथों-हाथ लिया।
सबसे पहले तो वैगनर चीफ के बेलारूस में राजनीतिक शरण लेने का अर्थ ये है कि वह कभी भी पश्चिमी देशों की पकड़ में नहीं आ पाएगा। क्योंकि वैगनर चीफ पर जितने गंभीर आरोप हैं यदि वे किसी और देश में पाया जाता तो पश्चिमी देश उसे गिरफ्तार करने में जी-जान लगा देते।
हालांकि इस घटना ने जिस तरह से रूसियों को सदमे में डाला है इसे कम करके आंकना असंभव है। यहां तक कि पुतिन के सबसे मजबूत समर्थक भी निराश और आश्चर्यचकित हैं कि जिस व्यक्ति को वे मातृभूमि का गद्दार मानते हैं, उसे भागने की अनुमति दी गई, अनिवार्य रूप से बिना सजा के।
अंत में, पुतिन अब स्वयं उस गहन संकट से पूरी तरह परिचित हैं जो उन्होंने यूक्रेन पर आक्रमण शुरू करने का निर्णय लेकर अपने देश पर थोपा है। निःसंदेह, अगर मिस्टर पुतिन का बस चले तो वह घड़ी को पीछे कर देंगे। वक्त का रुख बदल देंगे। लेकिन दुर्भाग्य से वह ऐसा नहीं कर सकते। अब दुनिया रूस में होने वाली अज्ञात घटनाओं को देखने के लिए तैयार है क्योंकि कोई भी नहीं जानता कि मॉस्को में अब क्या होने वाला है।
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