सुवेंदु अधिकारी के PA की हत्या की जांच करेगी CBI, अब तक 3 गिरफ्तार लोग कौन-कौन? हाईप्रोफाइल मर्डर की कहानी
Suvendu Adhikari PA Murder (Chandra Nath Rath Case): पश्चिम बंगाल की सियासत में 'तूफान' लाने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है, जिससे कई बड़े चेहरों की नींद उड़ सकती है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद और निजी सहायक (PA) रहे चंद्रनाथ रथ की बेरहमी से हुई हत्या की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हवाले कर दी गई है। राज्य सरकार की सिफारिश पर मुहर लगते ही CBI ने कोलकाता पुलिस की FIR को टेकओवर कर लिया है।
खबर है कि मंगलवार (12 मई) को ही CBI की एक विशेष टीम बंगाल पहुंचकर इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की कड़ियों को जोड़ना शुरू कर देगी। इस कहानी में सिर्फ बंगाल की राजनीति ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बलिया और बिहार के बक्सर के 'शार्पशूटरों' का ऐसा जाल बुना गया है, जिसने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि अब तक 3 गिरफ्तार लोग कौन-कौन हैं और हाईप्रोफाइल मर्डर की पूरी कहानी क्या है।

CBI के हाथ में केस: अब शुरू होगा एक्शन
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड महज एक मर्डर नहीं, बल्कि बंगाल की सत्ता के गलियारों से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला है। चंद्रनाथ रथ लंबे समय से शुभेंदु अधिकारी के 'दाएं हाथ' माने जाते थे। जब से शुभेंदु TMC छोड़कर भाजपा में आए, चंद्रनाथ साये की तरह उनके साथ रहे।
यही वजह है कि उनकी हत्या ने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया। अब जब CBI मैदान में उतर चुकी है, तो माना जा रहा है कि इस हत्या के पीछे के 'असली मास्टरमाइंड' का चेहरा जल्द ही बेनकाब होगा। जांच एजेंसी अब उन सभी मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड्स और संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन को खंगालने जा रही है, जो अब तक की जांच में धुंधले थे।
अब तक कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?
इस केस में अब तक तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस का दावा है कि तीनों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर सामने आ रही है।
1. राज सिंह उर्फ चंदन
- उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के गड़वार थाना क्षेत्र के बुढ़ऊ कुरेजी गांव का रहने वाला राज सिंह इस केस का सबसे चर्चित नाम बन गया है। उसे अयोध्या-बस्ती हाईवे से हिरासत में लिया गया।
- पुलिस के मुताबिक राज सिंह कथित तौर पर शार्पशूटर माना जाता है। उसका नाम पहले भी हत्या के एक मामले में सामने आ चुका है। वर्ष 2020 में दिव्यांग अंडा व्यापारी हत्याकांड में वह आरोपी रहा था और जेल भी जा चुका है। फिलहाल वह जमानत पर बाहर था।
- राज सिंह का राजनीतिक कनेक्शन भी चर्चा में है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर कई भाजपा नेताओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरें मौजूद हैं। उसने खुद को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा उत्तर प्रदेश का प्रदेश महासचिव बताया है।
- उसकी तस्वीरें मंत्री दयाशंकर सिंह और पूर्व सांसद Brij Bhushan Sharan Singh के साथ भी वायरल हो चुकी हैं। हालांकि जांच एजेंसियां फिलहाल इन तस्वीरों को अपराध से सीधे जोड़कर नहीं देख रही हैं, लेकिन उसके संपर्कों की जांच जरूर की जा रही है।
2. मयंक मिश्रा
मयंक राज मिश्रा को बिहार के बक्सर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार वह राज सिंह के संपर्क में था और वारदात से जुड़े कई अहम सुराग उसके जरिए मिले हैं। जांच एजेंसियां उसके मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और यात्रा विवरण खंगाल रही हैं।
3. विक्की मौर्य
विक्की मौर्य भी बिहार के बक्सर से पकड़ा गया। पुलिस का कहना है कि वह मयंक मिश्रा का करीबी दोस्त है। शुरुआती पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने का दावा किया जा रहा है।
तीनों आरोपियों को अदालत ने 24 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। अभियोजन पक्ष की मांग पर अदालत ने सबूत मिटाने से जुड़ी धाराएं भी जोड़ने की अनुमति दी।
हत्या में 8 लोगों की भूमिका का शक
जांच एजेंसियों का मानना है कि हत्या की साजिश और हमले में कम से कम आठ लोग शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों ने कई दिनों तक इलाके की रेकी की थी। हमलावरों की गतिविधियां टोल प्लाजा और सड़क किनारे लगे CCTV कैमरों में भी रिकॉर्ड हुई हैं।
एक अहम सुराग उस समय मिला जब बाली टोल प्लाजा पर UPI से भुगतान किया गया। पुलिस ने उसी डिजिटल ट्रांजैक्शन से जुड़े मोबाइल नंबर के जरिए एक आरोपी तक पहुंच बनाई और फिर बाकी नाम सामने आने लगे।

बलिया से उठी गिरफ्तारी की कहानी
राज सिंह की गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश के बलिया में भी हलचल बढ़ गई। परिवार लगातार दावा कर रहा है कि उसका पश्चिम बंगाल से कोई संबंध नहीं है। राज सिंह की मां जयवंती देवी ने मीडिया से कहा कि वह बेटे के साथ लखनऊ में एक शादी समारोह में गई थीं। वहां से लौटते समय दोनों अयोध्या दर्शन के लिए रुके थे।
उनका आरोप है कि ढाबे पर खाना खाते समय अचानक SOG टीम पहुंची और राज सिंह को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें बताया गया कि कोलकाता पुलिस पूछताछ के लिए उसे साथ ले जा रही है। परिवार का कहना है कि वे कभी कोलकाता गए तक नहीं और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
एक UPI पेमेंट और हत्यारों का अंत
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस वारदात में कम से कम 8 लोग शामिल थे। हत्यारों ने कई दिनों तक चंद्रनाथ की रेकी की थी। लेकिन, अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक गलती जरूर करता है।
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद जब हमलावर कार से भाग रहे थे, तो उनकी गाड़ी बाली टोल प्लाजा से गुजरी। वहां टोल का भुगतान करने के लिए एक आरोपी ने UPI (डिजिटल पेमेंट) का इस्तेमाल किया। इसी एक ट्रांजैक्शन ने पुलिस को वो मोबाइल नंबर दे दिया, जिसके जरिए पूरी साजिश बेनकाब हो गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और उस गाड़ी के डिजिटल फुटप्रिंट्स को मैच कर लिया है।
साजिश का हथियार: फर्जी नंबर प्लेट और 'घिसा' हुआ चेसिस नंबर
यह मर्डर पूरी तरह प्रोफेशनल अंदाज में प्लान किया गया था। घटनास्थल से पुलिस ने एक कार और दो बाइक बरामद की हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थीं।
इतना ही नहीं, हमलावरों ने कार का चेसिस और इंजन नंबर तक घिसकर मिटा दिया था ताकि गाड़ी के असली मालिक तक न पहुंचा जा सके। एक मोटरसाइकिल वारदात की जगह से 4 किलोमीटर दूर लावारिस हालत में मिली, जो बताती है कि शूटरों ने भागने के लिए बार-बार वाहन बदले थे।

कौन थे चंद्रनाथ रथ? (Who Was Chandranath Rath)
- चंद्रनाथ रथ लंबे समय से सुवेंदु अधिकारी के भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। राजनीति में आने से पहले वह एयरफोर्स में अधिकारी रहे थे। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने कुछ समय कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम किया और फिर राजनीति से जुड़ गए।
- जब सुवेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में थे, उसी समय से चंद्रनाथ उनके साथ काम कर रहे थे। वर्ष 2019 में वह सुवेंदु की आधिकारिक टीम का हिस्सा बने। भवानीपुर विधानसभा सीट पर चुनाव अभियान संभालने में भी उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है। यही वह सीट थी जहां से सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था।
- चंद्रनाथ का परिवार भी पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा था। उनकी मां हाशी रथ स्थानीय पंचायत राजनीति में सक्रिय रही थीं, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गईं।
- करीबी लोग बताते हैं कि चंद्रनाथ बेहद शांत और लो-प्रोफाइल स्वभाव के व्यक्ति थे। वह सार्वजनिक मंचों से दूर रहते थे और बहुत कम तस्वीरों में नजर आते थे।
कैसे तय होगी अब CBI की दिशा?
CBI के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करना है कि क्या पकड़े गए ये तीन लोग सिर्फ मोहरे हैं या इन्होंने ही ट्रिगर दबाया था?
🔹कड़ी जोड़ना: क्या यूपी-बिहार के इन शूटरों को किसी बड़े राजनीतिक चेहरे ने सुपारी दी थी?
🔹डिजिटल सबूत: टोल प्लाजा का वो UPI ट्रांजैक्शन और मोबाइल टावर लोकेशन इस केस में सबसे बड़े गवाह बनेंगे।
🔹मर्डर वेपन: अभी तक वो असली हथियार बरामद होना बाकी है जिससे गोलियां चलाई गई थीं।
बंगाल की जनता और विपक्षी दल अब CBI की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। क्या यह जांच केवल अपराधियों तक सीमित रहेगी या फिर इस हाई-प्रोफाइल मर्डर के पीछे छिपी बड़ी राजनीतिक 'साजिश' का पर्दाफाश होगा? यह आने वाला वक्त बताएगा।















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