दुनिया में कहां-कहां उतरते हैं UFO, हो गया खुलासा, Aliens के लिए बहुत प्यारे हैं ये सब जगह!

1974 में स्थापित होने के बाद से अमेरिका के नेशनल यूएफओ रिपोर्टिंग सेंटर (एसआईसी) ने जो आंकड़े जारी किए हैं, वो काफी चौंकाने वाले हैं और रिपोर्ट में कहा गया है कि, उन्हों ये जानकारी पूरी दुनिया से जुटाई है।

वॉशिंगटन, जुलाई 30: दुनिया में अज्ञात रहस्यमयी वाहन, जिन्हें यूएफओ कहा जाता है, वो कहां कहां उतरते हैं और पिछले पांच दशकों में एलियंस के ये वाहन कितनी बार उतरे हैं, इसका खुलासा हो गया है और रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 50 सालों में दुनिया भर में 150,000 से अधिक यूएफओ देखे जाने की सूचना मिली है।

नेशनल यूएफओ रिपोर्टिंग सेंटर का दावा

नेशनल यूएफओ रिपोर्टिंग सेंटर का दावा

1974 में स्थापित होने के बाद से अमेरिका के नेशनल यूएफओ रिपोर्टिंग सेंटर (एसआईसी) ने जो आंकड़े जारी किए हैं, वो काफी चौंकाने वाले हैं और रिपोर्ट में कहा गया है कि, धरती पर एलियंस के वाहन देखे जाने की करीब डेढ़ लाख घटनाएं हुई हैं और ये आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। इसमें कहा गया है कि, अमेरिकी सरकार की जांच में पता चला है कि, एलियंस के वाहन देखे जाने की घटनाओं में 143 ऐसी घटनाएं हैं, जिन्हें अमेरिका की सेना ने अलग अलग मिशन और मिलिट्री ट्रेनिंग्स के दौरान देखे हैं। वहीं, अमेरिकी राज्य वाशिंगटन में प्रत्येक 100,000 निवासियों में से 88 ने यूएफओ देखने की सूचना दी है, जो दुनिया में किसी भी क्षेत्रीय आबादी का उच्चतम प्रतिशत है।

जुलाई में सबसे ज्यादा देखे जाते हैं यूएफओ

जुलाई में सबसे ज्यादा देखे जाते हैं यूएफओ

रिपोर्ट में कहा गया है कि, जुलाई महीने में सबसे ज्यादा बार यूएफओ देखे जाने की सूचना मिली है। इस रिपोर्ट में दुनियाभर में यूएफओ देखे जाने की घटनाओं को शामिल किया गया है, जिन्हें स्थानीय पुलिस, देशों की सेना, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, हवाई यातायात नियंत्रकों, संघीय उड्डयन प्रशासन और मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं से मान्यता मिली है। नेशनल यूएफओ रिपोर्टिंग सेंटर की वेबसाइट के मुताबिक, इसका प्राथमिक कार्य 'उन व्यक्तियों से रिपोर्ट प्राप्त करना, रिकॉर्ड करना और यथासंभव अधिक से अधिक संभव, पुष्टि करना और दस्तावेज करना है, जो असामान्य रूप से यूएफओ से संबंधित घटनाओं के साक्षी रहे हैं'। रिपोर्ट में कहा गया है कि, सेंटर के खुलने के बाद से केंद्र ने 150,000 से अधिक रिपोर्टों को नोट किया है और हजारों व्यक्तियों को इसकी जानकारी वितरित की है।

गोपनीय रखी जाती है जानकारियां

गोपनीय रखी जाती है जानकारियां

रिपोर्ट में कहा गया है कि, यूएफओ देखे जाने की घटना का अमेरिकी सेंटर स्वतंत्र तरीके से जांच करता है और फिर अपनी दीर्घकालिक नीति के तहत उन लोगों के नाम को गोपनीय रखता है, जिन्होंने एलियंस के वाहन देखे हैं और यही वजह से अमेरिका का नेशनल यूएफओ रिपोर्टिंग सेंटर दुनियाभर में यूएफओ की जांच करने वाला सबसे लोकप्रिय एजेंसी है और जिसने यूएफओ रिपोर्टिंग को काफी सुविधाजनक बनाने का काम किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, "केंद्र सरकार की नीतियों में से एक, जो इसके संचालन को अधिकांश अन्य यूएफओ संगठनों से अलग करती है, वह यह है किस यह अपने सभी डेटा को सारांश रूप में जनता के लिए उपलब्ध कराती है'। रिपोर्ट में कहा गया है कि, "विस्तृत जानकारी अनुभवी यूएफओ जांचकर्ताओं को उपलब्ध कराई जाती है।''

कैसे हुआ संख्या का खुलासा?

कैसे हुआ संख्या का खुलासा?

यूएफओ देखे जाने की संख्या का खुलासा तब हुआ जब अमेरिकी रक्षा प्रमुखों ने घोषणा की, कि वे रहस्यमयी वाहनों के देखे जाने को लेकर अपनी जांच को तेज कर रहे हैं, जिसमें वो ना सिर्फ आसमान से आने वाले रहस्यमयी वाहनों की जांच करेंगे, बल्कि ऐसे वाहनों की भी जांच की जाएगी, जो पानी से गुजरते हैं। ये जांचकर्ता यूएसओ, अज्ञात जलमग्न वस्तुओं और यूटीओ, या अज्ञात ट्रांसमीडियम ऑब्जेक्ट्स के देखे जाने की घटनाओं की भी जांच करेंगे, जो हवा में और पानी की लहरों के नीचे, दोनों जगहों पर काम करते हैं। साल 2004 में सैन्य कर्मियों द्वारा देखे गए रहस्यमय शिल्प की उत्पत्ति की जांच के लिए अमेरिका द्वारा एयरबोर्न ऑब्जेक्ट आइडेंटिफिकेशन एंड मैनेजमेंट ग्रुप की स्थापना की गई है और उसके गठन के आठ महीने बाद यूएफओ देखे जाने की कुल घटनाओं का खुलासा किया गया है।

जांच केन्द्र का नाम हुआ एएआरओ

जांच केन्द्र का नाम हुआ एएआरओ

रहस्यमयी और अज्ञात ऑब्जेक्ट्स को देखे जाने और उसकी जांच करने के लिए जिस बॉडी का गठन किया गया है, उसका नाम 'ऑल डोमेन एनोमॉली रिजोल्यूशन ऑफिस' यानि एएआरओ में बदल दिया गया है। वहीं, अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी रोनाल्ड एस मौल्ट्री ने कहा कि, यह परियोजना हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और हमारे सैन्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि, "हमें अपने विरोधियों द्वारा नोवेल टेक्नोलॉजी के विकास और रोजगार के साथ भी तालमेल रखना चाहिए।" आपको बता दें कि, इस साल की शुरुआत में अमेरिकी कांग्रेस ने आधी सदी से भी अधिक समय में यूएफओ पर अपनी पहली सुनवाई की थी। इसमें उस वीडियो की भी जांच की गई थी, जिसे अमेरिकी नेवी ने जुलाई 2019 में कैलिफोर्निया के समुद्री तट से यूएफओ को गुजरते हुए और फिर गायब हो जाते हुए रिकॉर्ड किया था। रक्षा प्रमुखों ने कहा कि, रिकॉर्ड किया गया फुटेज वास्तविक था और प्रौद्योगिकी के साथ एक रहस्य शिल्प दिखाया गया था जो सेना को ज्ञात किसी भी चीज़ से 1,000 साल बाद की टेक्नोलॉजी को दिखाता है।

एलियंस को लेकर अलग अलग सिद्धांत

एलियंस को लेकर अलग अलग सिद्धांत

एलियन के बारे में कहा जाता है, कि उनके पास काफी उन्नत टेक्नोलॉजी हो सकती है, ऐसे में सवाल ये उठते हैं, कि आखिर एलियंस कहां हैं और वो धरती को क्यों खोज नहीं पाए हैं? इस विचार को बाद में फर्मी पैराडॉग्स के नाम से जाना गया। और इस विचार ने वैज्ञानिकों को सोचने के लिए मजबूर किया, कि आखिर धरती तक एलियन क्यों नहीं पहुंच पाए हैं और धरती तक पहुंचने में उन्हें कौन रोक रहा है? पिछले दिनों दो वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च के आधार पर कहा था, कि, भले ही एलियन सभ्यता इंसानों के मुकाबले काफी ज्यादा उन्नत क्यों ना हो, फिर भी उनकी एक सीमा रेखा है और उनकी क्षमता पृथ्वी ग्रह को खोजने और यहां तक पहुंचने की नहीं है। उन्होंने कहा कि, उन्नत टेक्नोलॉजी होने के बाद भी उनकी क्षमता का विकास इस स्तर का नहीं हो पाया है, कि वो पृथ्वी तक पहुंच सके। उन्होंने कहा है, इंसानों की तरह ही एलियन की भी अनेक सभ्यताएं आती हैं और फिर खत्म हो जाती हैं, जैसा ही पृथ्वी पर होता है।

बिल क्लिंटन ने भेजे थे एजेंट्स

बिल क्लिंटन ने भेजे थे एजेंट्स

वहीं, पिछले महीने ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया था, कि जब वो राष्ट्रपति थे, उस दौरान उन्होंने एलियंस को पकड़ने के लिए एजेंट्स भेजे थे। बिल क्लिंटन ने अमेरिका के एलियन अभियान पर बड़ा खुलासा करते हुए जून में कहा था कि, उन्होंने एलियंस की खोज के लिए अमेरिकी सैनिकों को भेजा था। अमेरिका के बारे में पहले से ही दावे होते रहे हैं, कि अमेरिका ने एलियंस को पकड़ रखे हैं। इजरायली खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख भी दावा कर चुके हैं, कि अमेरिका ने एलियंस को पकड़ रखा है और 'एरिया 51' में रखा है। और अब बिल क्लिंटन ने कहा है कि, उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को एलियंस की तलाश में भेजा था।

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