WTO fish pact: डब्ल्यूटीओ में मछुआरों के मुद्दे पर भारत को बड़ा झटका, नई दिल्ली का प्रस्ताव दरकिनार
विश्व व्यापार संगठन में मत्य्स पालन सब्सिडी पर मसौदा समझौते ने गैर-विशिष्ट ईंधन सब्सिडी को समाप्त करने के लिए नई दिल्ली के प्रस्तावों को हटा दिया है।
जेनेवा, जून 12: विश्व व्यापार संगठन की बैठक में भारत को बड़ा झटका लगा है और डब्ल्यूएचओ मंत्रिस्तरीय बैठक में मत्स्य पालन सब्सिडी के मुद्दे पर भारत के प्रस्तावों को हटा दिया गया है। भारत ने काफी मजबूती के साथ मछुआरों के प्रस्ताव पर डब्ल्यूटीओ के सामने रखा था, लेकिन नई दिल्ली के प्रस्ताव को हटाकर भारत को बड़ा झटका दिया गया है।

भारत को बड़ा झटका
विश्व व्यापार संगठन में मत्य्स पालन सब्सिडी पर मसौदा समझौते ने गैर-विशिष्ट ईंधन सब्सिडी को समाप्त करने के लिए नई दिल्ली के प्रस्तावों को हटा दिया है। वहीं, उन प्रस्तावों को भी हटा दिया गया है, जो किसी विशेष उद्योग से लक्षित नहीं हैं, क्योंकि, अमेरिका और यूरोपीय संघ का मानना है कि, समुद्र में अवैध और अनियंत्रित तरीके से मछली को पकड़ा जाता है, लिहाजा ईंधन पर सब्सिडी नहीं दिया जाए, क्योंकि इससे अनियंत्रित मछली पकड़ने को बढ़ावा मिलेगा। जबकि, भारत और इंडोनेशिया जैसे देश मत्य्स पालन और समुद्री मछलियों को पकड़ने में लचीलापन चाहते थे।

भारत के प्रस्ताव में क्या था?
भारत का कहना था कि, विकासशील देश, जो दूरदराज के जलक्षेत्र में मछली पकड़ने में शामिल नहीं हैं, उन्हें आवश्यकता से अधिक मछली पकड़ने पर सब्सिडी प्रतिबंधों में कम से कम 25 सालों की छूट मिलनी चाहिए, लेकिन भारत के प्रस्ताव को दरकिनार कर दिया गया है। आपको बता दें कि, किसी देश के समुद्र तटों से 200 समुद्री मील से अधिक दूरी पर मछली पकड़ना दूर के जल में मछली पकड़ना कहलाता है। वहीं, डब्ल्यूटीओ मसौदा, भारत के प्रस्ताव के विपरीत विकासशील देशों के लिए सिर्फ सात साल की छूट की इजाजत देता है।

अपने प्रस्ताव पर कायम है भारत
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मसौदे को दरकिनार किए जाने को लेकर भारत के अधिकारियों ने कहा कि, भारत अपने रुख पर कायम रहेगा और रविवार से शुरू होने वाले मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में इसे उठाएगा। एक अधिकारी ने बताया कि, "गैर-विशिष्ट ईंधन सब्सिडी पर हमारे प्रस्ताव को हटा दिया गया है। यह निराशाजनक है लेकिन हम इस पर ध्यान देंगे और अपने रुख पर कायम रहेंगे'। आपको बता दें कि, भारत में मछुआरों को सब्सिडी दी जाती है। इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, भारत में मत्स्य पालन के लिए सब्सिडी में डीजल बिक्री टैक्स में छूट, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को वित्तीय सहायता, नए जाल और नावों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता, समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास के अलावा जीवन रक्षक जैकेट और नेविगेशन सिस्टम में भी मछुआरों को मदद दी जाती है।

डब्ल्यूटीओ के मसौदे में क्या है?
डब्ल्यूटीओ के मसौदे में कहा गया है कि, विकासशील देश गरीब, कमजोर, कम इनकम वाले और ऐसे मछुआरे, जिनके पास संसाधनों का अभाव है और जिनकी आजीविका कम है, उन्हें मछली पकड़ने में सब्सिडी तो दे सकते हैं, लेकिन सिर्फ 12 से 24 समुद्री मील तक ही उन्हें सब्सिडी हासिल है। लेकिन, इतनी सीमा रेखा के अंदर मछुआरे काफी कम मछली पकड़ पाते हैं, लिहाजा भारत समेत विकासशील देशों की मांग है, कि ये सीमा रखे बढ़ाई जाए और सब्सिडी को 25 सालों के लिए किया जाए। चार दिवसीय मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में इस पर भी चर्चा होगी।

जेनेवा में आज से 4 दिवसीय बैठक
विश्व व्यापार संगठन का 12वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC12) आज स्विट्जरलैंड के राजनयिक शहर जिनेवा में शुरू होगा। मूल रूप से कजाकिस्तान के नूर-सुल्तान में जून 2020 में आयोजित होने वाला था, लेकिन इसे महामारी के कारण दो बार स्थगित कर दिया गया। इसलिए, पहले से कहीं अधिक लंबित मुद्दे हैं। दुनिया भर के व्यापार मंत्री 12 से 15 जून के बीच विश्व व्यापार संगठन के मुख्यालय में इकट्ठा हो रहे हैं और164 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को कई अनसुलझे मुद्दों पर निर्णय लेना है, जिनमें मत्स्य पालन पर सब्सिडी, कोविड वैक्सीनेशन निर्माण और किसानों को दिए जाने वाला एमएसपी, सबसे अहम मुद्दों में शामिल है।












Click it and Unblock the Notifications