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एलियंस की कहानी: सबसे पहले किसने देखे एलियंस और UFO ?

नई दिल्ली, 03 जुलाई। क्या दूसरे ग्रह के प्राणि (एलियन) का अस्तितव है ? क्या वे उड़न तश्तरी (यूएफओ) पर सवार हो कर धरती पर आते हैं ? कई वैज्ञानिक शोध और अनुसंधान के बाद भी इन सवालों का सही जवाब आज तक नहीं मिल सका है।

world mystery of aliens and UFOs know who first saw these

विख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का कहना है कि एलियंस हमारे पृथ्वी के आसपास हैं। वे हमारी गतिविधियों पर नजर भी रखे हुए हैं। हालांकि एलियंस और उड़न तश्तरी की चर्चा बहुत पुरानी है। लेकिन जब से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यूएफओ (अनआइडिन्टेफाइड प्लाइंग ऑब्जेक्ट) का वीडियो फुटेज देखने का दावा किया है तब से इसके अस्तित्व को लेकर नयी बहस शुरू हो गयी है। यूएफओ ऑर्गेनाइजेशन ने अभी तक उड़न तश्तरी देखे जाने की साढ़े बारह हजार घटनाओं को दर्ज किया है। पेंटागन के टास्क फोर्स का कहना है कि 2004 से अभी तक आसमान में 144 यूएफओ देखे गये हैं। लेकिन इनका संबंध दूसरे ग्रह से है कि नहीं, ये पता नहीं चल पाया है।

क्या अमेरिका का कोई गुप्त अभियान है ?

क्या अमेरिका का कोई गुप्त अभियान है ?

अमेरिकी मीडिया ने 2017 में एक बड़ा खुलासा किया था। इसके मुताबिक अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने एलियंस और यूएफओ की सत्यता का पता लगाने के लिए एक गुप्त रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया था। यह प्रोजेक्ट 2007 से 2012 तक चल। इस पर 20 मिलियन डॉलर (करीब एक अरब 28 करोड़ रुपये) खर्च किये गये। इस प्रोजेक्ट की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति समेत कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित थी। पांच साल के बाद इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया था। लेकिन अब ये बात सामने आयी है कि यह प्रोजेक्ट बंद नहीं हुआ है बल्कि इसे नये स्वरूप में अब भी जारी रख गया है। नेवी इंटेलिजेंस की मदद से इस नयी परियोजना का संचालन किया जा रहा है। इस अनुसंधान कार्यक्रम को अनआइडेन्टीफाइड एरियल फेनोमिना टास्क फोर्स का नाम दिया गया है।

पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने देखी है उड़न तश्तरी

पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने देखी है उड़न तश्तरी

हास्य अभिनेता, लेखक और निर्माता जेम्स कॉर्डन अमेरिकी टेलीविजन, सीबीएस पर एक टॉक शो (द लेट लेट शो बीथ जेम्स कॉर्डन) पेश करते हैं। बराक ओबामा 18 जून 2021 को जेम्स कॉर्डन के शो में मेहमान बन कर आये थे। कॉर्डन मजाकिया अंदाज में सवाल पूछने के लिए मशहूर हैं। जब उन्होंने यूएफओ (उड़न तश्तरी) के संबंध में सवाल किये तो ओबामा ने इसके बारे में कई चौंकाने वाली जानकारी दी। 2008 में अमेरिका के राष्ट्पति बनने के बाद उनके मन में एलियंस को जानने की जिज्ञाषा पैदा हुई। ओबामा ने इस टॉक शो कहा था, मैंने वीडियो में देखा कि कुछ उड़न तश्तरियां अमेरिका के मिलिट्री बेस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। उड़न तश्तरियों की गति अमेरिकी सैन्य उपकरणों से बहुत तेज है। यूएफओ के प्रमाण को लेकर चाहे जितनी भी दुविधा क्यों न हो, इनको गंभीरता से लिये जाने की जरूरत है। इसके बाद ओबामा ने एक दूसरे इंटव्यू में कहा था, अगर दूसरे ग्रह पर प्राणि हैं और हमसे अधिक विकसित और शक्तिशाली हैं, तो धरती के इंसानों को अपनी सुरक्षा को लेकर नयी तैयारी करनी होगी।

उड़न तश्तरियों का इतिहास

उड़न तश्तरियों का इतिहास

ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार चीन के खगोल वैज्ञानिकों ने ईसा पूर्व 410 में उड़न तश्तरी जैसी उड़ने वाली आकृतियों का जिक्र किया है। प्राचीन सभ्यताओं पर शोध करने वाले चर्चित लेखक एरिक वॉन डेनिकेन ने अपनी किताब 'चैरिऑट्स ऑफ गॉड' में एलियंस का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि प्राचीन मिस्र की धरती पर एलियंस आये थे। उन्होंने मिस्र के निवासियों को गिजा और पिरामिड बनाने के लिए औजार और ज्ञान दिया था। मध्यकाल में सबसे पहले 1561 में जर्मनी के नूरेबर्ग शहर के लोगों ने बड़े ग्लोब और अनोखी प्लेट जैसी चीज आसमान में देखी थी। उस समय के चित्रों में इस बात की जानकारी मिलती है। 1897 में अमेरिका के टेक्सास प्रांत में कुछ लोगों ने आसमान में सिगार के आकार की एक रहस्यमयी चीज देखी थी जो पवन चक्की की बड़ी-बड़ी घूमती हुई पंखियों से टकरा गयी थी। टेक्सास हिस्टोरिकल कमिशन को एक संकेत मिला था जिसमें जिक्र है कि 1897 में एक हवाई जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसके मलबे से एलियन जैसे मिलते जुलते प्राणि का शव निकाला गया था जिसे किसी अनजान जगह पर दफना दिया गया था। फिर जून 1947 में अमेरिक के केनेथ आर्नोल्ड ने विमान उड़ाते समय उड़न तश्तरियों को देखने का दावा किया। आर्नोल्ड जब उत्तरी अमेरिका की कास्केड पहाड़ियों के ऊपर से उड़ रहे थे तब उन्होंने देखा कि पहाड़ी की चोटियों से कुछ रहस्यमयी चीजें उड़ान भर रही हैं। वे बहुत ही तेज गति से उड़ीं और अचानक गायब हो गयीं। आधुनिक विश्व में उड़न तश्तरी देखने की यह पहली घटना मानी जाती है।

कैसे नाम पड़ा उड़न तश्तरी

कैसे नाम पड़ा उड़न तश्तरी

अनआइडेंटीफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट यानी यूएफओ का नाम उड़न तश्तरी कैसे पड़ा ? जब केनेथ आर्नोल्ड ने आसमान में उड़ती हुईं कुछ रहस्यमयी चीजें देखीं तो पूरे विश्व में तहलका मच गया। उन्हें रेडियो पर इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। आर्नोल्ड ने उन रहस्यमयी चीजों के बारे में बताया, उन्हें देख के ऐसा लगा जैसे किसी ने पानी की सतह पर कोई तश्तरी इतनी तेजी से फेंक दी कि वह जोर से उछलती हुई दूर तक हवा में उड़ती जा रही हो। आर्नोल्ड के इस आंखों देखा हाल के बाद मीडिया में यूएफओ को फ्लाइंग सॉसर या उड़न तश्तरी कहा जाने लगा। यानी जून 1947 से उड़न तश्तरी शब्द प्रचलन में आया था।

(जारी है एलियंस की कहानी)

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