Yalda Hakim: पाकिस्तान के मंत्रियों की टीवी पर बैंड बजाने वाली अफगानी पत्रकार 'याल्दा हकीम' बारे में जानिए सब
Yalda Hakim: पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार को स्काई न्यूज़ के साथ लाइव इंटरव्यूू में बेइज्जती झेलनी पड़ी थी, जब अफ़गानी मूल की पत्रकार यल्दा हकीम ने पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को कथित समर्थन दिए जाने के बारे में उनसे सवाल किए। ऐसा ही बेइज्जत याल्दा हकीम से लाइव बातचीत के दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को होना पड़ा था, जब याल्दा के सवाल के जवाब में उन्होंने माना था कि पाकिस्तान आर्मी और सरकार 30 साल तक आतंकवाद को पालते रहे हैं। यह बातचीत भारत के "ऑपरेशन सिंदूर" द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद हुई थी। तब से कई लोग याल्दा हकीम के बारे में सर्च कर रहे हैं और जानना चाहते हैं कि कैसे एक अफगानी मूल की महिला इतनी बड़ी पत्रकार बनी।
काबुल में पैदा हुईं, ऑस्ट्रेलिया में पढ़ीं याल्दा
यल्दा हकीम अफगानिस्तानी मूल की एक की पत्रकार हैं जो अपने तीखे इंटरव्यू और इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं। 26 जून 1983 को अफगानिस्तान के काबुल में जन्मी याल्दा का परिवार अफ़गानिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के कारण अफिगानिस्तान छोड़कर ऑस्ट्रेलिया में शरण ले ली। याल्दा ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में पली-बड़ी हैं। बाद में वे नौकरी करने के लिए वह लंदन शिफ्ट हो गईं। याल्दा वर्तमान में स्काई न्यूज़ के 'द वर्ल्ड विद याल्दा हकीम' प्रोग्राम को होस्ट करती हैं। इससे पहले, उन्होंने बीबीसी के साथ भी काम किया है, वहां पर वे 'इम्पैक्ट विद याल्दा हकीम' प्रोग्राम को होस्ट करती थीं। याल्दा ने अफ़गानिस्तान, सीरिया, इराक, यमन, यूक्रेन और पाकिस्तान जैसे सेसंटिव इलाकों में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

मानव तस्करों की मदद से याल्दा के परिवार ने छोड़ा था काबुल
आर्ट गैलरी ऑफ NSW को दिए अपने एक इंटरव्यू में याल्दा हकीम बताती हैं कि वे 6 महीने की थीं, जब उनके माता-पिता ने अफगानिस्तान छोड़ने का फैसला लिया। उनके पिता चेकोस्लोवाकिया में पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन जब वे वापस अफ्गानिस्तान लौटे तो उन्होंने देखा कि उनका देश अफगान-सोवियत युद्ध की जद में हैं। कुछ समय तक उनके पिता ने अफगानिस्तान की आर्मी में भी सेवाएं दीं लेकिन फिर हालात और खराब होते चले गए। 1984 में उनके पिता ने अफगानिस्तान छोड़ने की ठान ली और वे मानव तस्करों की मदद से अपने परिवार को लेकर पाकिस्तान पहुंचे। यहां दो साल रहने के बाद वे शरणार्थी के तौर पर ऑस्ट्रेलिया चले गए।
याल्दा की पढ़ाई-लिखाई?
याल्दा हकीम ने 2002 से 2004 तक मैक्वेरी यूनिवर्सिटी में मीडिया फील्ड में ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद उन्होंने 2005 में सिडनी के मेक्ले कॉलेज जर्नलिज्म में डिप्लोमा लिया। साथ ही साल 2007 से 2009 तक मोनाश विश्वविद्याल में आर्ट में डिस्टेंस ग्रेजुएशन किया। इसके अलावा याल्दा ने स्पेशल ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज में कैडेटशिप भी हासिल की है।
इन बड़े चेहरों के इंटरव्यू ले चुकी हैं याल्दा
अगर याल्दा के इंटरव्यू की बात करें तो वे शबाना आजमी से लेकर, अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, मलाला यूसुफजई और कई पाकिस्तानी मंत्रियों समेत याल्दा कई दिग्गजों का इंटरव्यू ले चुकी हैं।
भारत में क्यों हुई याल्दा की चर्चा?
अपने तीखे साक्षात्कारों के लिए मशहूर यल्दा हकीम और पाकिस्तान की सरकार में मंत्री अताउल्लाह तरार का इंटरव्यू वायरल हुआ। जिसमें तरार कह रहे थे कि पाकिस्तान में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। हकीम ने तरार के बयानों का तुरंत खंडन करते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के इंटरवंयू का हवाला देते हुए उन निशब्द कर दिया। इसके अलावा, याल्दा ने इसी तरह के मुद्दों पर पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के भी पुराने बयान याद दिलाए। जिससे तरार से जवाब देते ना बना। तब से ही याल्दा हकीम की चर्चा भारत में हो रही है।
आप याल्दा हकीम के बारे में क्या राय रखते हैं, हमें कॉमेंट में जरूर बताएं।












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