जिनपिंग की तरह आजीवन राज का मंसूबा पाले राष्ट्राध्यक्षों का क्या हुआ हाल, खास रिपोर्ट?
शी जिनपिंग इसके साथ ही चीन के पिछले एक दशक में सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति बन गए हैं और माना जा रहा है कि वह कम से कम साल 2023 तक सत्ता पर काबिज रहेंगे।एक नजर डालिए दुनिया के कुछ ऐसे ही नेताओं पर जो जिनपिंग से पहले असीमित समय तक शासन करने के मन से सत्ता में आए थे।
बीजिंग। शनिवार को दूसरे कार्यकाल के लिए जैसे ही शी जिनपिंग को चुना गया तो उस चुनाव के साथ ही जिनपिंग को चीन पर पूरी जिंदगी शासन करने की ताकत भी मिल गई। पिछले हफ्ते ही चीन के संविधान में संशोधन करके यहां पर राष्ट्रपति के कार्यकाल की सीमा को दो वर्ष से बढ़ाकर असीमित कर दिया गया था। शी जिनपिंग इसके साथ ही चीन के पिछले एक दशक में सबसे शक्तिशाली राष्ट्रपति बन गए हैं और माना जा रहा है कि वह कम से कम साल 2023 तक सत्ता पर काबिज रहेंगे।एक नजर डालिए दुनिया के कुछ ऐसे ही नेताओं पर जो जिनपिंग से पहले असीमित समय तक शासन करने के मन से सत्ता में आए थे। यह भी पढ़ेंं-मिथुन राशि वाले चीन के आजीवन राष्ट्रपति Xi Jinping के बारे में जानिए सब कुछ

1945 से बरकरार है ऐसा ट्रेंड
डबलिन सिटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एलेक्स बातूरो कहते हैं कि साल 1945 से ही दुनिया में ऐसा ट्रेंड देखने को मिल रहा है जहां पर दुनिया के 92 नेताओं ने अपना कार्यकाल आगे बढ़ाया है। वहीं जिनपिंग की तरह राष्ट्रपति का टाइटल रखने वाले नेताओं ने औसतन 8 वर्ष ही शासन किया लेकिन जिन नेताओं ने अपना कार्यकाल बढ़ाया उन्होंने औसतन 15.1 वर्ष तक शासन किया। चीन में भले ही यह पहली बार हुआ हो पर दुनिया के कई देशों में ऐसा हो चुका है जहां पर राष्ट्राध्यक्ष ने संविधान में संशोधन करके असीमित समय तक शासन करने का मन बनाया था लेकिन उनका सपना कभी पूरा नहीं हो सका।

ह्यूगो शावेज
वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज को पांच वर्ष के लिए चुना गया था। उन्होंने पहले संविधान में संशोधन करके राष्ट्रपति के कार्यकाल को पांच वर्ष से बढ़ाकर छह वर्ष का किया और इसके बाद दोगुना यानी 12 वर्ष का कर दिया। साल 2009 में जनमत संग्रह हुआ और फिर से राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का हो गया।

ओमार बोंगो
अफ्रीकी देश गाबोन में ओमार बोंगो ने करीब 42 वर्ष तक देश पर शासन किया। साल 1991 में यहां पर कार्यकाल की सीमा तय की गई थी लेकिन बाद में कार्यकाल को बढ़ाया गया और फिर सीमा खत्म कर दी गई।

फेरदिनाद मारकोस
मारकोस को लोकतांत्रित तरीके से फिलीपींस का राष्ट्रपति चुना गया था लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल को तीन बार से से भी ज्यादा बार बढ़ाया था। उन्होंने साल 1965 से 1986 तक फिलीपींस पर राज किया था। साल 1972 से 1986 तक फिलीपींस में मिलिट्री शासन रहा और मारकोस ने बतौर तानाशाह फिलीपींस पर शासन किया था।

माओत्से तुंग
चीन में माओत्से तुंग ने तब तक राज किया जब तक कि उन्हें सत्ता से बाहर नहीं निकाल दिया गया। माओ के बाद चीन में डेंग जियाओपिंग का शासन शुरू हुआ और उन्होंने माओ जैसी तानाशाही को रोकने के लिए एक सिस्टम की शुरुआत की थी। डेंग ने राष्ट्रपति के कार्यकाल की सीमा शुरू की। उन्होंने ही इस प्रक्रिया की शुरुआत भी जहां पर राष्ट्रपति और उनके साथी दो वर्षों के कार्यकाल के अंदर ही उनके उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान करते थे। एक बार जब उत्तराधिकारी पद संभाल लेता तो पूर्व राष्ट्रपति को पार्टी में नए राष्ट्रपति पर नजर रखने के लिए एक मजबूत पद दे दिया जाता।

एलेक्जेंडर लुकाशेंको
बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको ने किसी भी तरह से कार्यकाल की सीमा को नहीं माना। उन्हें साल 1994 में राष्ट्रपति चुना गया था और वह आज भी सत्ता में हैं और अभी तक के इतिहास में बेलारूस के पहले राष्ट्रपति हैं। हालांकि उन्हें लगातार विरोधियों का सामना भी करना पड़ रहा है। वह यूरोप के आखिरी तानाशाह थे जिन्होंने करीब 20 वर्ष तक शासन किया था।

सुपरमुरात नियाजोव तुर्कमेनबाशी और ओमार अल बशीर
साल 1999 में सुपरमुरात को तुर्कमेनिस्तान के लिए आजीवन राष्ट्रपति घोषित किया गया था और वह साल 2006 तक सत्ता में थे। इसी तरह से सूडान के शासक ओमार अल बशीर ने अपना कार्यकाल तीन बार बढ़ाया है। साल 2017 में सूडान में राष्ट्रपति के कार्यकाल की समय-सीमा तय कर दी गई थी।

ईदी अमीन
ईदी अमीन युगांडा में सैन्य तख्तापलट के बाद राष्ट्रपति के तौर पर आए थे और उन्होंने आजीवन खुद को युगांडा के राष्ट्रपति घोषित कर दिया था।

फुलगेन्शियो बतिस्ता
इसी तरह से फुलगेन्शियो बतिस्ता को साल 1940 में क्यूबा का राष्ट्रपति चुना गया था और साल 1944 तक वह युगांडा के राष्ट्रपति रहे। बाद में अमेरिकी समर्थन से क्यूबा में तख्तापलट हुआ साल 1952 से 1959 तक उन्होंने बतौर तानाशाह राज किया। लेकिन जब क्यूबा में क्रांति हुई तो उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया गया।

कैसा रहा इनका शासन
जिन भी राष्ट्रपतियों ने खुद को आजीवन शासक घोषित किया या फिर संविधान में बदलाव करके कार्यकाल बढ़ाया उनमें से करीब 25 नेता ऐसे थ जिन्होंने छह से 10 वर्ष तक शासन किया। वहीं करीब 18 नेता ऐसे थे जिन्होंने 11 या इससे कुछ ज्यादा समय तक राज किया। पांच नेता ऐसे भी थे जिनका कार्यकाल एक सिर्फ एक वर्ष तक ही चला। ज्यादातर नेताओं का कार्यकाल तभी खत्म हुआ जब विद्रोह की शुरुआत हुई और उन्हें बाहर फेंक दिया गया।












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