रूसी राष्ट्रपति G20 शिखर सम्मेलन में आते हैं, तो क्या उन्हें किया जाएगा गिरफ्तार? पुतिन के भारत आने पर सस्पेंस
Will Vlaidmir putin Visit India for G20: क्या सितंबर महीने में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत का दौरा करेंगे?
हर किसी के मन में यही सवाल है..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिसंबर में जी20 की अध्यक्षता संभालने वाला भारत, 9 और 10 सितंबर को नई दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत जी20 देशों के प्रमुखों के शिरकत करने की उम्मीद है।

लेकिन, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
व्लादिमीर पुतिन फिलहाल खुद से कुछ भी कहने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, कि "मुझे नहीं पता। मैंने इसके बारे में नहीं सोचा हैं, हम देखेंगे।
जी20 में भाग लेने के संबंध में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए पुतिन ने 31 जुलाई को टीएएसएस के हवाले से ये बातें कही थीं।
रूसी नेता ने पिछले कुछ वर्षों में हाई-प्रोफाइल शिखर सम्मेलनों में भाग न लेने की आदत बना ली है।
पुतिन ने जनवरी 2021 में G20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया और वो जुलाई 2022 में इंडोनेशिया के बाली में G20 शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं हुए थे।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने उनकी जगह ली थी।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोस ने जुलाई में कहा था, कि पुतिन ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। कोविड -19 महामारी और उसके बाद के वैश्विक प्रतिबंधों के बाद से, पहली बार ब्रिक्स की ये बैठक व्यक्तिगत हो रहा है, जबकि पिछली ब्रिक्स की बैठक वर्चुअल की गई थी। ब्रिक्स में शामिल होने के भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी जा रहे हैं।
23 और 24 अगस्त को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ब्राजील, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेता भाग लेंगे।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस को बताया, कि पुतिन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपना भाषण वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देंगे। पेसकोव ने यह भी पुष्टि की, कि लावरोव व्यक्तिगत रूप से शिखर सम्मेलन में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे।
दिलचस्प बात यह है, कि पुतिन के दक्षिण अफ्रीका में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लेने का फैसला उस वक्त किया गया है, जब मार्च में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) ने पुतिन और शीर्ष रूसी अधिकारी मारिया अलेक्सेवना लावोवा-बेलोवा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
हेग स्थित अदालत ने कहा., कि यूक्रेन में रूसी बलों द्वारा किए गए कथित युद्ध अपराधों के लिए रूसी राष्ट्रपति ज़िम्मेदार हैं।
आईसीसी ने कहा, कि पुतिन कथित तौर पर आबादी (बच्चों) के गैरकानूनी निर्वासन के युद्ध अपराध और यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों से रूसी संघ में आबादी (बच्चों) के गैरकानूनी स्थानांतरण के लिए जिम्मेदार हैं।
हालांकि, मॉस्को ने उस समय आईसीसी के वारंट को 'अर्थहीन' बताते हुए पूरी तरह से खारिज कर दिया और कहा, कि रूस 2016 में अदालत से हट गया था।
रूस ने कहा था, कि "रूस अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के रोम क़ानून का सदस्य नहीं है और रूस का आईसीसी के प्रति कोई दायित्व नहीं है। रूस इस निकाय के साथ सहयोग नहीं करता है, और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय से गिरफ्तारी के लिए संभावित (दिखावा) हमारे लिए कानूनी रूप से अमान्य होगा।"
द कन्वर्सेशन के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका चूंकी आईसीसी का सदस्य देश है, लिहाजा दक्षिण अफ्रीका के ऊपर पुतिन को गिरफ्तार करने और उन्हें आईसीसी को सौंपने का कानूनी दायित्व था।
लेकिन, भारत ने आईसीसी के रोम स्टैट्यू पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इसलिए भारत भी आईसीसी के फैसले को मानने के लिए कानून तौर पर बाध्य नहीं है।
वहीं, अगर भारत आईसीसी का सदस्य भी रहता, फिर भी एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारत इस तरह के कदम उठाना तो दूर, ऐसे कदम उठाने को लेकर सोचता भी नहीं। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारत किसी भी तरह के धर्मसंकट में नहीं होगा और भारत चाहेगा, कि रूसी राष्ट्रपति शिखर सम्मेलन में शिरकत करें।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में एक्सपर्टस ने बताया है, कि रूस, नई दिल्ली में एक एडवांस टीम भेज रहा है, लेकिन अभी तक यह तय नहीं हुआ है, कि पुतिन बैठक में शामिल होंगे या नहीं।
मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने अखबार को बताया, कि अंतिम फैसला संभवतः शिखर सम्मेलन की तारीख के करीब ही लिया जाएगा।
हालांकि, मामले से जुड़े लोगों ने कहा, कि रूस ने 'सैद्धांतिक रूप से' फैसला लिया था, कि राष्ट्रपति पुतिन शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जिसकी मेजबानी भारत ने जुलाई में की थी। हालांकि, भारत ने वो बैठक वर्चुअल की थी।
भारत के पूर्व राजदूत विवेक काटजू ने अखबार से कहा, कि भारत को शिखर सम्मेलन पर लटके यूक्रेन मामले का समाधान करना होगा।
काटजू ने कहा, कि "रूसी अग्रिम टीम की यात्रा कम से कम यह संकेत देती है, कि रूसियों ने उच्चतम स्तर पर जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के विकल्पों को बंद नहीं किया है।"
नई दिल्ली की तरफ से कोई पुष्टि नहीं
वहीं, पिछले दिनों न्यूज18 ने एक सूत्र के हवाले से कहा था, कि "हमने रूस को निमंत्रण भेज दिया है। अगर पुतिन आते हैं, तो जी20 और भी सफल होगा। लेकिन, अभी उनकी उपस्थिति पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है भारत सभी आमंत्रितों की पूर्ण भागीदारी की आशा करता है।"
भारतीय आधिकारिक सूत्र ने कहा, कि "भारत भी जेद्दा वार्ता में भाग लेगा। बैठक में या तो दूतावास के स्थानीय प्रतिनिधि या दिल्ली के प्रतिनिधि शामिल होंगे। हमें आमंत्रित किया गया है, और हम जायेंगे। हमारा दृष्टिकोण तटस्थ और संतुलित है। हम अपने विचार देंगे, चाहे वह सऊदी मंच हो या अमेरिकी मंच। हमने हमेशा शांति के लिए संघर्ष किया है।"
आपको बता दें, कि सऊदी अरब ने यूक्रेन में शांति के लिए जेद्दा में एक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया है, जिसमें भारत को भी आमंत्रित किया गया है और भारत ने इस सम्मेलन में भाग लेने का फैसला किया है।
हालांकि, इस शिखर सम्मेलन में रूस को आमंत्रित नहीं किया गया है। वहीं, भारतीय अधिकारी ने कहा, कि "भारत का तेल, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में रूस में रणनीतिक हित है। अगर हम बैठक में शामिल होते हैं तो रूस नाराज नहीं होगा।"
जुलाई की शुरुआत में जी20 में पुतिन की उपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, कि वह किसी विशेष नेता पर प्रतिक्रिया जारी नहीं कर सकते हैं। लिहाजा, फिलहाल अभी तय नहीं हो पाया है, कि पुतिन शामिल होंगे या नहीं, लेकिन भारत की कोशिश ये है, कि पुतिन बैठक में शामिल हों, ताकि जी20 शिखर सम्मेलन की भव्यता और बढ़ जाए।












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